डीजल बचत को लेकर काफिलों पर लगाम की कवायद शुरू
Hardoi News - हरदोई में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की अपील के बाद डीजल खपत कम करने के प्रयास तेज हो गए हैं। विधायक नितिन अग्रवाल और रजनी तिवारी ने समर्थकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से वाहन न चलाएं। जिलाधिकारी ने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है।

हरदोई, संवाददाता। देश में बढ़ते तनावपूर्ण हालात और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की अपील के बाद हरदोई में भी प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर डीजल खपत कम करने की कवायद तेज हो गई है। नेताओं के लंबे काफिलों से लेकर सरकारी बैठकों तक में अब कटौती और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है। हरदोई सदर विधायक एवं राज्यमंत्री आबकारी एवं मद्य निषेध नितिन अग्रवाल और रजनी तिवारी ने अपने समर्थकों से अपील की है कि स्थिति सामान्य होने तक अनावश्यक रूप से वाहन लेकर न चलें। उनके साथ काफिलों में शामिल होने से बचें। दोनों मंत्रियों ने अपने काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या भी कम कर दी है। इसी तरह भाजपा सांसद जय प्रकाश और अशोक रावत ने भी ईंधन बचत को लेकर समर्थकों से संयम बरतने की अपील की है। खुद के काफिले का आकार भी कम कर दिया है। इसी तरह स्थानीय स्तर पर अक्सर नेताओं के साथ कई समर्थकों की गाड़ियां चलती दिखाई देती हैं, जिससे डीजल और पेट्रोल की बड़ी खपत होती है। राजनीतिक कार्यक्रमों, स्वागत और दौरों में दर्जनों वाहन लगातार दौड़ते रहते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि समर्थक स्तर पर वाहन संख्या घटती है तो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ईंधन बचाया जा सकता है।
डीएम ने भी एकल वाहन प्रयोग कम करने पर दिया जोर
जिलाधिकारी अनुनय झा ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, एकल वाहन प्रयोग कम करने और कार पूलिंग अपनाने की अपील की है। उन्होंने निजी संस्थानों से जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने को कहा है। साथ ही सरकारी विभागों में वर्चुअल मीटिंग को बढ़ावा देने और अति आवश्यक होने पर ही फिजिकल बैठकें करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यवाहक मुख्य विकास अधिकारी अशोक कुमार मौर्य ने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मंडल और जिला स्तर की कई बैठकों को अब ऑनलाइन माध्यम से करने की तैयारी है, जिससे सरकारी वाहनों की आवाजाही कम होगी।
19 ब्लॉकों में 400 सरकारी वाहन
जनपद में पांच तहसील, 19 विकासखंड और आधा सैकड़ा से अधिक विभागों के पास करीब 400 सरकारी वाहन हैं। यदि स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के वाहनों को भी जोड़ लिया जाए तो संख्या कई गुना बढ़ जाती है। वीआईपी दौरों और मंत्रियों की यात्राओं के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल में दर्जनों वाहन लगातार चलते रहते हैं, जिससे हर माह बड़ी मात्रा में डीजल-पेट्रोल खर्च होता है। हालांकि जिले में सार्वजनिक क्षेत्र में अभी ईवी वाहनों की उपलब्धता बेहद सीमित है, लेकिन प्रशासन का मानना है कि भविष्य में बैटरी चालित वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देकर ईंधन संकट की स्थिति से काफी हद तक निपटा जा सकता है।
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