ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय ने थाने में खुद को लगाई आग, पुलिस नहीं छोड़ रही थी बाइक
बरेली के बारादरी थाने में ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय अक्षय ने बाइक न छोड़ने पर खुद को आग लगा ली। पुलिस ने एक्सीडेंट के बाद उसकी बाइक जब्त की थी। अक्षय का कहना था कि बाइक के बिना उसकी रोजी-रोटी बंद हो गई है। वह गंभीर रूप से झुलस गया है और जिला अस्पताल में भर्ती है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के बारादरी थाने में मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ब्लिंकिट कंपनी के एक डिलीवरी बॉय ने पुलिस की कार्यशैली से परेशान होकर खुद पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली। आग की लपटों से घिरा युवक चिल्लाते हुए थाने के भीतर की ओर भागा, जिसे देख पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में आग बुझाकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
घटना की जड़ सोमवार शाम को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ी है। फतेहगंज पश्चिमी का निवासी अक्षय कुमार अपनी माँ के साथ कोतवाली क्षेत्र में किराए पर रहता है और ब्लिंकिट में डिलीवरी बॉय का काम कर अपना गुजारा करता है। सोमवार को जब वह गंगापुर क्षेत्र में सामान की डिलीवरी देने गया था, तभी संजयनगर निवासी विकास नाम का युवक उसकी बाइक लेकर भाग निकला। भागने के प्रयास में विकास ने माधोबाड़ी निवासी आकाश को टक्कर मार दी, जिससे आकाश के दोनों पैर टूट गए। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विकास को हिरासत में ले लिया और अक्षय की बाइक (जिससे हादसा हुआ था) को जब्त कर बारादरी थाने में खड़ा कर दिया।
रोजी-रोटी छिनने के डर ने बनाया आत्मघाती
एक डिलीवरी बॉय के लिए उसकी बाइक ही उसकी आय का एकमात्र साधन होती है। अक्षय सोमवार शाम से ही अपनी बाइक छुड़ाने के लिए थाने की चौखट पर चक्कर काट रहा था। उसने पुलिसकर्मियों को बार-बार दलील दी कि बाइक उसकी है और चलाने वाला कोई और था, लेकिन पुलिस ने मामले के कानूनी निपटारे तक बाइक छोड़ने से साफ इनकार कर दिया।
पूरा मंगलवार अक्षय थाने में मिन्नतें करता रहा। गरीबी और काम बंद होने के तनाव ने उसे इस कदर तोड़ दिया कि उसने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला कर लिया। मंगलवार रात वह एक बोतल में पेट्रोल लेकर पहुँचा और थाने के गेट पर ही खुद को आग के हवाले कर दिया।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
थाने के भीतर आग की लपटों में घिरे युवक को देख इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय और अन्य पुलिसकर्मियों ने किसी तरह आग बुझाई और उसे अस्पताल पहुँचाया। सूचना मिलते ही सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव भी जिला अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों के मुताबिक, अक्षय का चेहरा, बाल और गर्दन का हिस्सा काफी झुलस गया है, लेकिन फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि क्या बाइक रोकने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार हुआ था।




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