बिना नहाए लौट जाएंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद? बोले- अभी कुछ नहीं कह रहे, लेकिन अगले मेले में...
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यहां एक अदना सा कर्मचारी भी आ जाता, भूल सुधार कर लेता और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी, इसका लिखित आश्वासन दे देता तो बात खत्म हो जाती। किंतु वह सोच रहे होंगे कि कब तक बैठे रहेंगे तो हम थकने वाले नहीं है और न ही किसी दबाव में उठने वाले हैं।

मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) से अभी तक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच गतिरोध लगातार बना हुआ है। शंकराचार्य लगातार शिविर के बाहर हैं और प्रशासन-शासन से मौनी अमावस्या की घटना के लिए माफी मांगने और सम्मान पूर्वक स्नान कराने की मांग कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि प्रशासन जब तक ऐसा नहीं करता है वह यहां स्नान नहीं करेंगे। सोमवार को उन्होंने कहा कि यहां एक अदना सा कर्मचारी भी आ जाता, भूल सुधार कर लेता और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी, इसका लिखित आश्वासन देता तो बात खत्म हो जाती। किंतु वह सोच रहे होंगे कि कब तक बैठे रहेंगे तो हम थकने वाले नहीं है और न ही किसी दबाव में उठने वाले हैं। हमारा यहां जितने दिन का कार्यक्रम बना है तब तक हम यही बैठेंगे। इस मेले में मसला हल नहीं हुआ तो अगले मेले में भी हम यही बैठेंगे।
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अभी हम किसी से कुछ नहीं कह रहे हैं क्योंकि यह मेला चल रहा है। चलते हुए मेले में व्यवधान डालना हमारा उद्देश्य नहीं है। लेकिन अगला जो मेला होगा, अभी से हम बता दे रहे हैं, लाखों लोग आएंगे, उस समय मेला लगा लेना...। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आने की हमें कोई सूचना नहीं थी। नहीं आए तो हमने यही कहा कि उन्हें रोका गया होगा, दबाया गया होगा, यही तो हम कह रहे हैं। अच्छे वचन बोलकर उन्होंने मेरे कान सुखी किए, ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनना चाहिए कहकर हमने उनके कान सुखी कर दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हम यहां मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री का इंतजार थोड़े ही कर रहे हैं। बता दें कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य रविवार की शाम को प्रयागराज पहुंचे थे। वहां सर्किट हाउस के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने एक बार फिर शंकराचार्य से विनती की कि वह विरोध समाप्त कर पवित्र संगम स्नान कर अनुकूल संदेश दें। डिप्टी सीएम ने कहा था कि मैंने पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना की है कि कृपापूर्वक वह अपना विरोध समाप्त कर पवित्र संगम में स्नान करके एक अनुकूल संदेश देने की कृपा करें। मेरी पुन: हाथ जोड़कर शंकराचार्य से विनती और प्रार्थना है। शंकराचार्य से मिलने अधिकारी नहीं जा रहे इस सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि जो भी होगा जांच कराकर समाधान निकाला जाएगा।
पीएम दो कमरों के घर में भी तो रह सकते हैं
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए मेरे पालकी से जाने की बात बार-बार उठाने वाले यह क्यों नहीं समझते कि यह तो एक परंपरा निभाई जाती है। प्रधानमंत्री एक दो कमरे वाले मकान में भी तो रह सकते हैं। उनके लिए आलीशान भवन की क्या जरूरत है? इन सवालों को समझेंगे तो उत्तर अपने आप मिल जाएगा।




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