यूपी: बहुचर्चित गनर मर्डर केस में 8 को उम्रकैद की सजा, 1-1 लाख का जुर्माना भी
संजय वर्मा 21 जुलाई 2018 को कचहरी से लौट रहे थे। तभी बस स्टैंड सड़क पर बदमाशों ने उनकी कार पर ताबड़-तोड़ फायरिंग की थी। जिसमें संजय वर्मा, सुनील कुशवाहा और रवि वर्मा घायल हो गए थे। जबकि निजी सुरक्षा कर्मी लक्ष्मी गेट बाहर निवासी जय गोस्वामी की मौत हो गई थी।

UP News : साल 2018 में कचहरी के पास जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर दिन दहाड़े हुई फायरिंग और उसके निजी सुरक्षा कर्मी की हत्या के मामले में 8 पर दोष सिद्ध हुआ है। शनिवार को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट अनुभव द्विवेदी की अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यहीं नहीं, उन्हें एक-एक लाख रुपए अर्थदंड से भी दंड़ित किया है। इसके अलावा धारा 307 में 10-10 साल की सजा और 50-50 हजार का दंड भी लगाया है।
शुक्रवार को साक्ष्य के अभाव में सरदार सिंह गुर्जर समेत आठ बनाए आरोपियों को बरी किया गया था। शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पंचाल, देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि मजदूरवाली गली और हाल विश्वविद्यालय के पास रहने वाले संजय वर्मा 21 जुलाई 2018 को कचहरी से लौट रहे थे। तभी बस स्टैंड सड़क पर बदमाशों ने उनकी कार पर ताबड़-तोड़ फायरिंग की थी। जिसमें संजय वर्मा, उनाव गेट बाहर निवासी सुनील कुशवाहा व चालक रवि वर्मा घायल हो गए थे। जबकि निजी सुरक्षा कर्मी लक्ष्मी गेट बाहर निवासी जय गोस्वामी की मौत हो गई थी। बाद में तहरीर पर नवाबाद थाने में लाली गैंडा उर्फ संदीप गुप्ता, रिंकू गैंडा, राजेंद्र गुर्जर, मुनेंद्र गुर्जर उर्फ पुष्पेंद्र गुर्जर, राव राजा गुर्जर, प्रहलाद गुर्जर, उधम सिंह, सोनू गैंडा, भारत सिंह गुर्जर, सरदार सिंह गुर्जर, कमलेश यादव, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, नितेश पटवारी, रोहित, रोहतास समेत 16 के के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी से भी कराई गई थी। जिसमें शिवम का नाम हटा दिया गया था।
पुलिस ने सभी की गिरफ्तारी कर भेज दिया था। जबकि आरोपी बनाए गए सरदार सिंह गुर्जर व उसका भाई पहले से जेल में थे। लिहाजा, पुलिस ने 120 का आरोपी बनाया। शुक्रवार को सात साल बाद कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद उधम सिंह, भूपेंद्र, प्रहलाद, राजेंद्र गुर्जर, कमलेश यादव, बोबी गैंडा, सोनू गैंडा और रिंकू गैंडा को दोषी करार दिया। शनिवार को फैसला सुनाते हुए सभी को आजीवन कारावास की सजा दी। वहीं एक एक लाख रुपए अर्थदंड से भी दंड़ित किया है। इसके अलावा धारा 307 में 10-10 साल की सजा व 50-50 हजार अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार को आरोपी सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, सनम डागर, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, नीतेश पटवारी और रोहित उर्फ रोहताश को साक्ष्य के अभाव ने कोर्ट ने बरी कर दिया था।
7 साल 10 महीने चली सुनवाई-हुई जिरह
साल 2018 में 21 जुलाई को जमीन कारोबारी संजय वर्मा कोर्ट से तारीख निपटाकर जा रहे थे। उनके साथ निजी सुरक्षा कर्मी जय गोस्वामी, चालक रवि वर्मा और सुनील कुशवाहा शामिल थे। तभी पुस्तकालय भवन के बाद बाइक सवारों ने ताबड़-तोड़ फायरिंग कर दी। जिसमें गोली लगने से निजी सुरक्षा कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि संजय वर्मा, रवि और सुनील घायल हो गए थे। मामले में संजय बेटे संचित ने नबाबाद थाने में रिपोर्ट कराई थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि 16 आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में मामला चला। जिसमें अभियोजन पक्ष ने 21 गवाह और साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए। करीब 7 साल 10 महीने तक लंबी सुनवाई और जिरह के बाद शुक्रवार को उधम सिंह, भूपेंद्र, प्रहलाद, राजेंद्र गुर्जर, कमलेश यादव, बोबी गैंडा, सोनू गैंडा और रिंकू गैंडा को दोषी करार दिया था।
