ganga expressway industrial development in up 12 nodes 519 villages economic growth गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 519 गांवों की किस्मत चमकेगी? गोदाम, यूनिट, कारखाना से रोजगार की बरसात!, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 519 गांवों की किस्मत चमकेगी? गोदाम, यूनिट, कारखाना से रोजगार की बरसात!

गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश में औद्योगिक क्रांति की नई लहर शुरू हो गई है। एक्सप्रेसवे के किनारे 12 जिलों में 6,507 एकड़ भूमि पर औद्योगिक नोड्स (IMLC) विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे 519 गांवों की आर्थिक तस्वीर बदलेगी। गोदाम, यूनिट, कारखाना से रोजगार की बरसात होगी।

Thu, 30 April 2026 10:40 AMYogesh Yadav लखनऊ, विशेष संवाददाता
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गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 519 गांवों की किस्मत चमकेगी? गोदाम, यूनिट, कारखाना से रोजगार की बरसात!

UP News: गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत होने के साथ ही प्रदेश में बढ़ रहे औद्योगिक विकास की धारा और तेज होने की उम्मीद जागी है। यूपी के सबसे लंबे इस एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यह कदम आने वाले समय में इस क्षेत्र को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लाजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के रूप में स्थापित करेगा। यही वजह है कि उद्यमियों के साथ-साथ गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े 12 जिलों के 519 गांवों की किस्मत भी बदलने की आशा बलवती हुई है। गोदाम, यूनिट, कारखाना से रोजगार की बरसात होगी।

उद्यम यहां के युवाओं-महिलाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर जरूर दिलाएंगे। उप्र एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के सामने अब इस क्षेत्र में 987 निवेश प्रस्तावों के तहत लगभग ₹47 हजार करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को धरातल पर उतारने की चुनौती है।

12 जिलों के 12 नोड्स

आईएमएलसी योजना के तहत गंगा एक्सप्रेसवे कारिडोर से जुड़े सभी 12 जिलों में 12 नोड्स बनाए गए हैं। हर नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक संभावनाओं के आधार पर डिजाइन किया गया है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लाजिस्टिक्स सेक्टर को एक-साथ बढ़ाया जा सके। मेरठ से प्रयागराज तक हर नोड का लोकेशन और एरिया तय कर लिया गया है। अब तक 987 इंटेंट्स आफ इन्वेस्टमेंट (ईओआई) मिले हैं, जिनके जरिए ₹46,660 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

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इनमें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लाजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कामर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े प्रस्ताव अधिक हैं। अनुमान है कि इससे हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जागी है। इन जिलों के पारंपरिक उद्यमों को भी गंगा एक्सप्रेसवे से नई रफ्तार मिलेगी।

गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित नोड्स का विवरण

मेरठ : 529 एकड़

हापुड़ : 304 एकड़

बुलंदशहर : 2,798 एकड़ (सबसे बड़ा क्लस्टर)

अमरोहा : 348 एकड़

संभल : 591 एकड़

बदायूं : 269 एकड़

शाहजहांपुर : 252 एकड़

हरदोई : 335 एकड़

उन्नाव : 333 एकड़

रायबरेली : 232 एकड़

प्रतापगढ़ : 263 एकड़

प्रयागराज : 251 एकड़

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किस जिले में क्या संभावनाएं

मेरठ - मेरठ का बिजौली गांव दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। यह कनेक्टिविटी मेरठ को डाटा सेंटर, वेयरहाउसिंग और स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री के बड़े हब के रूप में विकसित करेगी। दिल्ली के करीब होने से यहां लाजिस्टिक्स और ई-कामर्स सेक्टर के बढ़ने की संभावना है।

हापुड़ - हापुड़ में एक्सप्रेसवे गढ़मुक्तेश्वर (ब्रजघाट) को सीधे जोड़ता है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। यहां विशेष इंटरचेंज विकसित किए गए हैं, जिससे पर्यटकों की आवाजाही आसान हो। यह क्षेत्र आलू और अन्य फसलों के लिए प्रसिद्ध है, जिसके चलते कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स बढ़ेंगी।

