High Court ruled that the mother a doctor was given custody of the child instead of the ailing father बीमार पिता के बजाय डॉक्टर मां को मिला हक, बच्चे की कस्टडी पर हाईकोर्ट का फैसला, कहा- बच्चे का हित ही सर्वोपरि, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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बीमार पिता के बजाय डॉक्टर मां को मिला हक, बच्चे की कस्टडी पर हाईकोर्ट का फैसला, कहा- बच्चे का हित ही सर्वोपरि

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसकी मां को देते हुए कहा कि बच्चे के भविष्य और समग्र विकास को सर्वोपरि माना जाएगा। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने यह आदेश डॉ भावना सिंह की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

Thu, 23 April 2026 10:36 PMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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बीमार पिता के बजाय डॉक्टर मां को मिला हक, बच्चे की कस्टडी पर हाईकोर्ट का फैसला, कहा- बच्चे का हित ही सर्वोपरि

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसकी मां को देते हुए कहा कि बच्चे के भविष्य और समग्र विकास को सर्वोपरि माना जाएगा। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने यह आदेश डॉ भावना सिंह की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि बच्चे के पिता शराब के आदी हैं, घरेलू हिंसा का इतिहास है और आर्थिक रूप से भी स्थिर नहीं हैं, इसलिए बच्चे का सही पालन-पोषण उनके पास संभव नहीं है। माता ने बताया कि उन्होंने अपने 10 वर्षीय बेटे का दाखिला शिमला के प्रतिष्ठित स्कूल में कक्षा 5 के लिए करा दिया है और इसके लिए लगभग 17 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं, पिता की ओर से कहा गया कि बच्चा उनके साथ मेरठ में रह रहा है और वहीं पढ़ाई कर रहा है। साथ ही बच्चे ने खुद पिता के साथ रहने की इच्छा जताई है।

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हाईकोर्ट ने कहा कहा बच्चे की कस्टडी के मामलों में बच्चे का सर्वोत्तम हित सबसे महत्वपूर्ण होता है। केवल बच्चे की इच्छा ही निर्णायक नहीं होती, बल्कि उसकी शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। कोर्ट ने बच्चे से बातचीत की, लेकिन पाया कि उसके बयान प्रभावित (ट्यूटर्ड) लग रहे थे, इसलिए उन्हें पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना।

कोर्ट ने कहा कि मां एक योग्य डॉक्टर हैं और आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं। बच्चे के लिए बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं। शिमला का स्कूल उच्च स्तर की शिक्षा और समग्र विकास के बेहतर अवसर प्रदान करता है। दूसरी ओर पिता को गंभीर शराब की लत है और उनका लीवर ट्रांसप्लांट हो चुका है। चिकित्सा खर्च भी उनके परिवार द्वारा उठाया गया, जिससे उनकी आर्थिक निर्भरता सामने आई।

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कोर्ट ने बच्चे की पढ़ाई शिमला के स्कूल में ही जारी रखने की अनुमति दी है साथ ही दोनों माता-पिता को महीने में एक बार स्कूल में मिलने (विजिट) का अधिकार दिया गया। कोर्ट ने स्कूल के हेडमास्टर को मुलाकात की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। छुट्टियों के दौरान बच्चे की कस्टडी दोनों माता-पिता के बीच बराबर बांटी जाएगी।

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