Doctors at AIIMS Trauma Centre saved life of a young woman who was admitted for 98 days मृत समझ ट्रॉमा सेंटर के बाहर छोड़ गए परिजन, 98 दिन बाद जिंदा लौटी युवती, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

मृत समझ ट्रॉमा सेंटर के बाहर छोड़ गए परिजन, 98 दिन बाद जिंदा लौटी युवती

कुशीनगर की एक युवती ने कीटनाशक खा लिया था, जिसके बाद स्थानीय डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। परिजन उसे मृत समझकर एम्स गोरखपुर के ट्रॉमा सेंटर में छोड़कर भाग गए। हालांकि, डॉक्टरों ने 98 दिनों की जद्दोजहद के बाद उसकी जान बचा ली। इस दौरान 48 दिन तक युवती वेंटिलेटर पर रही और 2 बार उसे दिल का भी दौरा पड़ा।

Sat, 9 May 2026 06:03 AMPawan Kumar Sharma वरिष्ठ संवाददाता, गोरखपुर
share
मृत समझ ट्रॉमा सेंटर के बाहर छोड़ गए परिजन, 98 दिन बाद जिंदा लौटी युवती

UP News: एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने मौत के कगार पर पहुंच गई युवती को जिंदा बचा लिया। कुशीनगर की 20 साल की एक युवती ने कीटनाशक खा लिया था। कुशीनगर के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। परिजन उसे मृत समझकर एम्स के ट्रॉमा सेंटर के कैजुअल्टी एरिया में छोड़कर भाग गए। एम्स के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने 98 दिन की जद्दोजहद के बाद उसकी जान बचा ली। इस दौरान करीब 48 दिन तक युवती वेंटिलेटर पर रही। इस दरम्यान उसे दो बार दिल का दौरा पड़ा। हालांकि, सीपीआर देने पर उसकी सांस लौट आई।

बताया जाता है कि युवती को 19 जनवरी को बेहद गंभीर हालत में परिजन लेकर एम्स के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। युवती ने खेत में छिड़कने वाला जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिजनों ने बताया कि वह युवती को पहले पास के सीएचसी, फिर जिला अस्पताल ले गए। युवती की हालत देखकर कुशीनगर के डॉक्टरों ने इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए। निराश परिजन उसे लेकर एम्स के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां कैजुअल्टी वार्ड में जांच हुई तो पल्स चल रही थी, लेकिन ब्लड प्रेशर न के बराबर मिला। दिल की धड़कन बेहद मंद थी। डॉक्टरों ने फौरन उसे सीपीआर दिया। उसके बाद धड़कन लौट आई। युवती की हालत देखकर परिजन घबरा गए। युवती को मृत समझकर पुलिस केस के डर में वे भाग निकले।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:दिल्ली एम्स में दोबारा से बनेगी BSL-3 लैब, क्या होंगे इसके फायदे

दबाव पर आठ दिन बाद दोबारा लौटे परिजन

भर्ती के आठवें दिन एम्स प्रशासन ने परिजनों को फोन कर बताया कि युवती जिंदा है। एम्स और पुलिस के दबाव में परिजन आए। करीब 98 दिन तक युवती का पूरा इलाज मुफ्त हुआ। एम्स प्रशासन ने इलाज का सारा खर्चा अपने संसाधनों से उठाया। परिजनों को एक रुपया नहीं देना पड़ा। बीते 26 अप्रैल को युवती डिस्चार्ज हुई।

इस मामले में कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि ऐसे गंभीर केस में एम्स के डॉक्टर कभी हार नहीं मानते। समय पर इलाज और टीमवर्क से युवती की जान बची है। युवती अब घर लौटकर नई जिंदगी जी रही है। यह एम्स के चिकित्सकों का मरीजों के प्रति समर्पण दिखाता है। इस दौरान चिकित्सकों ने युवती के परिजनों की काउंसलिंग भी की।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:आगरा एक्सप्रेस वे पर टायर फटने से बस बनी आग का गोला, कूदकर यात्रियों ने बचाई जान

डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी

परिजनों के भागने के बावजूद एम्स के डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। उसे ट्रॉमा के मेडिकल आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया। यहां चेस्ट फिजिशियन डॉ. अरविंद कुमार और एनेस्थीसिया के डॉक्टर सुहास मल्ल की निगरानी में करीब 48 दिन तक वह वेंटिलेटर पर रही। इस दौरान उसे दो बार दिल का दौरा पड़ा। हर बार सीपीआर से जान बची। इसके अलावा एम्स ट्रॉमा की टीम में डॉ. सुब्रमणियम, डॉ. अनिल मीना, डॉ. शशि सिंह, डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. श्रीशा भी युवती के इलाज में जुटे रहे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:युवाओं में चेहरा बदलवाने की चाहत; सर्जरी के क्रेज पर क्या बोले एम्स के विशेषज्ञ?
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News , Pareet Yadav Death Live और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।