समंदर में घुसपैठियों और तस्करों की अब खैर नहीं, HAL कानपुर बनाएगा 8 हाईटेक डोर्नियर विमान
समंदर में घुसपैठियों को रोकने के लिए कानपुर एचएएल हाईटेक सुविधाओं से लेस डोर्नियर विमानों का निर्माण करेगा। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने आठ नए डोर्नियर विमान बनाने का करार किया है। यह करार रक्षा सचिव की मौजूदगी में हुआ है।

Kanpur News: हाईटेक सुविधाओं वाले डोर्नियर विमानों को विकसित करना और पुराने विमानों को नए फीचर्स बढ़ाकर लैस करने में कानपुर एचएएल (हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ने वैश्विक महारत हासिल की है। गुयाना को दो विमान निर्यात करने और भारतीय तटरक्षक बल को 19 विमानों की आपूर्ति के बाद रक्षा मंत्रालय ने एचचएल के साथ नया समझौता किया है। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की कानपुर स्थित टीएडी डिवीजन के साथ रक्षा मंत्रालय ने आठ नए डोर्नियर विमान बनाने का करार किया है।
यह करार रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में एचचएल कानपुर के जीएम और रक्षा मंत्रालय के जेएसएएम के बीच पिछले महीने हुआ। डेढ़ महीने पहले दो डोर्नियर डीओ-228 भारतीय तटरक्षक बल को दे भी दिए गए हैं। एचएएल 75 %स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल कर इन विमानों को बना रहा है। आधुनिक सेंसर, ग्लाल कॉकपिट और डबल टर्बो इंजन से लैस इन डोर्नियर विमानों को खरीदने की कई देशों ने भी इच्छा जताई है।
संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत जवाब देने में सक्षम
मिड लाइन एडवांस डोर्नियर विमानों की क्षमता को एचएएल ने और भी अधिक बढ़ा दिया है। भारतीय तटरक्षक बल का डोर्नियर बेड़ा अब अवैध मछली पकड़ने, तस्करी, समुद्री डकैती और संभावित घुसपैठ को नाकाम कर उन्हें खदेड़ने में सक्षम है।
इसके गश्ती रडार के इन्फ्रारेड सेंसर तटरक्षक बल को विशाल क्षेत्रों की निगरानी में सक्षम बनाते हैं। खराब मौसम में ऑपरेशन करने में सक्षम अधिक दूरी तय कर सकेंगे। संदिग्ध जहाजों को पहचान त्वरित प्रतिक्रिया देकर सैटेलाइट कम्युनिकेशन से खराब मौसम में भी संचार तंत्र विकसित करने में दक्ष हैं।
बादलों के पार तस्वीरें मिलेंगी, समुद्री सीमा होगी सुरक्षित
यह डोर्नियर विमान इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस सिस्टम से लैस हैं, जो खुफिया जानकारी देते हैं। इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिये पायलट को किसी भी खतरे को भांपने और मिसाइल को ट्रैक करने में आसानी होगी। पल्स, पल्स डॉपलर और रडारों के संकेत पता चलता है। सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) रिमोट सेंसिंग तकनीक से माइक्रावेव सिग्नलों से विमान को विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर मिलती हैं। एसएआर से जमीन पर भेजी गई माइक्रावेव सिग्नल टकराकर वापस आते हैं।
गोलियां बरसाने वाला डोर्नियर भी तैयार करा रहा कानपुर
एचएएल के कानपुर डिवीजन टीएडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक यहां बने डोर्नियर एंयरक्राफ्ट को दुश्मनों और समुद्री सीमाओं के घुसपैठियों पर गोलियां बरसाने में सक्षम किया जा रहा है। डोर्नियर विमान में 12.7 एमएम क्षमता का गन सिस्टम लगाने के लिए एचएएल का डीपीएसयू कंपनी एडब्ल्यूईआईएल और डीआरडीओ के साथ एमओयू हुआ है। आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस यह एयरक्राफ्ट दुश्मनों और घुसपैठियों पर गोली बरसाकर खदेड़ सकेंगे।
डोर्नियर एयरक्राफ्ट : एक नजर में
1- 54.4 फीट लंबे डोर्नियर-228 को दो पायलट उड़ाते हैं
2- 19 लोगों को बैठाकर लगातार 10 घंटे उड़ान में दक्ष
3- 413 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है विमान
4- 792 मीटर रनवे से उड़ान, 451 मीटर रनवे पर उतरने में सक्षम
नए डोर्नियरों की खासियतें
1-अत्याधुनिक ग्लास कॉकपिट से सुसज्जित डोर्नियर में मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले, डिजिटल ऑटो पायलट और उन्नत नेविगेशन सिस्टम से वर्क लोड कम करते हैं।
2- इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर से लैस रडार और स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) कम समय में सटीकता से पहचान करने में सहायक है।
3- उपग्रह संचार (सैटकॉम) और सुरक्षित डेटा लिंक से नेवी के जहाजों, तटीय स्टेशनों और एजेंसियों में निर्बाध समन्वय और समुद्र में खराब मौसम में कॉल का जवाब देने में सक्षम।




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