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युवाओं में चेहरा बदलवाने की चाहत; सर्जरी के क्रेज पर क्या बोले एम्स के एक्सपर्ट?

आजकल युवाओं में चेहरा बदलवाने का चलन बढ़ा है। युवा एप से चेहरे को मनचाहा स्वरूप देकर कास्मेटिक सर्जरी से उसी तरह का चेहरा बनाने की मांग कर रहे हैं। इस विषय पर क्या है एम्स के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक के डॉक्टरों की राय…

Thu, 23 April 2026 08:40 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, रणविजय सिंह, नई दिल्ली
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युवाओं में चेहरा बदलवाने की चाहत; सर्जरी के क्रेज पर क्या बोले एम्स के एक्सपर्ट?

एस्थेटिक (कॉस्मेटिक) सर्जरी बर्न, कैंसर, जन्मजात किसी दाग, मुंहासों की गंभीर समस्या से पीड़ित लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। लेकिन चेहरा निखारने के लिए भी बहुत लोग कॉस्मेटिक सर्जरी कराते रहे हैं। इसी क्रम में अब मोबाइल एप से खुद के चेहरे काे मनचाहा स्वरूप देकर वैसा ही चेहरा बदलवाने की चाहत युवाओं में बढ़ रही है। एम्स के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक के डॉक्टरों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डा. राजा तिवारी ने बताया कि स्नैपचैट डिस्मॉर्फिया भी देखा जा रहा है। आज कल हर कोई एप से अपने शरीर में बदलाव कर सकता है।लोग उस वर्चुअल छवि को सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करते हैं। कई लोगों में यह धारणा बन जाती है कि जैसा वे फोन में दिखते हैं वैसा ही वास्तव में भी दिखें।

फोटो दिखाते हैं और वैसा ही चेहरा बनाने की मांग

बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डा. राजा तिवारी ने कहा कि इस सोच के साथ कई लोग अस्पताल पहुंचकर अपनी फोटो दिखाते हैं और वैसा ही चेहरा कास्मेटिक सर्जरी से बनाने की मांग करते हैं, जो की पूरी तरह संभव नहीं होता। कई लोग नाक को आकर्षक बनाने, चेहरा फेस लिफ्ट कराने सहित कई तरह की जरूरतों के साथ पहुंचते हैं।

युवकों में मनचाही सूरत पाने की चाहत

महिलाएं तो कास्मेटिक सर्जरी कराती ही हैं। उनकी मांगें भी काफी तर्कसंगत होती है। लेकिन 20 से 30 वर्ष के युवक मनचाहा शक्ल पाने की चाहत में अधिक पहुंचते हैं। कास्मेटिक व एस्थेटिक सर्जरी की अपनी एक सीमाएं हैं। इससे चेहरे के विकार को ही ज्यादा ठीक किया जाता है। बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि सर्जरी से चेहरा या शरीर के किसी हिस्से को 15-20 प्रतिशत ही बदला जा सकता है, इससे ज्यादा प्रयोग नुकसान भी हो सकता है।

एक साल में हुई 850 लेजर सर्जरी

एम्स में पिछले वर्ष दाग को दूर करने के लिए 850 लेजर प्रोसीजर किए गए। इसके अलावा आंखों छाहीं (काले धब्बे) दूर करने, टेढ़े व दबे नाक को ठीक करने की सर्जरी भी बहुत होती है। स्तन की सर्जरी व लाइपोसक्शन सर्जरी भी काफी लोग कर रहे हैं।

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लाइपोसक्शन सर्जरी का भी बढ़ा क्रेज

पिछले साल करीब 120 लाइपोसक्शन सर्जरी की गई। इस सर्जरी के जरिये शरीर के अधिक मोटे हिस्से से सर्जरी के जरिये चर्बी निकाल दी जाती है। डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि देश में एस्थेटिक सर्जरी बढ़ रही है। साल 2024 में 12 लाख लोगों की सर्जरी हुई थी। पिछले साल 15 लाख लोगों को यह सर्जरी होने का अनुमान है। गैर सर्जिकल तरीके भी अपनाए जा रहे हैं। इसमें भारत नंबर एक है।

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3D स्कैनिंग और AI का इस्तेमाल

डॉ. शिवांगी साहा ने बताया कि एस्थेटिक सर्जरी में 3डी स्कैनिंग व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी इस्तेमाल शुरू हो गया है। एस्थेटिक सर्जरी के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी ब्लाॅक में एक तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित होगा। जिसमें देश विदेश के 280-300 डॉक्टर पहुंचकर सर्जरी में इस्तेमाल हो रही अत्याधुनिक तकनीकों को आपस में साझा करेंगे।

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