दिल्ली एम्स में दोबारा से बनेगी BSL-3 लैब, क्या होंगे इसके फायदे
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज कराने वालों के एक और बढ़िया खबर है। एम्स में एक बार फिर से अत्याधुनिक केंद्रीयकृत बायोसेफ्टी लेवल तीन (बीएसएल-3) लैब बनाई जाएगी। इसके लिए एम्स प्रशासन ने पहल की है।

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज कराने वालों के एक और बढ़िया खबर है। एम्स में एक बार फिर से अत्याधुनिक केंद्रीयकृत बायोसेफ्टी लेवल तीन (बीएसएल-3) लैब बनाई जाएगी। इसके लिए एम्स प्रशासन ने पहल की है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो एम्स के कन्वर्जन ब्लॉक में लैब बनाने का कार्य जल्द शुरू भी हो सकता है। इसका मकसद बैक्टीरिया, वायरस और फंगल संक्रमण के कारण होने वाली बीमारियों पर शोध को बढ़ावा देना है। इससे संक्रामक बीमारियों की जांच की नई अत्याधुनिक तकनीक, दवाएं और टीके विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही मरीजों को जांच की बेहतर सुविधा भी मुहैया होगी।
5 साल पहले आग लगने से जल गई थी लैब
एम्स प्रशासन के मुताबिक, संस्थान में पहले बीएसएल-3 लैब थी। उसका इस्तेमाल कोरोना की जांच और शोध में किया गया था। 16 जून 2021 को एम्स के कन्वर्जन ब्लॉक में मौजूद उस लैब में आग लग गई थी। पांच वर्ष पूर्व हुई इस घटना के बाद दोबारा बीएसएल-3 लैब शुरू नहीं हो पाई। लैब में बायो सेफ्टी के लिए विशेष व्यवस्था रहती है। ताकि यहां होने वाले परीक्षण के कारण भी संक्रमण न फैलने पाए। अब एम्स ने नए सिरे से बीएसएल लैब बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू की है, जो पहले से ज्यादा आधुनिक होगी। 35 करोड़ की लागत से कन्वर्जन ब्लॉक के नौवीं मंजिल पर यह लैब बनेगी। यह लैब एम्स के सेंट्रलाइज कोर रिसर्च फैसिलिटी (सीसीआरएफ) का हिस्सा होगी। इस लैब की डिजाइन, ढांचागत निर्माण, संक्रमण से बचाव सहित तमाम सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी। इसमें एक ही जगह वायरोलॉजी व बैक्टीरियोलॉजी दोनों तरह की लैब उपलब्ध होगी।
जांच की सुविधा बढ़ेगी
इस लैब के बनने से संक्रामक बीमारियों की जांच की सुविधा बढ़ेगी। इससे पीड़ित मरीजों के सैंपल की जांच भी हो सकेगी। साथ ही भविष्य में कोरोना जैसी महामारी आने पर जांच व शोध में मदद मिलेगी। लैब का मकसद संक्रामक बीमारियों पर शोध को बढ़ावा देना है।
शॉवर की सुविधा होगी
बीएसएल-3 लैब में सेफ्टी के मानक बेहद सख्त होते हैं। इस लैब के निकास गेट पर शॉवर की सुविधा होगी। ताकि इस लैब में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी शॉवर लेने के बाद ही बाहर निकल सकें। साथ ही इसमें बड़े स्तर पर हेफा फिल्टर इस्तेमाल होंगे। ताकि बाहर से लैब में स्वच्छ हवा ही जा सके।
बता दें कि, दिल्ली एम्स देश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों मरीज हर दिन यहां इलाज के लिए आते हैं, जिससे अस्पताल पर भारी दबाव रहता है। इसके चलते मरीजों को इलाज, ऑपरेशन या जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।




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