खतरनाक मांझे को लेकर अब हाईकोर्ट सख्त, कानून बनाकर निर्माण और बिक्री रोकने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चाइनीज और नायलॉन मांझे की बिक्री व इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है। लगातार हो रहे हादसों को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को मांझे के निर्माण और ब्रिकी पर कानून बनाने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चाइनीज मांझा कहे जाने वाले लेड-कोटेड व नायलॉन मांझों की खरीद-बिक्री व इस्तेमाल रोकने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा है कि इस पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए सिर्फ शासनादेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि कानूनी प्रावधान बनाकर इसे रोकना होगा। न्यायालय ने राज्य सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि तथाकथित चाइनीज मांझों की निर्माण-बिक्री और इस्तेमाल जारी रहा तो हम पीड़ितों को सरकार द्वारा मुआवजा देने का आदेश देने को मजबूर होंगे। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवायी के लिए 11 मार्च की तिथि नियत करते हुए, सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर पारित किया। मामले की सुनवायी के दौरान याची ने न्यायालय को बताया कि फरवरी में लगभग दस लोग ऐसे मांझों से घायल हुए या उनकी मृत्यु हुयी। याचिका पर जवाब देते हुए, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 9 और 10 अक्टूबर को शासनादेश जारी करते हुए, मांझों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया जा चुका है। यह भी कहा गया कि ये सिंथेटिक मांझे हैं जिन्हें ‘चाइनीज मांझा’ गलत नाम दे दिया गया है, इससे ऐसा लगता है कि ये मांझे चीन से आयात होकर यहां आते हैं जबकि ऐसा नहीं है।
रोकने के लिए कठोर प्रावधान की जरूरत
सरकार की दलील से न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ। न्यायालय ने कहा कि जब भी ऐसे मांझे से गंभीर चोटें या मृत्यु की घटनाएं घटित होती हैं और वे मीडिया की सुर्खियां बनती हैं, तभी अधिकारी सक्रिय होते हैं, जबकि आवश्यक है कि ऐसे मांझे के निर्माण, विक्रय और उपयोग की रोकथाम के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें नियमित और निरंतर निगरानी की व्यवस्था हो। साथ ही इस पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा इसमें संलिप्त व्यक्तियों को उनके कृत्यों के लिए उत्तरदायी ठहराने के लिए विधि में उपयुक्त एवं कठोर प्रावधान किया जाना अनिवार्य है।
न्यायालय ने कहा कि सिर्फ शासनादेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं। न्यायालय ने मामले में नया शपथ पत्रदाखिल कर यह बताने को कहा कि ऐसे मांझे के निर्माण, विक्रय एवं उपयोग की रोकथाम के लिए कैसे विधिक प्रावधान लागू करने का सरकार का प्रस्ताव है, साथ ही यह भी दर्शाया जाए कि विधि का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को उत्तरदायी बनाने के लिए क्या ठोस कदम प्रस्तावित हैं।
न्यायालय ने कहा कि उत्तरदायित्व का प्रश्न केवल उन व्यक्तियों तक सीमित न रहे जो मांझे के निर्माण, विक्रय या उपयोग में संलिप्त हैं, बल्कि उन अधिकारियों/कर्मचारियों तक भी विस्तारित हो जो अपने वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहते हैं और निर्माण, विक्रय तथा उपयोग की रोकथाम सुनिश्चित करने में असफल रहते हैं।
लखनऊ में नौ दिन में एक की मौत आठ लोग घायल
शीशे का चूरा लगे खतरनाक मांझे के कारण लखनऊ में नौ दिनों में एक एमआर की मौत हुई और आठ लोग घायल हो गए। सबसे अधिक घटनाएं फ्लाईओवर और मुख्य मार्गों पर हुईं। शहर में मांझे का आतंक अब शहर में इस कदर है कि लोग घरों से निकलते हुए डर रहे हैं। लगातार बढ़ते हादसों से व्यापारी और आमजन सभी आक्रोश में हैं।
