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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आज एयरफोर्स के फाइटर जेट उतरेंगे, लखनऊ आने-जाने वाले क्या करें?

सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की एयर स्ट्रिप पर बुधवार दोपहर 1:30 बजे से भारतीय वायुसेना का बड़ा युद्धाभ्यास शुरू होगा। एक्सप्रेस-वे पर 1 मई तक रूट डायवर्जन लागू किया गया है। लखनऊ आने-जाने वाले यात्रियों को मुख्य मार्ग के बजाय समानांतर बनी सर्विस रोड का इस्तेमाल करना होगा।

Wed, 22 April 2026 11:19 AMYogesh Yadav सुलतानपुर/ कूरेभार, संवाददाता
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पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आज एयरफोर्स के फाइटर जेट उतरेंगे, लखनऊ आने-जाने वाले क्या करें?

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना के जांबाज बुधवार को युद्धाभ्यास करेंगे। दोपहर डेढ़ बजे के बाद एयर शो शुरू होगा। इसे लेकर मंगलवार को ही देश की सेना के जांबाज व फाइटर प्लेन सुलतानपुर आ गए। जगुआर, सुखोई, एमआई 17वी-5 व तेजस की गड़गड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा है। इसे लेकर लोगों में कौतूहल था। पूर्वांचल एक्सप्रेस के उद्घाटन में स्वयं पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में वर्ष 2021 में ऐसा नजारा देखने को मिला था। इसके बाद यहां पर वर्ष 2023 में चार घंटे का एयर शो भी हो चुका है। एयरशो को देखते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर रूट डायवर्जन किया गया है। यह डायवर्जन एक मई तक जारी रहेगा। लखनऊ आने और जाने वालों को सर्विस रोड का इस्तेमाल करना होगा।

कूरेभार क्षेत्र के अरवल कीरी करवत स्थित एयर स्ट्रिप पर प्रस्तावित इस युद्धाभ्यास को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। खास बात यह है कि इस बार अभ्यास दिन और रात दोनों समय किया जाएगा, जिससे ऑपरेशन की क्षमता और भी परखी जाएगी।

एक्सप्रेस वे से वाहनों के आवागमन का मार्ग परिवर्तित

सुरक्षा को देखते हुए एक मई तक पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से वाहनों के आवागमन का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया है। वायुसेना का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद से फिर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर वाहनों का आवागमन बहाल हो सकेगा। एक्सप्रेसवे पर विमानों के लिए एयर स्ट्रिप बनाने के दौरान ही इस तरह की व्यवस्था की गई थी कि कभी विमान यहां उतरे तो आम लोगों को ज्यादा परेशान न होना पड़े। जितनी दूरी तक एयर स्ट्रिप बनाई गई है, उतनी ही दूरी तक समानांतर में सर्विस रोड भी बनाई गई है। यह सर्विस रोड सामान्यतः बंद रहती है। युद्धाभ्यास को देखते हुए इसे खोल दिया गया है। अब लखनऊ आने जाने वालों को इसी से गुजारा जा रहा है।

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अभी आठ फाइटर जेट पहुंचे

बुधवार को इस एयर स्ट्रिप पर दिन में डेढ़ बजे से शाम 5 बजे तक और शाम में 6 बजे से रात 9 बजे तक दोनों समय युद्धाभ्यास और विशेष अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न प्रकार के आधुनिक लड़ाकू विमान टेकऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन करेंगे। इसमें सुखोई, मिराज, तेजस और जगुआर जैसे विमान उड़ान भर कर करतब दिखाएंगे। यहां पिछले कई दिनों से युद्धाभ्यास को लेकर तैयारियां की जा रही थीं।

रिहर्सल के दौरान विमानों ने एयर स्ट्रिप पर कई बार उतरने और उड़ान भरने का अभ्यास किया। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती भी की गई। स्थानीय लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग विमानों की गूंज और उनकी तेज रफ्तार को देखने के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।

2021 में हरक्युलिस विमान से उतरे से प्रधानमंत्री मोदी

सुलतानपुर। 16 नवंबर 2021 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था तब एयरफ़ोर्स ने एयर स्ट्रिप पर टच एंड गो का अभ्यास किया था। उस दौरान मिग, सुखोई, जगुआर और मिराज जैसे लड़ाकू विमानों ने आसमान में करतब दिखाए थे। इसके साथ ही पीएम मोदी को लेकर आया एयरफ़ोर्स का हरक्युलिस विमान भी एक्सप्रेस-वे पर उतरा था।

सू-30 एमकेआई

इसका काम है एयर स्पेस कंट्रोल। यह एक हवाई कमांड सेंटर की तरह काम करता है। यह पीछे से आने वाले अपने छोटे विमानों को निर्देश देता है और दुश्मन के रडार को पूरी तरह जाम करने की क्षमता रखता है। सीमा पर दुश्मन ने आंख दिखाई, तो सबसे पहले इसी का पेलोड जवाब देता है।

सी- 295

यह पहले की तुलना में स्मार्ट ट्रांसपोर्ट है। यह उन छोटे रनवे पर उतर सकता है जहां बड़े विमान नहीं उतर सकते हैं। यह सेना को युद्ध के सबसे करीब तक पहुंचाता है। भारतीय वायुसेना में माल ढोने के लिए यह सबसे भरोसेमंद वाहक माना जाता है। इसे गेम चेंजर भी कहा जाता है।

मिराज 2000

यह बहुत पुराना है लेकिन इसका एवियोनिक्स व निशाना लगाने की सटीकता आज भी दुनिया में टॉप क्लास है। जब लक्ष्य छोटा हो व नुकसान शून्य रखना हो (जैसे बालाकोट) तब वायुसेना मिराज को ही चुनती है क्योंकि यह बम गिराकर वापस भी सुरक्षित आ जाता है।

एएन-32

यह पहाड़ों का असली मालिक है। जब लद्दाख या अरुणाचल में मौसम खराब होता है और बाकी विमान नहीं उड़ पाते, तब एएन-32 का इंजन रोर (गरज) ही सुनाई देती है। इसे सेना का खाना, गोला-बारूद और जवान पहुंचाने के लिए बनाया गया है।

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