मथुरा में गायों की रक्षा के लिए फरसा लेकर निकल पड़ते थे बाबा, कई बार गौ तस्करों से हुआ था टकराव
मथुरा-दिल्ली हाइवे पर शनिवार को ट्रक के टक्कर से फरसा वाले बाबा की मौत हो गई। दरअसल उन्हें गौ तस्करी की सूचना मिली थी। हालांकि इससे पहले भी गौ तस्करों की खबर मिलती थी तो वह अपने साथ फरसा लेकर तुरंत निकल पड़ते थे। कई बार गौ तस्करों से मुठभेड़ भी हुई।

मथुरा-दिल्ली हाइवे पर कोटवन के पास शनिवार तड़के करीब 3.30 बजे गोरक्षक फरसा बाबा की हादसे में मौत पर हत्या की अफवाह फैल गई। गुस्साए गोरक्षकों और ग्रामीणों ने हाइवे जाम कर दिया। पुलिस पर पथराव कर दिया। उपद्रवियों की ओर से फायरिंग की गई। पुलिस और यात्रियों के वाहन तोड़ दिए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने लाठीचार्ज, रबड़ बुलेट और आंसू गैस के गोले दागे। करीब चार घंटे बवाल से हाइवे पर दोनों तरफ 10 किमी लंबा जाम लग गया। 20 पुलिसकर्मियों सहित करीब दो दर्जन लोग घायल हुए हैं।
फरसा वाले बाबा 65 वर्षीय एक रामानंदी संत थे। फरसा वाले बाबा का असली नाम चंद्रशेखर था। वह फरसा साथ रखते थे तो उनका नाम बरसाना सहित समूचे ब्रज के लोग उनको फरसा वाले बाबा के नाम से पुकारने लगे। वह मूल रूप से सिरसागंज तहसील फिरोजाबाद के रहने वाले थे। साल 1990 के दशक में चंद्रशेखर यहां अपने बड़े भाई के साथ आए थे। इनकी ईश्वर व गौ माता में आस्था थी। दोनों भाईयों के अचानक घर से चले जाने से इनके परिजन व माता पिता परेशान हो गए। वे खोजते हुए बरसाना के आजनौख गांव आए।
परिवारीजन इनके बड़े भाई को मनाकर वापस घर ले गए लेकिन चंद्रशेखर बाबा यहीं रह गए। बरसाना के गांव मडौई में संत नृत्यगोपाल दास से उनकी मुलाकात हुई। कुछ वर्ष गांव मडौई में ही रहे। इसके बाद संत नृत्यगोपाल दास ने इनके लिए बरसाना छाता रोड स्थित आजनौख गांव में एक गौशाला खुलवा दी। जहां बाबा 1994 से रहकर गायों की सेवा कर रहे थे। कई बार गहवरवन के संत पद्मश्री रमेश बाबा महाराज के साथ गौ रक्षा आंदोलन और बरसाना व राजस्थान के ब्रज क्षेत्र के पहाड़ों का कटान रोकने के लिए हुए आंदोलन में उन्होंने भाग लिया।
गौ तस्करों की खबर मिलने पर फरसा लेकर निकल पड़ते थे बाबा
कहीं भी गौ तस्करों की खबर मिलती थी तो वह अपने साथ फरसा व स्थानीय युवकों को साथ लेकर तुरंत निकल पड़ते थे। कई बार इनकी रात्रि में गौ तस्करों से मुठभेड़ भी हुई। वे गायों को छुड़ाकर सेवा करते थे। बाद में छाता, कोसीकलां और बरसाना की पुलिस कहीं भी गायों को पकड़ती थी तो इनकी गोशाला में गायों को भेज देती थी।
अफवाह के चलते लोगों में फैला आक्रोश
चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा की हाइवे के करीब आजनौख में गोशाला है। शुक्रवार देर रात उन्हें सूचना मिली कि हाइवे पर ट्रक में गायों की तस्करी हो रही है। बाबा, अपने एक भक्त के साथ बाइक लेकर हाइवे पर निकल गए। कोसी से आगे और कोटवन से पहले उन्होंने एक ट्रक को गो तस्करी के शक में रुकवाया। ट्रक चालक-परिचालक उतर गए। पुलिस ने बताया कि उस समय घना कोहरा था। बाबा ट्रक का पिछला हिस्सा देखने गए ही थे कि दूसरा ट्रक तेजी से बाबा को टक्कर मारते हुए आगे वाले ट्रक से जा भिड़ा। जबरदस्त हादसे में पिछले ट्रक का केबिन आगे वाले ट्रक में घुस गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई लेकिन तब तक चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा की मौत हो चुकी थी। घटना में पिछले ट्रक के चालक-परिचालक घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें अस्पताल भिजवाया। इधर फरसा बाबा की मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैल गयी।
कुछ ही देर में बाबा के भक्त और गोभक्त वहां पहुंच गए और बाबा का शव गाड़ी में रखकर छाता के निकट छाता-शेरगढ़ तिराहे पर लाकर सुबह 07:30 बजे हाइवे जाम कर दिया। सूचना पर पहुंचे पुलिस बल पर पथराव कर दिया। डंडों से पुलिस प्रशासन की करीब आधा दर्जन गाड़ियां तोड़ दीं। इस दौरान कई ट्रकों और यात्री बसों के भी शीशे तोड़े गए। बाद में डीआईजी शैलेश पांडे पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गये और लोगों को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान लोगों ने फिर से पथराव कर दिया। यह देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले चलाए और लाठीचार्ज कर दिया। इससे भगदड़ मच गई। इस बीच पथराव बढ़ने पर पुलिस ने रबड़ बुलेट भी दागीं। करीब 11:15 बजे समर्थक उनके शव रखी गाड़ी लेकर आजनौख गोशाला चले गये। इस हादसे में पीछे से टक्कर मारने में ट्रक चालक खुर्शीद अनवर निवासी अलवर, राजस्थान की भी इलाज के दौरान दोपहर में मौत हो गई।




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