अखिलेश यादव का रुक्मिणी दांव निषादों को सपा के पाले में लाने में कितना कारगर? समझें
अखिलेश यादव ने रुक्मिणी देवी को महिला सभा की कमान सौंप कर निषाद समाज के वोटों को पार्टी में बनाए रखने का बड़ा दांव खेला है। देखना होगा अखिलेश यादव का रुक्मिणी दांव निषादों को सपा के पाले में लाने में कितना कारगर?

UP News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी को महिला सभा की कमान सौंप कर निषाद समाज के वोटों को पार्टी में बनाए रखने का बड़ा दांव खेला है। उनके इस कदम को लोकसभा चुनाव 2024 की तरह निषाद समाज को मिशन-2027 में भी सपा के पाले में रखने की कवायद माना जा रहा है। कुछ उसी तर्ज पर जैसे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी को पार्टी में लाकर निषाद, केवट, बिंद और मल्लाह जातियों को बड़े पैमाने पर झोली में कर लिया था। सियासी जानकार इसे भाजपा द्वारा साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष बनाकर निषाद समाज को संदेश दिए जाने की कोशिशों की काट के रूप में भी देख रहे हैं।
बुंदेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक असर
सियासी जानकारों की मानें तो समाजवादी पार्टी काफी समय से निषाद पार्टी के डा. संजय निषाद को पाले में लाने के लिए लगातार डोरे डालती रही हैं। खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कई बार डा. संजय निषाद को लेकर तीखे तंज भी किए। निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह समाज की अहमियत को समझते हुए ही अखिलेश यादव ने रुक्मिणी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का दांव चला है। अखिलेश की मंशा आगरा, जालौन, फतेहपुर, कानपुर देहात के अलावा सुलतानपुर से लेकर अयोध्या, मिर्जापुर, गोरखपुर और वाराणसी जैसे निषाद समाज बाहुल्य क्षेत्र में निषाद जाति के वोटों को पाले में करने की है।
देखना दिलचस्प होगा कि सपा का यह दांव कितना कारगर होगा जबकि भाजपा ने हाल ही में निषाद समाज की साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष बनाया है। साथ ही निषाद समाज को बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए चौरीचौरा से विधायक रहे जय प्रकाश निषाद और हमीरपुर के रहने वाले बाबू राम निषाद को राज्यसभा भेजा गया था।
अखिलेश ने 2024 में निषाद वोट सपा के पाले में खिसका
निषादों के महत्व को भांपते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव 2024 में बड़ा दांव खेला था। निषाद समाज से ज्यादा टिकट दिए गए। नतीजा, निषाद समाज से सपा के दो सांसद जीते। इसमें सुलतानपुर के रामभुआल निषाद और निषाद पार्टी के संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को हराने वाले संतकबीरनगर के सांसद लक्ष्मीकांत पप्पू निषाद शामिल हैं। फतेहपुर सीट पर साध्वी निरंजन ज्योति को सपा के नरेशचंद्र उत्तम ने हराया। इसके पीछे भी निषाद वोटों का सपा की ओर खिसक जाना बड़ा कारण माना गया था। नतीजा यह रहा कि वर्ष 2024 में भाजपा के दोनों निषाद सांसद चुनाव हार गए।
कभी सपा-बसा तो कभी भाजपा के पाले में रहे निषाद
निषाद समाज वर्ष 2017 से पहले तक समाजवादी पार्टी-बसपा दोनों के पाले में रहा था लेकिन भाजपा ने इसे वर्ष 2017 में गैर-यादव ओबीसी की रणनीति के तहत अपने पाले में कर लिया था। वर्ष 2022 के चुनाव तक निषाद समाज के नेता भाजपा के पाले में मजबूती से जुड़े रहे। निषाद पार्टी के डा. संजय निषाद के एनडीए में आने से भाजपा को लाभ हुआ और निषाद पार्टी के 11 विधायक चुने गए। साध्वी निरंजन ज्योति फतेहपुर से और प्रवीण निषाद संतकबीरनगर से वर्ष 2019 में भाजपा से चुनाव जीते।
