आस्था और अभयारण्य को जोड़ेगा गंगा एक्सप्रेसवे, यूपी के पर्यटन को भी मिलेगी नई रफ्तार
यूपी में 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे मेरठ के हस्तिनापुर (महाभारत व जैन सर्किट) से लेकर प्रयागराज के ब्लैकबक कंजर्वेशन रिजर्व तक, धार्मिक और ईको-टूरिज्म स्थलों को सीधा जोड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बना यह छह लेन एक्सप्रेस-वे से यूपी के पर्यटन को भी नई उड़ान देगा। यह आस्था के केंद्रों के साथ अभयारण्यों को भी जोड़ेगा। महाभारत और जैन सर्किट के साथ ही संभल में भी पर्यटन विकास को बढ़ावा मिलेगा। 12 जिलों से होकर गुजरते हुए यह प्रदेश में कनेक्टिविटी के साथ-साथ पर्यटन को भी नई रफ्तार देगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे प्रदेश के 10 जिलों को तेज पर्यटन कनेक्टिविटी देगा। यह हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज में समाप्त होगा। यह मार्ग इन जिलों के पर्यटन स्थलों की यात्रा के इच्छुक पर्यटकों और अंतरराज्यीय यात्रियों को तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह मार्ग हरदोई के बाणेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र (शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी अभयारण्य), रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम सिद्धपीठ और प्रयागराज के ब्लैकबक कंजर्वेशन रिजर्व को जोड़ते हुए पर्यटन की नई संभावनाएं खोलता है।
पौराणिक स्थलों और इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
मेरठ जनपद का हस्तिनापुर, महाभारत काल की ऐतिहासिक विरासत और जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। यह प्राचीन स्थल गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों से पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। पांडेश्वर महादेव मंदिर, कर्ण मंदिर, उल्टा खेड़ा और हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।
संभल से शाहजहांपुर तक धार्मिक पर्यटन को गति
मेरठ, हापुड़ और लखनऊ जैसे प्रमुख स्थलों से बेहतर संपर्क के चलते संभल एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरेगा। वहीं, हापुड़ के ब्रजघाट-गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्री रामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे स्थलों तक पहुंच भी अब अधिक सुगम हो जाएगी। बागपत के लाक्षागृह से जुड़े पर्यटन को भी इस कॉरिडोर से प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार गंगा मां के समानांतर गंगा एक्सप्रेस-वे के रूप में विकास की एक नई गाथा लिखी गई है। जिस प्रदेश को कभी 'बीमारू' कहकर उपेक्षित किया जाता था, वही आज तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और सशक्त विकास का आधार बनकर देश के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र को विस्तार देने में सहायक सिद्ध होगा।




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