जनतंत्र है, न गणतंत्र है...ये भ्रमतंत्र है; सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफे के बाद क्या-क्या कह गए अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि जो यूजीसी का रेगुलेशन आया है उसमें सामान्य वर्ग के जो विद्यार्थी है उसे स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। उनके विरुद्ध समता समिति के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जाएगी। यदि आपकी बेटी है तो उसका शारीरिक शोषण फर्जी शिकायतों के निस्तारण के दौरान किया जा सकता है।

माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य बटुक ब्राह्मणों को चोटी पकड़कर पीटे जाने और यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ 26 जनवरी को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने जमकर अपना गुस्सा व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस समय न जनतंत्र है, न गणतंत्र है, यह भ्रमतंत्र है। आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस समय सामान्य वर्ग मानसिक रूप से पूरी तरह अलग हो चुका है।
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि पिछले दो सप्ताह के घटनाक्रम यदि देखेंगे तो मौनी अमावस्या के स्नान में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज के बटुक शिष्यों के साथ चोटी या शिखा पकड़कर, जो ब्राह्मण समाज का जो सांस्कृतिक-धार्मिक प्रतीक है, उसका मान मर्दन किया गया। जो वीडियो सामने आए हैं उसमें आप देखेंगे कि कितने गंदे तरीके से बटुक शिष्यों को चोटी पकड़कर घसीटकर पीटा गया। बूढ़े-बूढ़े संन्यासियों को जूतों-चप्पलों, पैरों से मारा गया। अगर प्रशासन के लोग ही इस ढंग से मैसेज देंगे तो समाज के दूसरे वर्ग हैं वे ब्राह्मण समाज पर कितना अत्याचार करेंगे।
इसके अलावा जो दूसरा विषय था, उसमें 13 जनवरी को गजट है भारत सरकार का। जो यूजीसी का रेगुलेशन आया है उसमें सामान्य वर्ग के जो विद्यार्थी है यूनिवर्सिटी में उनको स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। उनके विरुद्ध समता समिति के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जाएगी। यदि आपकी बेटी है तो उसका शारीरिक शोषण समता समिति के माध्यम से फर्जी शिकायतों के निस्तारण के दौरान किया जा सकता है। यदि आपका बेटा प्रतिभावान है तो कोई भी उसके खिलाफ एक शिकायत डाल सकता है, आपके बेटे का पूरा भविष्य बर्बाद कर सकता है। समता समिति के सदस्य उनका शोषण कर सकते हैं। इस पर सबसे बड़ी नाराजगी यह है कि जो ब्राह्मण समाज के जनप्रतिनिधि है, जो अपने आपको समाज का नेता समझते हैं, वे भी कुछ नहीं बोल रहे हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे वे किसी कारपोरेट कंपनी के इम्प्लाई हों। चुप्पी साध कर बैठे हैं। उनको लग रहा है जैसे किसी कारपोरेट कंपनी के सीईओ जब तक आदेश नहीं देंगे तब तक वे कुछ नहीं बोलेंगे। मैं अभी भी कहता हूं कि आपमें अभी भी थोड़ी रीढ़ बची हो तो तत्काल इस्तीफा दे दें। सामान्य वर्ग अब भाजपा के मौजूदा नेतृत्व के साथ नहीं है। सरकार अस्थिरता के माहौल में है। यदि ब्राह्मण एमपी-एमएलए में जमीर बचा है तो तत्काल इस्तीफा दे दें। जनता के साथ खड़े हो जाएं। यदि अभी जनता के साथ खड़े नहीं होते हैं तो क्या आप सोच रहे हैं कि चुनाव में जीत पाएंगे। समाज मानसिक रूप से आप से अलग हो चुका है।




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