मुलायम ने चला था मल्लाह दांव
1993 में सपा-बसपा गठबंधन था और मुलायम उस चुनाव में हर मल्लाह बहुल सीट पर मल्लाहों की बेटी फूलन को रिहा करने का वादा कर रहे थे। उस चुनाव में ज्यादातर मल्लाह बहुल सीटों पर गठबंधन जीता था। फूलन के जिले जालौन की तो चारों सीटें उरई, कोंच, माधोगढ़ और कालपी गठबंधन ने जीत ली थीं। 1994 में मुलायम ने वादा निभाते हुए फूलन को सपा से सांसद का चुनाव लड़ाया। वह 1996 में जीतीं लेकिन 1998 में हार गईं। 1999 में फूलन फिर लोकसभा चुनाव जीतीं और सांसद रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई।
मुलायम सिंह के साथ रहे निषादों के बड़े क्षत्रप
मुलायम सिंह यादव के समय से सपा में निषाद समाज के कई बड़े नेता जैसे हमीरपुर के विशंभर प्रसाद निषाद, गोरखपुर के रामभुआल निषाद, अकबरपुर से शंखलाल मांझी और संतकबीरनगर से लक्ष्मीकांत पप्पू निषाद आदि थे। कभी बसपा के बड़े नेता रहे जमुना प्रसाद निषाद का परिवार भी बाद में सपा के साथ जुड़ गया था। मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी को पार्टी में शामिल कर पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड तक के निषादों को पाले में कर लिया था। नतीजा यह था कि फूलनदेवी मिर्जापुर से दो बार सपा की सांसद रहीं।
बिहार में निषाद समाज एनडीए के साथ रहा
बिहार में हुए चुनावों में निषाद समाज का वोट एनडीए के साथ रहा था। निषाद समाज के कद्दावर नेता कहे जाने वाले मुकेश सहनी को राजद ने डिप्टी सीएम बनाने का वादा किया लेकिन निषाद समाज पर असर नहीं हुआ। दरअसल, मुकेश सहनी एनडीए की पिछली सरकार में भाजपा की मदद से एमएलसी बने और फिर राजद के पाले में आ गए। इसके चलते निषाद समाज में उनकी साख को लेकर सवाल उठे, जबकि भाजपा के पाले में निषादों के दो कद्दावर नेता मदन सहनी और हरी सहनी थे। ऐसे में निषाद समाज एनडीए के पाले में शिफ्ट हुआ। यूपी में अखिलेश का यह दांव कितना असरकारी होगा यह काबिलेगौर रहेगा।
रुक्मिणी का राजनीति सफर
फूलन की हत्या के कुछ साल बाद तक रुक्मिणी सपा से जुड़ी रहीं। बाद में उन्होंने फूलन के संगठन एकलव्य सेना का काम शुरू किया। साथ में प्रगतिशील मानव समाज पार्टी में भी सक्रिय हो गईं। छह साल पहले यह पार्टी छोड़ कर उन्होंने लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ली। उन्हें महिला सभा का सचिव बनाया गया था। 2022 और 2024 के चुनावों में मल्लाह बहुल सीटों पर अखिलेश की रथयात्राओं में उन्हें खास तौर पर आगे किया जाता था। लोकसभा चुनाव के दौरान तो रुक्मिणी मां को लेकर रथयात्रा में शामिल हुई थीं। वर्ष 2022 में उन्होंने डिंपल यादव के लिए मैनपुरी में चुनाव प्रचार किया था। फूलन देवी की चार बहनों में सबसे बड़ी रुक्मिणी फूलन की तब भी मददगार थीं, जब वह गैंग के साथ फरारी में बीहड़ की खाक छानी थी। रुक्मिणी बताती हैं-इसी वजह से मेरे पति रामपाल की हत्या हो गई। बच्चे छोटे थे। तब बाबू जी (मुलायम सिंह) ने मदद की। मैं ग्वालियर में रहने लगी। केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी रुक्मिणी ने पति की हत्या के बाद कड़ी मेहनत कर परिवार को पाला। एक बेटा एमपी पुलिस में सिपाही है, जबकि दूसरा गांव में ही रहकर दूसरों की खेती-बाड़ी करता है।




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