पूर्वांचल की धरती पर उतरे लड़ाकू विमान; मिराज, राफेल और जगुआर समेत कई फाइटर प्लेनों का टच डाउन
सुलतानपुर में पहलगाम हमले की बरसी पर IAF ने बुधवार को सुलतानपुर में बनी एयर स्ट्रिप पर एयर शो आयोजित किया। कूरेभार क्षेत्र के अरवल कीरी करवत स्थित एयर स्ट्रिप पर प्रस्तावित इस युद्धाभ्यास के मौके पर मुख्य अतिथि ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में वायुसेना ने अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाया।

Sultanpur News: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना के जांबाजों ने बुधवार को युद्धाभ्यास किया। जगुआर, सुखोई, राफेल की गड़गड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा। सुलतानपुर में हुए वायुसेना के शक्ति प्रदर्शन को लेकर लोगों में कौतुहल का विषय बना रहा। वायुसेना के एयर शो को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को भी तैनात किया गया था।
पहलगाम हमले की बरसी पर IAF ने बुधवार को सुलतानपुर में बनी एयर स्ट्रिप पर एयर शो आयोजित किया। कूरेभार क्षेत्र के अरवल कीरी करवत स्थित एयर स्ट्रिप पर प्रस्तावित इस युद्धाभ्यास के मौके पर मुख्य अतिथि ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में वायुसेना ने अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाया। एक से एक लड़ाकू विमानों ने जब एयर स्ट्रिप पर टच डाउन किया तो पूरा इलाका ही गूंज उठा। जगुआर, सुखोई, राफेल, सी- 295 जैसे विमानों को देखकर लोक रोमांचित हो उठे। खास बात यह है कि वायुसेना दिन और रात दोनों समय में युद्धाभ्यास करेगी। जिससे ऑपरेशन की क्षमता और भी परखी जाएगी।
एयरशो से पहले पहुंचे थे आठ फाइटर जेट
सुल्तानपुर में बनी एयर स्ट्रिप पर दिन में डेढ़ बजे से शाम 5 बजे तक और शाम में 6 बजे से रात 9 बजे तक दोनों समय युद्धाभ्यास और विशेष अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसमें सुखोई, मिराज, तेजस और जगुआर जैसे विमानों ने उड़ान भर कर करतब दिखाया। बतादें कि वायुसेना के एयरशो को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां की जा रही थीं। रिहर्सल के दौरान विमानों ने एयर स्ट्रिप पर कई बार उतरने और उड़ान भरने का अभ्यास किया गया था। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती भी की गई। स्थानीय लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग विमानों की गूंज और उनकी तेज रफ्तार को देखने के लिए दूर-दूर से पहुंचे थे।
एक्सप्रेस वे से वाहनों के आवागमन का मार्ग परिवर्तित
सुरक्षा को देखते हुए एक मई तक पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से वाहनों के आवागमन का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया है। वायुसेना का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद से फिर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर वाहनों का आवागमन बहाल हो सकेगा। जून 2023 में यह अभ्यास 4 घंटे तक चला था। यहां वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई और मिराज ने 3.2 किमी की एयर स्ट्रिप पर टच एंड गो का अभ्यास किया था। इस अभ्यास के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का 12 किलोमीटर का एरिया सील किया गया था।
2021 में हरक्युलिस विमान से उतरे थे प्रधानमंत्री मोदी
16 नवंबर 2021 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था तब एयरफ़ोर्स ने एयर स्ट्रिप पर टच एंड गो का अभ्यास किया था। उस दौरान मिग, सुखोई, जगुआर और मिराज जैसे लड़ाकू विमानों ने आसमान में करतब दिखाए थे। इसके साथ ही पीएम मोदी को लेकर आया एयरफ़ोर्स का हरक्युलिस विमान भी एक्सप्रेस-वे पर उतरा था।अ
एमआई-17 वी-5
एमआई-17 वी-5 यह केवल माल ढोने वाला नहीं है, यह स्पेशल फोर्स (जैसे गरुड़ कमांडो) के लिए आकाश का गेट है। जब सामान्य हेलीकॉप्टर जमीन पर नहीं उतर सकता (जंगल, पहाड़), तब स्लिदरिंग के जरिए कमांडो को उतरता है। यह सेना को तुरंत वॉर-ज़ोन में उतारकर सुरक्षित वापस निकालने का बड़ा माध्यम है।
सू-30 एमकेआई
इसका काम है एयर स्पेस कंट्रोल। यह एक हवाई कमांड सेंटर की तरह काम करता है। यह पीछे से आने वाले अपने छोटे विमानों को निर्देश देता है और दुश्मन के रडार को पूरी तरह जाम करने की क्षमता रखता है। सीमा पर दुश्मन ने आंख दिखाई, तो सबसे पहले इसी का पेलोड जवाब देता है।
सी- 295
यह पहले की तुलना में स्मार्ट ट्रांसपोर्ट है। यह उन छोटे रनवे पर उतर सकता है जहां बड़े विमान नहीं उतर सकते हैं। यह सेना को युद्ध के सबसे करीब तक पहुंचाता है। भारतीय वायुसेना में माल ढोने के लिए यह सबसे भरोसेमंद वाहक माना जाता है। इसे गेम चेंजर भी कहा जाता है।
मिराज 2000
यह बहुत पुराना है लेकिन इसका एवियोनिक्स व निशाना लगाने की सटीकता आज भी दुनिया में टॉप क्लास है। जब लक्ष्य छोटा हो व नुकसान शून्य रखना हो (जैसे बालाकोट) तब वायुसेना मिराज को ही चुनती है क्योंकि यह बम गिराकर वापस भी सुरक्षित आ जाता है।
एएन-32
यह पहाड़ों का असली मालिक है। जब लद्दाख या अरुणाचल में मौसम खराब होता है और बाकी विमान नहीं उड़ पाते, तब एएन-32 का इंजन रोर (गरज) ही सुनाई देती है। इसे सेना का खाना, गोला-बारूद और जवान पहुंचाने के लिए बनाया गया है।




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