आसमान से बरसी आग, 44 डिग्री के साथ रविवार रहा सीजन का सबसे गर्म दिन
Etah News - अप्रैल महीने में जिले में भीषण गर्मी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धूप और लू के कारण शहर की सड़कों पर सन्नाटा छा गया है। जिला आपदा प्रबंधन ने गर्मी से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है।

अप्रैल के महीने में ही सूरज के तल्ख तेवर जून जैसी तपिश का अहसास करा रहे हैं। रविवार को जिले में भीषण गर्मी ने इस सीजन के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। अधिकतम तापमान 44 और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह सात बजे के बाद से ही धूप इतनी तीखी हो गई कि दोपहर तक प्रचंड धूप और लू का रूप ले लिया। रविवार को भीषण गर्मी के साथ झुलसाने देने वाली धूप और लू के कारण शहर की सड़कों और मुख्य बाजारों में दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक सन्नाटा पसर रहा है। घंटाघर, बाबूगंज, गांधी मार्केट, हाथी गेट जैसे व्यस्त बाजारों में जरूरी कार्य से आने वाले लोग ही नजर आए।
यह लोग भी धूप और गर्मी से बचने के लिए सिर और चेहरे को गमछे, दुपट्टे से बांधे दिखे। मुख्य मार्गों पर पैदल राहगीर छतरी का सहारा लेकर धूप और लू से बचने की कोशिश करते दिखे, लेकिन गर्म हवाओं के सामने सभी प्रकार के जतन फेल हो गए। जो लोग बगैर एहतियात दोपहर में घर से बाहर निकलने, उनका खुले आसमान के नीचे तीखी धूप और लू से हाल बेहाल हो गया। कुछ बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं हीट स्ट्रोक की चपेट में आकर मार्गों पर ही चकराकर छाया ढूढते रहे। एटा मेडिकल कॉलेज और निजी क्लीनिकों में डिहाइड्रेशन, तेज बुखार, उल्टी-दस्त और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।पशु-पक्षियों का बुरा हाल, राहत के लिए जतनगर्मी का सितम केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, इसकी चपेट में बेजुबान पशु, पक्षी भी पानी की के लिए परेशान हैं। लोग राहत पाने के लिए ठंडे पेय पदार्थों, गन्ने का रस, शिकंजी और जलजीरा का सहारा ले रहे हैं, लेकिन जैसे ही गिलास खाली होता है, प्यास फिर से बेहाल करने लगती है।जिला आपदा प्रबंधन ने जारी की एडवाइजरीजिले में बढ़ते हुए पारे को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन समिति ने भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के अनुसार दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक बेवजह घर से बाहर निकलने से बचें। बाहर निकलते समय सूती कपड़े पहनें और सिर को हमेशा ढंक कर रखें। प्यास न लगने पर भी पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस या घर के बने तरल पदार्थों का सेवन करें। पशु-पक्षियों के लिए छतों और छायादार स्थानों पर पानी के बर्तन रखें।
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