तब यादव, मौर्या, कुशवाहा क्यों नहीं याद आए? सीएम योगी का सपा के पीडीए पर प्रहार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच के भरथापुर गांव के 136 परिवारों का पुनर्वास कर उन्हें 21 करोड़ रुपये की सहायता सौंपी। इस दौरान सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने केवल परिवारवाद को बढ़ावा दिया और यादव, मौर्य व दलित समाज की उपेक्षा की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बहराइच के भरथापुर में वंचितों को करोड़ों की सौगत दी। इस दौरान समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर तीखा प्रहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आज बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, सत्ता में रहते हुए उन्होंने प्रदेश को केवल अपने परिवार के लिए लूटा। 2017 से पहले की सरकारों में वंचित यादवों, दलितों, कुशवाहा और मौर्य समाज के लिए कोई संवेदना नहीं थी। थारू जनजाति के लोग बदहाली में जी रहे थे, लेकिन जाति के नाम पर बांटने वालों ने केवल अपना खजाना भरा। उन्होंने सवाल किया कि क्या भरथापुर के ये गरीब यादव, दलित और मौर्य उस पीडीए का हिस्सा नहीं थे? उनके अधिकारों की चिंता तब क्यों नहीं की गई?
मुख्यमंत्री ने बहराइच के मिहींपुरवा में तीन तरफ से नदियों और जंगलों से घिरे दुर्गम गांव 'भरथापुर' के विस्थापन और पुनर्वास के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विस्थापित हुए 136 परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टे और उनके बैंक खातों में सीधे 21 करोड़ 55 लाख 55 हजार 951 रुपये की धनराशि हस्तांतरित की। सीएम ने इस पुनर्वास बस्ती का नया नाम 'भरतपुर कॉलोनी' रखने की घोषणा करते हुए इसे जनता के लिए 'नवरात्र का उपहार' बताया।
"अंधेरे में होते थे काम, इसलिए नहीं देते थे बिजली"
पिछली सरकारों की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के गांवों में बिजली नहीं दी जाती थी। उन्होंने तंज कसा, “पिछली सरकारों के सारे काले कारनामे अंधेरे में होते थे, इसीलिए वे जनता को बिजली नहीं देते थे। हमारी सरकार ने जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर 25 करोड़ जनता को एकता के सूत्र में बांधा है। जब शासन का हिस्सा 'सेवा और संवेदना' बनती है, तभी गरीब के घर शौचालय बनता है और सड़क-पानी जैसी सुविधाएं पहुँचती हैं।”
आपदा में समाधान का नया मॉडल
सीएम योगी ने कहा कि सरकार 'आपदा में सेवा और सेवा में समाधान' के संकल्प पर काम कर रही है। भरथापुर गांव दशकों से बाढ़ और जंगली जानवरों के खतरे के बीच जी रहा था। यहां पर कई तरह की परेशानियां थीं। सरकार ने इन 500 लोगों का सुरक्षित पुनर्वास कर यह साबित किया है कि अगर नीयत साफ हो, तो दुर्गम क्षेत्रों का भी कायाकल्प संभव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नवनिर्मित भरतपुर कॉलोनी में बिजली, पानी, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।




साइन इन