पति को कमाई बताने के लिए किया जा सकता है बाध्य, वैवाहिक विवाद में हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने घरेलू हिंसा और भरण-पोषण के मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया है कि पति को अपनी वास्तविक आय और संपत्ति का ब्योरा देने के लिए निचली अदालत बाध्य कर सकती है।

UP News: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने घरेलू हिंसा के एक मामले में स्पष्ट किया है कि पति को उसके आय व सम्पत्ति का ब्योरा देने के लिए ट्रायल कोर्ट बाध्य कर सकती है। निचली अदालत ने पति को आय व संपत्ति का ब्योरा पेश करने का आदेश देने की पत्नी के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने निचली अदालत के उक्त आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि भरण-पोषण और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में वास्तविक आय का खुलासा अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय ने निचली अदालत को पत्नी की अर्जी पर नये सिरे से विचार करने का भी आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने पत्नी व नाबालिग पुत्र की ओर से दाखिल एक याचिका पर पारित किया है। दरअसल पत्नी ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और आर्थिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, लखनऊ के समक्ष घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मुकदमा दाखिल किया है।
मुकदमे की सुनवायी के दौरान उसने अदालत में एक अर्जी पेश कर मांग की थी कि पति को अपने आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय दस्तावेज दाखिल करने का आदेश दिया जाए, हालांकि निचली अदालत ने पत्नी और उसके नाबालिग पुत्र की ओर से पेश उक्त अर्जी 19 जनवरी 2026 को खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आयकर विभाग से पति के पिछले दो वर्षों के आयकर रिटर्न मंगवाए। रिकार्ड के अनुसार, पति पेशे से आर्किटेक्ट है और उसकी वार्षिक आय 4.85 लाख से 5.07 लाख रुपये के लगभग पायी गई, जबकि निचली अदालत में उसने खुद को श्रमिक बताया है। न्यायालय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2021 में रजनीश बनाम नेहा के मामले में दिये गए फैसले के अनुसार पति की आय और संपत्ति के सही खुलासे के लिए उससे आवश्यक दस्तावेज मंगवाए जा सकते हैं।




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