मां-बहन को परेशान किया, कांस्टेबल ने अपने ही महकमे पर लगाए आरोप; अखिलेश ने साधा निशाना
सुनील शुक्ला ने कहा कि पुलिस नोटिस देने के नाम पर देर रात उनके घर पहुंची जबकि घर में केवल उनकी बीमार मां और बहन मौजूद थीं। रात में छह से सात पुलिसकर्मी घर पहुंचे और दबिश जैसी कार्रवाई कर परिवार को भयभीत किया गया। सुनील ने कहा कि उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। उनकी मां लगातार बीमार रहती हैं।

UP News : लखनऊ कमिश्नरेट में तैनात कांस्टेबल सुनील शुक्ला द्वारा पुलिस विभाग पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अमेठी के गौरीगंज कोतवाली क्षेत्र के पूरे रामसेवक गांव स्थित उनके घर पर रात में पुलिस पहुंचने का मामला सामने आया है। इस पर कांस्टेबल सुनील शुक्ला ने वीडियो जारी कर पुलिस पर उनकी मां और बहन को मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांस्टेबल का वीडियो साझा कर निशाना साधा है।
सुनील शुक्ला ने बताया कि पुलिस नोटिस देने के नाम पर देर रात उनके घर पहुंची जबकि घर में केवल उनकी बीमार मां और बहन मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में छह से सात पुलिसकर्मी घर पहुंचे और दबिश जैसी कार्रवाई कर परिवार को भयभीत किया गया। सुनील ने कहा कि उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है और उनकी मां लगातार बीमार रहती हैं, इसके बावजूद पुलिस का रवैया संवेदनशील नहीं रहा।
बताया गया कि पुलिस द्वारा जारी नोटिस में उन्हें तीन दिन के भीतर अपर पुलिस आयुक्त पश्चिम लखनऊ के समक्ष उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने तथा उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। उन्होंने वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि नोटिस रात करीब एक बजे देने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि उनकी आवाज दबानी है तो उनकी हत्या करनी होगी और इसी प्रकार की साजिश रची जा रही है। मुख्यमंत्री को संबोधित वीडियो संदेश में उन्होंने पुलिस परिवार के भीतर हो रहे कथित शोषण की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा सुधार के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की।
अखिलेश यादव ने वीडियो साझा कर ये लिखा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांस्टेबल का वीडियो साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा- ‘ये हैं आज की नई आज़ादी के स्वतंत्रता सेनानी। ये उन लाखों-करोड़ों उम्मीद की किरणों में से एक हैं जो 5% सत्ताधारियों के भ्रष्टाचार, अत्याचार व उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हमारे 95% आबादीवाले पीडीए के संघर्ष की नई ऊर्जा हैं। पीड़ा बढ़ रही है, इसीलिए पीडीए बढ़ रहा है। हर ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ पीडीए है। हम सब पीड़ा के एक सूत्र में बंधे लोग हैं, इसीलिए हम कहते हैं : जो पीड़ित, वो पीडीए!’




साइन इन