पेट्रोल- डीजल के साथ आम आदमी पर महंगाई की बढ़ी मार दूध, फल, सब्जी के साथ रसोई का भी बिगड़ गया
Etawah-auraiya News - इटावा में पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि से आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है। अब पेट्रोल 97.27 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। महंगाई ने परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी में कठिनाई हो रही है।
इटावा, संवाददाता। पहले कॉमर्शियल सिलेंडरों के दाम अब पेट्रोल और डीजल समेत सीएनजी के दामों में बढ़ोत्तरी की जा चुकी है। डीजल- पेट्रोल जहां तीन-तीन रुपये प्रति लीटर तो सीएनजी भी दो रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है। नए रेट लागू होते ही आम आदमी की जेब पर इसका सीधा असर दिखने लगा है। इटावा में पेट्रोल की कीमत 97.27 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 90.57 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं दामों में इजाफा होने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा बढ़ा दिया जबकि रोडवेज का किराया भी जल्द बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि बीते कुछ समय से लगातार जरूरी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। दूध और सीएनजी के दाम बढ़े और अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की हर चीज महंगी होती जा रही है, लेकिन आमदनी उतनी ही है, ऐसे में परिवार का खर्च संभालना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर अमूल और मदर डेयरी द्वारा दूध की कीमतों में की गई बढ़ोतरी ने आम आदमी के बजट को हिलाकर रख दिया है। लेकिन, महंगाई का यह सिलसिला सिर्फ दूध तक सीमित नहीं रहने वाला है। दूध के दाम बढ़ने का सीधा असर अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भी पड़ना तय है, जिससे एक बार फिर महंगाई की मार आम जनता को झेलनी पड़ सकती है। दूध की महंगाई का डोमिनोज़ इफ़ेक्ट दही, पनीर, मक्खन और घी पर भी दिख रहा है। दूध के दाम बढ़ने के तुरंत बाद, दूध से बने उत्पाद जैसे दही, पनीर, छाछ, मक्खन और घी के दाम में भी 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है। इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट, चाय, कॉफी और दूध से बनने वाले व्यंजन महंगे होंगे। अनाज, सब्जी और मसाले के साथ बीते एक महीने में गेहूं और चावल की कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत की तेजी आई है। प्रमुख मंडियों में गेहूं की आवक कम होने से यह बढ़त जारी रह सकती है। बेमौसम बारिश और गर्मी के कारण टमाटर और प्याज की कीमतों में पिछले हफ्ते के मुकाबले वृद्धि दर्ज की गई है। वैश्विक संकेतों के कारण सरसों और सोयाबीन तेल के दाम में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है। दूध के दाम बढ़ने से परिवहन और पैकेजिंग की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका असर दूध से जुड़ी हर वस्तु पर पड़ेगा। अगले 15 दिनों में दाल और मसालों की कीमतों में भी तेजी आने की आशंका है, जो रसोई का बजट और बिगाड़ देगी। गृहणी श्रद्धा मिश्रा कहती है अब समझ ही नहीं आता कि महंगाई आखिर कहां जाकर रुकेगी। जब भी बाजार में सामान लेने जाते हैं किसी न किसी चीज के दाम बढ़े हुए मिलते हैं, आज दूध महंगा हुआ है तो कल किसी और जरूरी चीज के दाम बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बढ़ोतरी भी महीने का पूरा बजट बिगाड़ देती है। कभी ब्रेड महंगी हो जाती है, कभी सिलेंडर के दाम बढ़ जाते हैं और अब दूध भी महंगा हो गया है, ऐसे में घर की रसोई चलाना मुश्किल होता जा रहा है। कपिल सिंह कहते हैं प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने वाली बात अपनी जगह सही हो सकती है लेकिन आम आदमी को रोज दाल-रोटी तो चाहिए ही। अगर इसी तरह महंगाई बढ़ती रही तो आने वाले समय में लोगों के लिए सामान्य जीवन चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार से रोजमर्रा की चीजों पर बढ़ती महंगाई कम करने की मांग की।
पिछले 1 महीने में रसोई का महंगाई मीटर-
वस्तु 1 महीना पहले 14 मई 2026
गेहूं- 2400-2450/क्विंटल 2600-2685/क्विंटल
चावल- 2350-2400/क्विंटल 2425-2500/क्विंटल
अरहर दाल- 140-145/किलो 150-155/किलो
चना दाल- 85-88/किलो 90-93/किलो
मूंग दाल- 110-115/किलो 118-122/किलो
टमाटर- 10-15/किलो 15-20/किलो
प्याज- 25-28/किलो 35-40/किलो
सरसों तेल- 165-170/लीटर 170-188/लीटर
जीरा- 450-470/किलो 480-500/किलो
धनिया- 140-150/किलो 150-160/किलो
परिवार का बजट खराब, पति- पत्नी दोनों को करना पड़ रहा काम
इटावा। फ्रेंड्स कॉलोनी के रहने वाले विशाल शर्मा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों ने उनके परिवार का पूरा बजट खराब कर दिया है। पहले वह अकेले ही पूरे घर का खर्च उठा लेते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उनकी पत्नी को भी एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी करने जाना पड़ रहा है। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार को महंगाई पर रोक लगानी चाहिए, क्योंकि आम आदमी लगातार दबाव में जी रहा है।
रोज आने-जाने वालों की बढ़ी मुश्किल
इटावा। पेट्रोल और डीजल महंगे होने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो रोज बाइक या कार से काम पर जाते हैं। दीपक मिश्रा का कहना है कि अब हर महीने केवल पेट्रोल पर ही हजारों रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। वहीं ऑटो और ई-रिक्शा चालकों का भी कहना है कि ईंधन महंगा होने से उनकी बचत कम हो गई है। अगर किराया बढ़ाते हैं तो यात्री नाराज होते हैं और नहीं बढ़ाते तो घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
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