control room will automatically receive an alert in case of an accident on the Kanpur Lucknow Expressway कानपुर–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर AI का पहरा, हादसा होते ही कंट्रोल रूम को खुद भेजेगा अलर्ट, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कानपुर–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर AI का पहरा, हादसा होते ही कंट्रोल रूम को खुद भेजेगा अलर्ट

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। दुर्घटना होने पर बिना किसी कॉल के एनएचएआई के कंट्रोलरूम को अलर्ट मिलेगा। इससे मौके पर ही एंबुलेंस और पेट्रोलिंग व्हीकल पहुंचेगा और घायलों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिलेगा।

Sat, 17 Jan 2026 11:56 AMPawan Kumar Sharma सुहैल खान, कानपुर
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कानपुर–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर AI का पहरा, हादसा होते ही कंट्रोल रूम को खुद भेजेगा अलर्ट

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना होने पर बिना किसी कॉल के एनएचएआई के कंट्रोलरूम को अलर्ट मिलेगा। इससे मौके पर ही एंबुलेंस और पेट्रोलिंग व्हीकल पहुंचेगा और घायलों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिलेगा और जनहानि रुकेगी। नेशनल एक्सप्रेसवे 6 (एनई-6) पर आधुनिक तकनीक के सॉफ्टवेयर डिजाइन सीसीटीवी कैमरे सड़क पर अनियमित गतिविधि को पहचान लेंगे। एनएचएआई ने एंट्री ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) को ऑटोमेटिक एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम (एएडीएस) की तरह डिजाइन किया है।

एक्सप्रेसवे की निगरानी 24 घंटे एआई और सेंसरयुक्त सीसीटीवी कैमरों से होगी। मशीन लर्निंग और एआई तकनीक से दक्ष सीसीटीवी यह पहचान पाने में सक्षम होंगे कि कार अचानक रुकी है या धीरे-धीरे कर जाम की वजह से रुकी। कार पलटी या फिर टक्कर हुई। जितनी बार कैमरे इस तरह की गतिविधियों को देखेंगे, मशीन लर्निंग के जरिये उनकी सटीकता उतनी अधिक बढ़ेगी। स्थिति पहचानते हुए कंट्रोलरूम को लोकेशन के साथ अलर्ट भेजा जाएगा, जहां पर हाईवे एंबुलेंस और पेट्रोलिंग व्हीकल तत्काल पहुंचेगी। घायलों को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर पहुंचाएगी और पेट्रोलिंग व्हीकल और रेस्क्यू टीम रास्ता साफ कराने और मेंटेनेंस का काम करेगी। गोल्डन ऑवर में घायलों को इलाज मिल सकेगा, जिससे जनहानि नहीं होगी। एनएचएआई ने उन्नाव और लखनऊ सीमा पर एटीएमएस कंट्रोलरूम बनाया है।

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यूपी का सबसे छोटा एक्सप्रेसवे

एनई-6 प्रदेश का सबसे छोटा एक्सप्रेसवे है। कानपुर और लखनऊ को जोड़ने के लिए इसे 63 किमी का बनाया गया है। इस एक्सप्रेसवे में कोई कट और चौराहा नहीं है। तीन इंटरचेंज और एक्सेस कंट्रोल्ड प्रवेश निकास गेट हैं। रोड एकदम समतल हो, इसके लिए जीपीस आधारित मशीन गाइडिंग और लेजर ग्रेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे वाहन के तेज चलाने के बाद भी उसकी गति महसूस नहीं होगी। 120 किमी प्रतिघंटा की औसत रफ्तार तय की गई है। दो से तीन घंटे में पूर होने वाला सफर 30 मिनट में पूरा हो जाएगा। एक्सप्रेसवे पर पूर्व नियोजित दो रेस्ट एरिया, दो फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज, चार मेजर ब्रिज और 25 माइनर ब्रिज हैं। एक लाख 47 हजार वर्ग मीटर की आरएस वॉल है।

इस मामले में एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल का कहना है कि सुविधाओं के साथ इस सिक्सलेन एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा का खास ध्यान रखा गया है। एडवांस्ड सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट कैमरों-सेंसरों से सुरक्षा बढ़ाई गई है। एटीएमएस से जाम की स्थिति और किसी भी तरह की दुर्घटना का अलर्ट एक्सप्रेस पर बने कंट्रोलरूम को मिलेगी। इससे बचाव और राहत कार्य तेजी से होगा।

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