Choti should not have pulled, it is sin. Deputy CM Brajesh Pathak on Shankaracharya Avimukteshwarananand controversy चोटी नहीं खींचना चाहिए था, ये महापाप है; शंकराचार्य विवाद पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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चोटी नहीं खींचना चाहिए था, ये महापाप है; शंकराचार्य विवाद पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक  ने कहा कि  चोटी नहीं खींचना चाहिए था। ये महापाप है। जिन लोगों ने चोटी को छुआ है। पाप लगेगा। कई बरस बाद भी बहुत पाप पड़ेगा। स

Tue, 17 Feb 2026 04:27 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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चोटी नहीं खींचना चाहिए था, ये महापाप है; शंकराचार्य विवाद पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक

प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद का मामला सामने आया था। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इस मामले में प्रशासन, सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव तक ने अपनी बात रखी। शंकराचार्य के बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई घटना पर अब डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी अपनी बात रखी है। एक चैनल पर ब्रजेश पाठक ने कहा कि चोटी नहीं खींचना चाहिए था। ये महापाप है। जिन लोगों ने चोटी को छुआ है। पाप लगेगा। कई बरस बाद भी बहुत पाप पड़ेगा। सब खाता बही में लिखा जा रहा है। कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

आपको बता दें कि प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बीते 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान करने जा रहे थे। इस दौरान पुलिस की ओर से रोक लिया गया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों से उनकी बहस हो गई। अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्हें संगम में स्नान करने से रोका गया। आरोप लगा कि बटुक ब्राह्मणों की चोटी खींची गई। इस दौरान उन्होंने उन पुलिसकर्मियों की फ़ोटो दिखाई जिन्होंने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। आरोप लगाया गया किया कि ये घटना प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल के सामने हुई। इस आरोप के बाद प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, ज़िलाधिकारी मनीष वर्मा और पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने सफाई दी।

प्रशासन ने रोकी थी पालकी , लगे थे ये आरोप

सौम्या अग्रवाल ने कहा कि शंकराचार्य अपने रथ और लगभग 200 अनुयायियों के साथ संगम पहुंचे थे. सुबह एक से दस बजे के बीच जब संगम पर भारी भीड़ और कोहरा था। उस समय रथ के साथ प्रवेश करना सुरक्षा की दृष्टि से ख़तरनाक था। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पालकी से नीचे उतरकर पैदल जाने को कहा गया था। उनके अनुयायियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयायियों ने बैरिकेड्स को भी काफ़ी नुकसान पहुंचाया।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनद ने ये कहा था

इसके बाद मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया। इस नोटिस के मुताबिक़ उन्होंने और उनके समर्थकों ने 18 जनवरी को त्रिवेणी संगम में जबरदस्ती घुसने का प्रयास किया। इस वजह से भगदड़ मच सकती थी। प्राधिकरण ने पूछा कि स्वामी को भविष्य के मेलों में भाग लेने से क्यों नहीं रोका जाना चाहिए और इस पर उनसे जवाब मांगा गया है। इसके जवाब में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनद ने कहा कि ना प्रशासन, ना यूपी का मुख्यमंत्री, ना देश का राष्ट्रपति तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है। शंकराचार्य ने अपने शिविर के बाहर बैठ कर विरोध जताते रहे। वे पहले मांग कर रहे थे कि दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए तभी वो स्नान करेंगे।

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योगी के बयान के बाद केशन ने की थी अविमुक्तेश्वरानंद से स्नान करने की अपील

इस बीच सीएम योगी ने बिना नाम लिए कालनेमि का नाम ले लिया। मुख्यमंत्री के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक राजनेता जो मुख्यमंत्री है, वह शिक्षा की बात नहीं करता, स्वास्थ्य की बात नहीं करता, लॉ एंड ऑर्डर की बात नहीं करता, प्रदेश की खुशहाली की बात नहीं करता, वो कालनेमि और धर्म-अधर्म के बारे में बात करता है। यह कहां तक उचित है? इसके बाद में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अविमुक्तेश्वरानंद से स्नान करने की अपील की।

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