Can a Religious Site Be Sealed Without Notice? Allahabad High Court Questions UP Government क्या बिना नोटिस धार्मिक स्थल को सील कर सकते हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी सरकार से सवाल, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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क्या बिना नोटिस धार्मिक स्थल को सील कर सकते हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी सरकार से सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से सवाल किए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या बिना नोटिस दिए किसी धार्मिक स्थल को सील किया जा सकता है?अदालत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

Mon, 30 March 2026 07:34 PMDeep Pandey प्रयागराज, विधि संवाददाता
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क्या बिना नोटिस धार्मिक स्थल को सील कर सकते हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट का यूपी सरकार से सवाल

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या बिना नोटिस दिए किसी धार्मिक स्थल को सील किया जा सकता है? कोर्ट ने जानना चाहा है कि वह किस कानून के तहत किसी धर्म स्थल को सील कर सकती है और क्या बिना पूर्व नोटिस दिए ऐसा करना वैध है। अदालत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

एहसान अली की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ यह आदेश दिया। याची का कहना है कि उसने सितंबर, 2019 में मुजफ्फरनगर जिले के जानसठ तहसील के भोपा गांव में ज़मीन विधिवत रजिस्ट्री के जरिए खरीदी थी। वह इस ज़मीन पर मस्जिद निर्माण के लिए धन जुटा रहा था, लेकिन राज्य के अधिकारियों ने उस स्थल को सील कर दिया। प्रशासन का कहना है कि निर्माण अवैध है। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली गई। वहीं याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना कोई नोटिस दिए और बिना सुनवाई का अवसर दिए यह कार्रवाई की गई, जो कानून के खिलाफ है।

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तीन बिंदुआ पर मांगा सरकार ने जवाब

अदालत ने राज्य सरकार से तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा। पहला, किस कानूनी प्रावधान के तहत किसी धार्मिक स्थल को सील किया जा सकता है। दूसरा, क्या किसी धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए राज्य से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। तीसरा, क्या बिना नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए निर्माणाधीन धार्मिक स्थल को सील करने का कोई कानूनी आधार है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी सवालों के जवाब शपथपत्र के साथ प्रस्तुत किए जाएं। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि सील की गई संपत्ति को खोला जाए, उसे निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए और कानून के अनुसार वहां नमाज अदा करने की भी इजाजत दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी।

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