यूपी पंचायत चुनाव में पलक झपकते ही पकड़ा जाएगा फर्जी वोटर, ऐसी हाईटेक होगी व्यवस्था
यूपी पंचायत चुनाव में फर्जी वोटर पलक झपकते ही हाईटेक सिस्टम से पकड़ा जाएगा। जी हां, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के प्रयोग से ऐसा संभव होगा।

UP Panchyat News: अब अगर कोई वोटर एक पोलिंग स्टेशन पर वोट डालने के बाद दूसरी जगह वोट डालने पहुंचेगा तो उसे पलक झपकते ही उसे तुरंत पकड़ लिया जाएगा। जी हां, फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के प्रयोग से ऐसा संभव होगा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले पायलेट प्रोजेक्ट के तहत नगर पंचायत अध्यक्ष की दो सीटों पर मंगलवार को हुए उपचुनाव में इस प्रणाली का प्रयोग पायलेट प्रोजेक्ट के तहत किया गया जो सफल साबित हुआ। अब इसे पंचायत चुनाव में लागू किया जाएगा। फर्जी वोटरों की पहचान उनकी पुतलियों व चेहरे से की जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि शाहजहांपुर के कटरा व कुशीनगर के फाजिलनगर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए उपचुनाव में दोनों सीटों पर कुल 50257 वोटरों पर इसका पायलेट प्रोजेक्ट के तहत प्रयोग किया और वह सफल हुआ। उन्होंने बताया कि देश में पहली बार इस तरह का प्रयोग किसी चुनाव में किया जा रहा है। पोलिंग स्टेशन पर पीठासीन अधिकारियों को उनके मोबाइल पर एफआरएस एप अपलोड कराया गया है। यह ऐसा सिस्टम है कि चुनाव में वोटिंग शुरू होने से खत्म होने तक मोबाइल पर सिर्फ यही एप कार्य करेगा, बाकी कोई कॉलिंग व मैसेज नहीं किए जा सकेंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तैयार किए गए डैशबोर्ड पर रियल टाइम मानीटरिंग की व्यवस्था है। सभी मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किया गया है और उनकी एसवीएन नंबर व फोटो सहित सूची ऑनलाइन तैयार की गई है। जैसे ही वोटर पोलिंग स्टेशन पर जाएगा, उसका फोटो आईडी कार्ड और मतदाता सूची से मिलान किया जाएगा। फिर एफआरएस के माध्यम से उसकी फोटो मोबाइल पर खींची जाएगी। फोटो खींचते ही वोटर का नाम मतदान करने वाले मतदाताओं की लिस्ट में फोटो सहित ऑनलाइन दर्ज हो जाएगा। अब अगर वह किसी दूसरे पोलिंग स्टेशन पर वोट डालने की कोशिश करेगा तो जैसे ही इस मोबाइल एप से उसकी फोटो खींची जाएगी, उसने पहले कहां किस पोलिंग स्टेशन पर कब वोट डाला इसकी डिटेल तत्काल पीठासीन अधिकारी को मिल जाएगी और वह वोटर मौके पर ही पकड़ लिया जाएगा। यह पायलेट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद अब आगे त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में इसका प्रयोग कर फर्जी वोटिंग रोकी जाएगी। फिर आगे नगर निकाय चुनावों में भी इसका प्रयोग करने की तैयारी की जा रही है।
ऐसे काम करेगा एफआरएस मोबाइल एप
हर पोलिंग बूथ पर मतदान कर्मियों के मोबाइल फोन पर एफआरएस एप अपलोड किया जाएगा। जिसमें हर पोलिंग बूथ की वोटर लिस्ट फीड होगी। मतदाता के एसवीएन नंबर के आखिर चार अंकों को इस एप पर भरते ही मतदाता की फोटो सहित डिटेल खुल जाएगी। फिर मौके पर फोटो और नाम का मिलान कर इस एफआरएस एप से फोटो खींची जाएगी। वोट डालते ही उसका डाटा लॉक हो जाएगा। जैसे ही वोटर दूसरे पोलिंग स्टेशन पर वोट डालने पहुंचेगा, मतदान कर्मी उसके एसवीएन नंबर को डालेगा और पहले डाले गए वोट की समय सहित पूरी डिटेल सामने आ जाएगी।
बैटरी बैकअप भी ऑनलाइन देख सकेंगे
मतदान केंद्रों पर एफआरएस एप मतदान कर्मियों के मोबाइल फोन पर अपलोड किया जाएगा। किस केंद्र पर प्रयोग हो रहे मोबाइल की बैटरी कितनी है, इसकी ऑनलाइन मानीटरिंग होगी। जैसे ही बैटरी कम होगी उसके बैकअप की व्यवस्था तत्काल की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय से इसकी निगरानी होगी। मतदान कर्मियों को 200 रुपये मोबाइल डाटा का अलग से चुनाव के दिन का खर्च दिया जाएगा।




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