22 साल की दुश्मनी में 3 की मौत
शुक्रवार को जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर फायरिंग और उनके गनर की हत्याकांड में कोर्ट ने फैसला सुनाया था। सूत्रों की मानें तो करीब 22 साल पहले लकारा के रहने वाले सरदार सिंह गुर्जर और जमीन कारोबारी संजय वर्मा के बीच वर्चस्व को लेकर दुश्मनी शुरू हुई थी। इस खूनी संघर्ष में अब तक दोनों तरफ से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो साल 2004 में सरदार सिंह गुर्जर के भतीजे और उनके भाई भरत सिंह के बेटे चंद्रशेखर गुर्जर की हत्या हुई थी। इस मामले में सजय वर्मा और करीबियों पर आरोप लगाए गए थे। ठीक दो साल बाद यानी 2006 में संजय वर्मा के भाई व सराफा कारोबारी अजय वर्मा को उनकी शॉप में घुसकर गोलियों से उड़ा दिया गया था। उसमें संजय वर्मा की तरफ से लकाारा के सरदार सिंह गुर्जर, मानसिंह गुर्जर, राव राजा, भोला, भरत गुर्जर, सोनू और बोबी गैंड़ा को आरोपी बनाया गया था।
और बच गया सरदार सिंह गुर्जर
साल 2018 में संजय वर्मा पर फायरिंग की गई थी। जिसमें उनके गनर की मौत हो गई। वहीं उनकी तरफ लकारा के सरदार सिंह गुर्जर समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था। मामले में उस वक्त सरदार सिंह व उसका भाई जेल में था। लिहाजा पुलिस 120 में उसे आरोपी बनाया। बचाव पक्ष की जिरह में इसे ढाल बनाया गया। बताया कि जिस वक्त गोली कांड हुआ था। उस वक्त सरदार सिंह जेल में थे। लिहाजा, इस कांड में उसकी कोई हाथ नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष भी कोई ठोस सबूत नहीं दे सका। इसी वजह से सरदार समेत आठ को बरी किया गया।
कोर्ट में दिखी वर्चस्व की लड़ाई
साल 2018 में हुए जमीन कारोबारी पर फायरिंग मामले की दोनों पक्षों से लंबी कोर्ट में लड़ाई चली। फैसला आते-आते 7 साल 10 महीने लग गए। यहीं नहीं दोनों पक्षों में कोर्ट में भी वर्चस्व की लड़ाई देखने मिली। दोनों पक्षों की तरफ से तगड़ी दलीलें दी गई। साक्ष्य पेश किए गए। यही नहीं उन्होंने अपनों को बचाने के लिए ऐडी चोटी का जोर लगा दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने भरोसा दिलाया कि घटना के बाद अधिकांश बनाए गए आरोपी झांसी में ही नहीं थे। यह लोग अन्य राज्यों में घूमने गए थे। एक आरोपी ऊधम गुर्जर ने वह था कि वह कोर्ट की तारीख के लिए आगरा गया था। वहीं दूसरी तरफ अभियोजन पक्ष की तरफ सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार बनाया गया और साबित किया गया यह लोग घटना के समय झांसी में ही थे। बाद यही हुआ कि आरोपी अपने समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके।
मच गई थी भगदड़, गनर की शरीर से निकली थी 11 गोली
साल 2018 में हुए गोलीकांड में कचहरी के पास भगदड़ मच गई थी। कई तो दुकानें छोड़कर भाग गए थे। सवारियों उतरकर भाग गई थी। चालक गाड़ी छोड़कर सरक लिए। आसपास की दुकानों के शटर डाउन हो गए थे। गोलियों से पूरा इलाका गूंज उठा था। चारो तरफ दहशत थी। सूत्रों की मानें तो निजी सुरक्षा कर्मी जय गोस्वामी का जब पोस्टमार्टम हुआ तो उसके शरीर में 11 गोलियां पाई गई थी। संजय वर्मा को एक गोली लगी थी। उनके साथी सुनील कुशवाहा को 3 और रवि वर्मा को 2 गोलियां लगी थी।
इन पर हुआ है दोष सिद्ध
आरोपी सोनू गेड़ा
आरोपी रिंकू गेड़ा।
आरोपी बोबी गेड़ा।
आरोपी राजेंद्र गुर्जर
आरोपी प्रहलाद गुर्जर।
आरोपी उधम गुर्जर।
आरोपी भूपेंद्र गुर्जर।
आरोपी कमलेश यादव।




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