बेटे की शादी के दिन उठी पिता की अर्थी; अंतिम संस्कार के बाद निकली बारात, सादगी से हुईं रस्में
पिता की मौत के बाद गमगीन माहौल में युवक की शादी हुई। न ही कोई बैंडबाजा बजा और न ही किसी ने डांस किया। सादगी से विवाह संपन्न हुआ। किसान भाई लाल के परिवार में चार बेटे है बड़ा बेटा प्रदीप, संदीप, रंजीत और रिंकू है। भाई लाल की पत्नी कमला की करीब चार साल पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी।

लखनऊ के निगोहां एक ऐसी शादी जिसमें दूल्हे की आंखें छलक रही थीं। कोई गीत-संगीत या नृत्य नहीं। सब जैसे खोये-खोये से रस्में निभा रहे थे। निगोहां में जो हुआ उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। एक किसान परिवार में जहां शहनाइयां गूंजनी थीं, वहां मातम पसर गया। जिस आंगन में पिता ने बेटे की शादी के सपने संजोए थे, उसी आंगन से पहले पिता का शव निकला और उसके कुछ ही घंटों बाद बेटे की बारात।
बेटे की शादी के दिन पिता की मौत
निगोहां गांव के किसान भाई लाल अपने छोटे बेटे रिंकू कश्यप की शादी को लेकर खासे उत्साहित थे। घर में मेहमानों की भीड़ लगी थी। हल्दी-मेहंदी की रस्में जोर-शोर से चल रही थीं। सोमवार को अचानक भाई लाल की तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में परिजनों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन मंगलवार को बारात निकलने की घड़ी आई, उससे पहले ही भाई लाल ने दम तोड़ दिया। इससे परिवार में कोहराम मच गया।
अंतिम संस्कार के बाद निकली बारात
रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने टूट चुके रिंकू और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया। बड़े बुजुर्गों के निर्णय के बाद तय हुआ कि अंतिम संस्कार के पश्चात सादगी से विवाह संपन्न कराया जाएगा। पिता की मौत के बाद गमगीन माहौल में युवक की शादी हुई। न ही कोई बैंडबाजा बजा और न ही किसी ने डांस किया। सादगी से विवाह संपन्न हुआ।
रायबरेली के बंकागढ़ जानी थी बारात
किसान भाई लाल के परिवार में चार बेटे है बड़ा बेटा प्रदीप, संदीप, रंजीत और रिंकू है। भाई लाल की पत्नी कमला की करीब चार साल पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी। परिवार के छोटे बेटे रिंकू की शादी मंगलवार को रायबरेली के बंकागढ़ गांव जानी थी। लेकिन बेटे की बरात से पहले ही भाई लाल की मौत हो गई। मौत से गांव में मातम छा गया।
बिना बैंड बाजे सादगी के साथनिभाई गईं रस्में
शाम 4 बजे गांव के श्मशान घाट पर भाई लाल का अंतिम संस्कार किया गया। रात 8 बजे भारी मन और नम आंखों के साथ रिंकू चंद बारातियों के साथ रायबरेली के बंका गढ़ के लिए रवाना हुए। लड़की पक्ष को जब इस अनहोनी की सूचना मिली, तो वहां भी सन्नाटा पसर गया। बिना शोर-शराबे और बैंड-बाजे के सादगी के साथ विवाह की रस्में पूरी की गईं। शादी के बाद रिंकू अपनी पत्नी रोहिनी को लेकर घर लौटा, लेकिन गांव में न बैंड बजे और न ही स्वागत की रौनक दिखी। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। इस घटना की चर्चा पूरे इलाके में रही है।




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