बुलंदशहर- बुलंदशहर जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास है। यह जिला एक प्रमुख सप्लाई चेन और लाजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित होगा। यहां बड़े इंडस्ट्रियल क्लस्टर और डेयरी आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है।

अमरोहा- पारंपरिक ढोलक और लकड़ी के हस्तशिल्प के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले अमरोहा के कारोबार को नई गति मिलेगी। बेहतर और तेज कनेक्टिविटी से उत्पाद सीधे बड़े शहरों और अंतर्राष्ट्रीय निर्यात चैनलों तक पहुंच सकेंगे। एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स से अमरोहा के आम और गन्ने का कारोबार बढ़ेगा।

संभल- संभल के हार्न और बोन क्राफ्ट को आधुनिक लाजिस्टिक्स और बेहतर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का सहयोग मिलेगा। उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे और कारीगरों को बेहतर दाम। स्थायी रोजगार और वैश्विक पहचान मिलने का रास्ता भी खुलेगा।

बदायूं- गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रही विशाल इंडस्ट्रियल टाउनशिप इस जिले की तस्वीर बदलेगी। बेहतर और तेज कनेक्टिविटी ने यहां उद्योगों के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी निजी निवेश को तेजी दी है।

शाहजहांपुर- शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी का निर्माण इस जिले को रणनीतिक दृष्टि से नई पहचान दी है। यहां स्थापित किए जा रहे कौशल विकास केंद्र स्थानीय युवाओं को रोजगारों से जुड़े प्रशिक्षण देकर उन्हें औद्योगिक अवसरों से जोड़ रहे हैं।

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हरदोई- हरदोई से गुजरता गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे लंबा हिस्सा इसे मेगा कारिडोर का रणनीतिक केंद्र बनाता है। यहां प्रस्तावित नालेज पार्क और टेक्सटाइल पार्क जिले को औद्योगिक पहचान देने की दिशा में बड़े कदम हैं। बेहतर और तेज कनेक्टिविटी का लाभ किसानों को भी मिलेगा।

उन्नाव- उन्नाव अब लखनऊ और कानपुर के साथ मिलकर एक सशक्त “ट्राई-सिटी इकोनामिक मॉडल के रूप में उभर रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे की बेहतर कनेक्टिविटी से खासतौर पर उन्नाव व कानपुर के लेदर उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

रायबरेली- लालगंज रेलवे कोच फैक्टरी के आसपास एंसिलरी इंडस्ट्रीज का तेजी से विस्तार हो रहा है। इससे मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम के आकार लेने की पूरी संभावना है। यह जिला प्रमुख हाईवे और औद्योगिक कारिडोर से सीधे जुड़ कर निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है।

प्रतापगढ़- यहां का प्रसिद्ध आंवला अब गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी के साथ वैश्विक बाजारों तक तेजी से पहुंचेगा। फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को मिल रहे प्रोत्साहन से यहां एग्रो-वैल्यू चेन मजबूत होगी। उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और निर्यात क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। एक्सप्रेसवे इंटरचेंज के आसपास रियल एस्टेट और वाणिज्यिक गतिविधियों भी बढ़ी हैं।

प्रयागराज- जुदापुर डांडू गांव पर गंगा एक्सप्रेसवे का समापन संगम नगरी को कनेक्टिविटी के नए शिखर पर पहुंचा रहा है। कुंभ और माघ मेले जैसे वैश्विक आयोजनों के दौरान अब श्रद्धालुओं को जाम और लंबी यात्रा से राहत मिलेगी। हाई कोर्ट और विश्वविद्यालयों से जुड़े लोगों के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आवागमन बेहद सहज हो जाएगा। प्रस्तावित विशाल कमर्शियल हब प्रयागराज को आस्था के साथ-साथ व्यापार और सेवाक्षेत्र का भी मजबूत केंद्र बनाएगा।

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