High Court has said that even a bullet hitting an innocent person will be considered murder निर्दोष को लगी गोली भी हत्या मानी जाएगी, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

निर्दोष को लगी गोली भी हत्या मानी जाएगी, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सजा काट रहे अपराधी की जमानत और सजा के स्थगन की अर्जी को खारिज कर दिया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास और अपराध की प्रकृति उसे राहत देने के योग्य नहीं बनाती है। अदालत ने अपने फैसले में डॉक्ट्रिन ऑफ ट्रांसफर ऑफ मैलिस का उल्लेख किया।

Tue, 21 April 2026 10:28 PMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
share
निर्दोष को लगी गोली भी हत्या मानी जाएगी, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सजा काट रहे अपराधी रिजवान की जमानत और सजा के स्थगन की अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास और अपराध की प्रकृति उसे राहत देने के योग्य नहीं बनाती है। अदालत ने अपने फैसले में ‘डॉक्ट्रिन ऑफ ट्रांसफर ऑफ मैलिस’ (दुर्भावना के हस्तांतरण का सिद्धांत) का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी एक की हत्या के इरादे से गोली चलाता है और वह गोली किसी दूसरे निर्दोष व्यक्ति को लग जाती है, तब भी वह हत्या के अपराध का ही दोषी माना जाएगा।

यह मामला साल 2019 का है, जब संभल के बनियाढेर थाना क्षेत्र में रिजवान ने एक दुकानदार से पैसों की मांग की थी। दुकानदार के मना करने पर रिजवान ने उसे जान से मारने की नीयत से गोली चलाई, जो चूक गई। हालांकि, दूसरी बार चलाई गई गोली वहां काम कर रहे शाकिर नाम के मजदूर को लग गई, जिसकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। सत्र न्यायालय ने इस मामले में रिजवान को हत्या और अन्य संगीन धाराओं में दोषी करार दिया था, जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:धर्म परिवर्तन पर परिवार ने पति-पत्नी को पहनाई जूतों की माला, घर से भी किया बेदखल

सुनवाई के दौरान अभियुक्त के वकील ने तर्क दिया था कि रिजवान का इरादा शाकिर को मारने का नहीं था, इसलिए यह हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का मामला है। साथ ही यह दावा भी किया गया था कि अभियुक्त का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है। हालांकि, सरकारी वकील ने इस दावे का कड़ा विरोध करते हुए अदालत के सामने 27 आपराधिक मामलों की एक लंबी सूची पेश की, जिसमें गंभीर अपराध शामिल थे। अदालत ने पाया कि अभियुक्त ने अपने हलफनामे में आपराधिक इतिहास के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी और वह एक आदतन अपराधी है। इन्हीं तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न कानूनी उदाहरणों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने रिजवान की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:आपराधिक मुकदमे में बरी होने पर भी सरकारी कर्मी की बहाली नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ये भी पढ़ें:खर्च नहीं उठा सकते तो शादी न करें, मेंटेनेंस केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।