अब गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन की तैयारी, यूपीडा के सीईओ ने मेरठ से उन्नाव तक 421 किमी दौड़ाई गाड़ी
यूपीडा के सीईओ दीपक कुमार ने मेरठ से उन्नाव तक 421 किमी गंगा एक्सप्रेसवे के हिस्से का निरीक्षण और ट्रायल किया। जेवर एयरपोर्ट के बाद अब इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अगले महीने संभावित है। 594 किमी लंबा यह मार्ग मेरठ को प्रयागराज से जोड़ेगा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश को जल्द ही एक और तोहफा देने जा रही है। जेवर एयरपोर्ट के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन की तैयारी तेज हो गई है। इसे एक्सप्रेसवे राज्य (Expressway State) बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। रविवार को यूपीडा (UPEIDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने मेरठ से उन्नाव तक गंगा एक्सप्रेसवे का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे में से लगभग 421 किलोमीटर के हिस्से पर 'फर्राटेदार' ट्रायल किया गया और निर्माण की गुणवत्ता जांची गई। निरीक्षण के बाद सीईओ ने संकेत दिए कि अगले महीने इस एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन किया जा सकता है।
मेरठ से उन्नाव तक 'क्वालिटी चेक'
निरीक्षण की शुरुआत मेरठ के बिजौली से हुई। सीईओ दीपक कुमार ने खरखौदा के खड़खड़ी स्थित मुख्य टोल प्लाजा और वहां नवनिर्मित अत्याधुनिक कंट्रोल रूम का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षा मानकों और तकनीकी व्यवस्थाओं में कोई कमी न रहे। सड़क की फिनिशिंग देखने के बाद सीईओ का काफिला हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई और उन्नाव होते हुए लखनऊ की ओर रवाना हुआ। इस दौरान एक्सप्रेसवे के किनारे पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण भी किया गया।
प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान यूपीडा सीईओ के साथ मेरठ के डीएम डॉ. वीके सिंह, हापुड़ के डीएम अभिषेक पांडेय, यूपीडा के मुख्य अभियंता आरके चौधरी और नोडल अधिकारी मोहित पाठक सहित पुलिस व राजस्व विभाग की पूरी टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने बताया कि मुख्य कैरिज-वे का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब केवल फिनिशिंग व साइन बोर्ड लगाने जैसे अंतिम कार्य शेष हैं।
श्रद्धालुओं और वकीलों को मिलेगा 'सुपरफास्ट' सफर
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और प्रयागराज (संगम नगरी) के बीच की दूरी सिमट जाएगी। इससे सबसे बड़ा लाभ उन हजारों श्रद्धालुओं को होगा जो कुंभ और संगम स्नान के लिए प्रयागराज जाते हैं। साथ ही, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से हाईकोर्ट के कार्यों के लिए प्रयागराज आने-जाने वाले वकीलों और वादकारियों का समय भी बचेगा। जो सफर पहले 10 से 12 घंटे में पूरा होता था, वह अब मात्र 6 से 7 घंटे में सिमट जाएगा।
यह एक्सप्रेसवे न केवल औद्योगिक विकास के द्वार खोलेगा, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक सेतु का काम भी करेगा। अगले महीने होने वाले संभावित उद्घाटन के लिए अब युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।




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