Who is Rukmini Nishad? Akhilesh Yadav, who appointed her as SP state women council president, replicated Mulayam tactic कौन हैं रुक्मिणी निषाद? जिसे आगे कर अखिलेश यादव ने दोहराया मुलायम का मल्लाह दांव, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कौन हैं रुक्मिणी निषाद? जिसे आगे कर अखिलेश यादव ने दोहराया मुलायम का मल्लाह दांव

सपा ने दस्यु सुंदरी रहीं फूलन देवी की बहन रुक्मिणी निषाद को प्रदेश महिला सभा का अध्यक्ष बनाया है। माना जा रहा है कि अखिलेश  यादव ने मुलायम वाला मल्लाह दांव दोहराने की कोशिश की है।

Wed, 25 March 2026 09:16 PMDeep Pandey कानपुर, हिन्दुस्तान
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कौन हैं रुक्मिणी निषाद? जिसे आगे कर अखिलेश यादव ने दोहराया मुलायम का मल्लाह दांव

UP News: यूपी में चुनाव की दहलीज पर खड़े यूपी में नौ साल से काबिज भाजपा का मुकाबला करने को सपा की तैयारियां तेज हैं। बुधवार को सपा ने दस्यु सुंदरी रहीं फूलन देवी की बहन रुक्मिणी निषाद को प्रदेश महिला सभा का अध्यक्ष बनाया है। माना जा रहा है कि वर्ष 1993 में मुलायम ने फूलन को रिहा करने का वादा कर जो मास्टर स्ट्रोक खेला था, अखिलेश उस मल्लाह वाले दांव को दोहराने की कोशिश में हैं।

1993 में सपा-बसपा गठबंधन था और मुलायम उस चुनाव में हर मल्लाह बहुल सीट पर मल्लाहों की बेटी फूलन को रिहा करने का वादा कर रहे थे। उस चुनाव में ज्यादातर मल्लाह बहुल सीटों पर गठबंधन जीता था। फूलन के जिले जालौन की तो चारों सीटें उरई, कोंच, माधोगढ़ और कालपी गठबंधन ने जीत ली थीं। 1994 में मुलायम ने वादा निभाते हुए फूलन को सपा से सांसद का चुनाव लड़ाया। वह 1996 में जीतीं लेकिन 1998 में हार गईं। 1999 में फूलन फिर लोकसभा चुनाव जीतीं और सांसद रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई। फूलन की चार बहनें थीं, जिनमें रुक्मिणी सबसे बड़ी हैं। फूलन उनसे दो साल छोटी थीं। फूलन की हत्या के बाद बहनों में राजनीतिक विरासत को लेकर खींचतान भी हुई। इसमें रुक्मिणी आगे रहीं। कुछ समय बाद ही तीसरे नंबर की बहन रामकली की संदेहास्पद हालत में मौत हो गई। अब रुक्मिणी यूपी में सपा की राजनीति में और सबसे छोटी मुन्नी दिल्ली में सक्रिय रहती हैं।

रुक्मिणी का संघर्ष

फूलन देवी की चार बहनों में सबसे बड़ी रुक्मिणी फूलन की तब भी मददगार थीं, जब उन्होंने गैंग के साथ फरारी में बीहड़ की खाक छानी थी। उन्होंने इसकी कीमत भी चुकाई। औरैया के गांव बूढ़ादाना के मजरा मड़ैया में बेहद गरीब परिवार में ब्याही रुक्मिणी को पुलिस प्रताड़ना से लेकर दबंगों की रंजिश तक झेलनी पड़ी। वह बताती हैं-इसी वजह से मेरे पति रामपाल की हत्या हो गई थी। बच्चे छोटे थे। तब बाबू जी (मुलायम सिंह) ने मदद की। मैं ग्वालियर में रहने लगी।

एक बेटा सिपाही, दूसरा किसान

केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी रुक्मिणी ने पति की हत्या के बाद कड़ी मेहनत कर परिवार को पाला। बेटे क्रमश: तीन साल और आठ माह की उम्र में ही बिना पिता के हो गए थे। ऐसे में मां ने ही उन्हें पढ़ाया। उनके दो बेटों में से एक एमपी पुलिस में सिपाही है, जबकि दूसरा गांव में ही रहकर दूसरों की खेती-बाड़ी करता है। बेहद तंग हाल ही में परिवार गुजारा करता रहा है।

राजनीति में सक्रिय

फूलन की हत्या के कुछ साल बाद तक रुक्मिणी सपा से जुड़ी रहीं। बाद में उन्होंने फूलन के संगठन एकलव्य सेना का काम शुरू किया। साथ में प्रगतिशील मानव समाज पार्टी में भी सक्रिय हो गईं। छह साल पहले यह पार्टी छोड़ कर उन्होंने लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ली। उन्हें महिला सभा का सचिव बनाया गया था। 2022 और 2024 के चुनावों में मल्लाह बहुल सीटों पर अखिलेश की रथयात्राओं में उन्हें खास तौर पर आगे किया जाता था। लोकसभा चुनाव के दौरान तो रुक्मिणी मां को लेकर रथयात्रा में शामिल हुई थीं।

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कहां पड़ेगा असर

रुक्मिणी के सपा में महत्वपूर्ण पदाधिकारी बनने से पार्टी को आसपास के जनपदों में निषाद, मल्लाह, बिंद वोटों का लाभ हो सकता है। खास तौर से औरैया, इटावा, जालौन, कानपुर देहात आदि जिलों में फूलन की बिरादरी के वोटरों की संख्या अच्छी खासी तादाद में है।

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रुक्मिणी बोलीं

बेहमई कांड में फूलन शामिल नहीं थीं। उस दिन वह इटावा के अस्पताल में मेरे साथ मौजूद थीं, जहां मेरा बेटा ऑपरेशन से पैदा हुआ था। महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने और अपने पैरों पर खड़े होने पर ही महिलाएं सुरक्षित रहेंगी। वह इस दिशा में महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करेंगी।

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