बांके बिहारी की जगमोहन से दर्शन पर विवाद, भारी विरोध के बाद कमेटी ने गर्भगृह पर जड़ा ताला
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी का जगमोहन से दर्शन कराने पर विवाद खड़ा हो गया है। सेवायतों ने नई परंपरा का विरोध शुरू कर दिया है। कमेटी अध्यक्ष की भी न सुनी गई और गर्भ गृह पर ताला लगा दिया गया।

बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन को लेकर बुधवार को दिन भर हंगामा चला। सेवायतों ने जगमोहन से ठाकुरजी के दर्शन का विरोध किया। स्थिति संभालने के लिए कमेटी ने गर्भ गृह पर ताला लगा दिया। शाम को दर्शन से पहले ताला खोलकर गर्भ गृह से दर्शन कराए गए।सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित बांके बिहारी मंदिर की हाई पावर कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में ठाकुर जी के दर्शन जगमोहन से कराने का निर्णय लिया गया था। बुधवार सुबह इसके तहत मंदिर सेवायत व कमेटी सदस्य श्रीवर्धन गोस्वामी ने आराध्य के श्रीविग्रह को जगमोहन में विराजित कर भक्तों को दर्शन सुलभ कराए।
जगमोहन से दर्शन का सुबह तो विरोध नहीं हुआ, लेकिन मंदिर के पट बंद होते ही गोस्वामी समाज ने जगमोहन से दर्शन को नई परंपरा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। गोस्वामी समाज के लोग मंदिर कार्यालय में इकट्ठा होने लगे। ये देख कमेटी अध्यक्ष अशोक कुमार, मुकेश मिश्रा व अन्य सदस्य मंदिर पहुंचे। जहां गोस्वामी करीब डेढ़ घंटे की वार्ता के दौरान अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर कमेटी ने एहतियात बरतते हुए गर्भगृह के गेट पर ताला लगा दिया। शाम को 4:30 बजे से शयनभोग सेवा में दर्शन कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले सुनील गोस्वामी ने कहा कि वह गर्भ गृह में ही पूजा सेवा करते रहेंगे। इसके बाद कमेटी अध्यक्ष और सदस्य चले गए।
इसके बाद गोस्वामीजनों ने विरोध तेज करते हुए गर्भ गृह के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ श्रद्धालुओं ने खुद को जंजीरों से जकड़कर प्रदर्शन किया। उन्होंने जगमोहन में रखे उस तख्त को हटा दिया, जिस पर सुबह ठाकुरजी का विग्रह विराजमान कर दर्शन कराए गए थे। गोस्वामियों का कहना था कि ठाकुर बांके बिहारी को विराजमान कराने के लिए मंदिर में सोने चांदी के सिंहासन है, इसके बावजूद ठाकुरजी को उस तख्त पर विराजमान कराया गया, जिस तख्त के चारों पाए नीचे से गलकर खराब थे।
शाम को गर्भगृह में दिए दर्शन
अंत में शाम को निर्धारित दर्शन समय से 15 मिनट पहले मंदिर के कर्मचारियों ने गर्भ गृह पर लगाए ताले और लोहे की जंजीरों को हटाया। तब 4:30 बजे मंदिर के पट खोलने पर भक्तों को गर्भ गृह से ही आराध्य बांकेबिहारी के दर्शन सुलभ हो सके।
कमेटी अध्यक्ष ने गोस्वामियों से की थी अपील
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ठाकुर बांके बिहारी मंदिर हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में ठाकुरजी को जगमोहन में विराजित कर दर्शन कराने का प्रस्ताव रखा गया। कमेटी अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा था मंदिर के सेवायत गोस्वामी समुदाय से अपील की जाती है कि कमेटी द्वारा पूर्व में निर्धारित नई समय सारिणी का पालन करते हुए ठाकुरजी के श्री विग्रह को जगमोहन में विराजमान कर दर्शन कराने की व्यवस्था करें, ताकि भक्तों को अधिक से अधिक दर्शनों का लाभ मिल सके।
अब तक इन दिनों जगमोहन में विराजते हैं बिहारीजी
उल्लेखनीय है कि ठाकुरजी के श्री विग्रह को अभी तक चुनिंदा दिनों में ही जगमोहन में विराजित किया जाता रहा है। रंग भरनी एकादशी से पूर्णिमा तक लगातार 5 दिन, इसके बाद 4 महीने फूल बंगला महोत्सव में, हरियाली तीज और शरद पूर्णिमा के दिन ठाकुरजी जगमोहन में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
गोस्वामी समाज में आक्रोश
मंदिर सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि मंदिर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब गर्भ गृह पर किसी ने ताला लगा दिया। सेवायत रजत गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मंदिर की हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी मनमानी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना कर रही है। परंपराएं तोड़ी जा रही हैं। अवध विहारी गोस्वामी ने कहा कि ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में बुधवार का दिन काला दिवस के रूप में जाना जाएगा।
प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि सभी हिन्दू मंदिरों में आराध्य प्रभु वास्तुगत आधार पर बने गर्भ गृह में ही विराजते हैं। तीज त्यौहार पर अन्यत्र विराजमान करने का भी एक निश्चित विधान होता है और बगैर गर्भगृहीय संरचना वाली जगह से ठाकुरजी के दर्शन होना मान्य परम्पराओं के विपरीत है। बिजेंद्र किशोर गोस्वामी, चुनचुन गोस्वामी, नवीन गोस्वामी , देव गोस्वामी, मयूर गोस्वामी, विशाल गोस्वामी आदि ने भी विरोध जताया।
क्या होता है जगमोहन
बांकेबिहारी के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा गर्भगृह में है। उसके बाहर का वो हिस्सा, जिसमें सेवायत आदि चढ़ावा लेते और चढ़ाते हैं, जगमोहन कहलाता है। साल में कई अवसरों पर ठाकुर बांकेबिहारी की प्रतिमा को वहां लाकर दर्शन कराए जाते हैं। इसे ठाकुर जी का चल विग्रह (मूवेबल आइडल) माना जाता है, इसलिए जगमोहन से दर्शन कराने पर विचार हुआ, जिससे सभी को आसानी से दर्शन सुलभ हो सकें।
स्थापत्य कला में जगमोहन
हिंदू मंदिर स्थापत्य कला में, विशेषकर उड़ीसा के मंदिरों में, जगमोहन को सभा कक्ष या मंडप कहा जाता है, जो गर्भगृह (मुख्य मंदिर) के सामने स्थित होता है। यह एक खुला या अर्ध-बंद आंगन/हॉल होता है।




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