हाईकोर्ट और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद भी पुलिस-प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोक नहीं पा रहा है। बढ़ते हादसों को लेकर घायल हुए लोगों और आमजन व व्यापारियों ने मांग की है कि प्रतिबंधित चाइनीज व धातु मिश्रित धारदार मांझे की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए। सड़क पर निकलने वाले व्यापारी से लेकर आमजन कोई सुरक्षित नहीं है।
इसकी बिक्री और प्रयोग करने वाले दोनों को दोषी मानते हुए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पतंग उड़ाने वालों से अपील की है कि सुरक्षित और साधारण सूती धागे का ही उपयोग करें तथा सड़क के आसपास पतंग उड़ाने से बचें, जिससे किसी की जान जोखिम में न पड़े। नियमित निगरानी करने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मीडिया में छपी खबरों के बाद दुकानदारों ने माल हटाया :
चाइनीज मांझे से हो रहे हादसों के कारण पुलिस-प्रशासन सक्रिय हो गया। मीडिया में भी खबरें छपीं। प्रशासन की सक्रियता और पुलिस की छापेमारी से पूर्व ही दुकानदारों ने उसे ठिकाने लगा दिया गया। पुलिस को किसी भी दुकान से चाइनीज मांझे की बरामदगी नहीं हुई।
साइबर सेल लगाई गई:
चाइनीज मांझे से हुए हादसों और इसके प्रतिबंध के चलते लोगों ने इसकी खरीदारी और बिक्री ऑनलाइन शुरू कर दी है। इसको देखते हुए अब पुलिस भी अलर्ट हो गई है। पुलिस उपायुक्त पश्चिमी विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर क्राइम सेल और सर्विलांस को भी तफ्तीश में लगाया गया है। वह सोशल साइट्स के माध्यम से इसकी बिक्री पर नजर रखे हैं। किसी के द्वारा बिक्री और खरीदारी की पुष्टि होते ही गिरफ्तारी की जाएगी।
मांझे ने दिया जीवन भर का दंश
चाइनीज मांझा मुझे और मेरे परिवार को जीवन भर का दंश दे गया। यह कहना है दुबग्गा निवासी फौजिया का। मांझे से गला कटने के कारण फौजिया के पति शोएब की चार फरवरी को मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि मांझे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए जिससे किसी और के परिवार का सहारा न छिने।
मैं दस दिन तक बिस्तर पर रहा, जल्द प्रतिबंध लगे
शहीदपथ के पास मांझे से गला कटने से घायल रिटायर फौजी ब्रजेश राय ने लोगों से सूती धागा बांधकर पतंग उड़ाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 10 दिन से अधिक समय हो गया, वह बिस्तर पर हैं। अब भी उनकी हालत ठीक नहीं है। खतरनाक मांझा बांधकर पतंग उड़ाने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
चेहरे पर काल बनकर लिपटा पतंग का धागा
फैजुल्लागंज के संतोष त्रिपाठी ने बताया कि पिछले साल मार्च की वह दोपहर कभी नहीं भूल सकता। वह बाइक से आईटी चौराहा से निशातगंज की तरफ जा रहे थे। तभी चाइनीज मांझा सीधे उनके चेहरे के पास आ गया। मांझे ने उनकी नाक को बुरी तरह काट दिया। हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है।
हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत करता हूं
व्यापारी नेता आसिम मार्शल ने बताया कि पिछले साल तीन सितंबर को हैदरगंज चौराहे से पुल चढ़कर चौक की ओर जाते समय मांझा कनपटी में फंस गया, जिससे मैं गंभीर रूप से घायल हो गया। वह दिन याद कर आज भी सिहर उठता हूं। हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत करता हूं।
नाक पर लगे टांकों ने दे दिया जिंदगी भर का ‘जख्म’
व्यापारी विमलेश तिवारी ने बताया कि गत आठ फरवरी की शाम यहियागंज कार्यालय से बाइक लेकर बालागंज स्थित अपने घर की ओर निकला था। कुड़ियाघाट ग्रीन कॉरिडोर के पास मांझा मेरी नाक पर आ गिरा और झटके से फंसकर खिंच गया। मैं लहूलुहान हो गया। उम्मीद है कि हाईकोर्ट के निर्णय का सख्ती से पालन होगा।




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