वाराणसी-मेरठ में ऐक्शन के बीच बरेली में गरजा बुलडोजर, दो दशक पुराने 35 से ज्यादा घर-दुकान ध्वस्त
वाराणसी और मेरठ के बाद बरेली के कोहाड़ापीर इलाके में बुलडोजर गरजा है। भारी पुलिस बल और तीन बुलडोजरों की मदद से 35 से ज्यादा अवैध दुकानों और मकानों को ध्वस्त किया गया। व्यापारियों ने भेदभावपूर्ण कार्रवाई और पुराने नक्शों का हवाला देते हुए भारी विरोध प्रदर्शन किया।

UP News: वाराणसी में दालमंडी और मेरठ में सेंट्रल मार्केट में अभियान के बीच अब बरेली शहर के कोहाड़ापीर इलाके में बुलडोजर गरजा है। भारी विरोध के बीच नगर निगम की टीम ने मंगलवार को 35 से ज्यादा घर-दुकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान किसी की दुकान आंशिक रूप से तोड़ी गई तो कई की दीवारें और लिंटर तक गिरा दिया गया। नगर निगम की टीम ने भारी फोर्स के साथ तीन बुलडोजरों की मदद से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। सबसे पहले कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप के सामने उन दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया, जिन पर लगे लाल निशान लोगों ने मिटा दिए थे।
सालों की मेहनत टूटते देख व्यापारियों के छलके आंसू
सुबह 11 बजे ही निगम की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंच गई। सालों की मेहनत से बनाई गई दुकानें अपनी आंखों के सामने टूटते देख कई व्यापारियों के आंसू छलक आए। उनका कहना था कि जीवन भर की कमाई उजड़ गई और अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। दुकानदार मुजम्मिल, शरीफ, नदीम ने कहा कि वह 25 से 30 साल से दुकान चला रहे हैं, लेकिन निगम को अतिक्रमण दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर यह निगम की जमीन थी तो पहले याद क्यों नहीं आई।
सीएम ग्रीन के तहत सड़क चौड़ीकरण
बताया जा रहा है कि ध्वस्तीकरण के लिए 55 से 60 दुकानों और भवनों को पहले ही चिह्नित किया गया था। यह कार्रवाई सीएम ग्रीन के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए की गई। कार्रवाई के दौरान कोहाड़ापीर से धर्मकांटा तक सड़क बंद कर दी गई। इस दौरान एक दो धार्मिक स्थल के गेट, दीवार और छज्जे को नुकसान पहुंचते ही लोग भड़क गए। जनप्रतिनिधियों से लेकर तमाम व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें शांत करा दिया। लोगों का आरोप है कि उन्हें बेघर किया जा रहा है और सरकार उनकी आजीविका छीन रही है।
नगर पालिका थी, तब पास हुए थे दुकानों के नक्शे
बरेली कॉलेज की रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ़ पूर्णिमा अनिल की भी 8 दुकानों पर बुलडोजर चल रहा है। उनका कहना है कि जब बरेली में नगर पालिका थी तब नक्शा पास था, लेकिन कोई सुन नहीं रहा। नगर निगम 1920 का नक्शा दिखाकर दुकानों को तोड़ रहा है। व्यापारियों ने अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगाई कि अगर दुकानें तोड़ दी गई तो सभूखे मरने की नौबत आ जाएगी, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला।
फर्नीचर की दुकान छोड़ने पर भड़के व्यापारी
अतिक्रमण हटाने के दौरान उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब आसपास की दुकानों को पूरी तरह ध्वस्त करने के बाद वहां स्थित तीन मंजिला महिमा फर्नीचर बिल्डिंग का केवल कुछ हिस्सा तोड़ा गया और बाकी छोड़ दिया गया। इस पर दुकानदार भड़क गए। गुस्साए व्यापारियों ने एक्सईएन का घेराव कर दिया और कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताते हुए हंगामा किया। हंगामे के चलते करीब आधे घंटे तक बुलडोजर कार्रवाई रुकी रही। बताते हैं कि इस दौरान किसी बड़े जनप्रतिनिधि का फोन आने के बाद निगम की टीम वहां से लौट गई, जिससे मामला और गरमा गया।
कबाड़ में निकली विंटेज कार बनी आकर्षण का केंद्र
कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान पेड़ों और कचरे के बीच दबी खड़ी एक बेहद पुरानी कार नजर आई। कार की हालत बेहद जर्जर है, लेकिन उसकी बनावट और डिजाइन ने लोगों का ध्यान खींच लिया। कई लोगों ने इसे विंटेज कार बताते हुए तस्वीरें भी खींचीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार कई सालों से यहीं खड़ी थी, लेकिन झाड़ियों और कचरे के कारण दिखाई नहीं देती थी।
नगर निगम ने दो महीने पहले सभी दुकानों, धार्मिक स्थलों, पेट्रोल पंप, बिजली घर, कॉलेज की दीवारों पर लाल निशान लगाए थे और नोटिस भी दिए थे। ऐसे में कई व्यापारियों ने खुद अतिक्रमण तोड़ने का काम शुरू कर दिया था, लेकिन बहुत से व्यापारियों को उम्मीद थी कि नगर निगम की ओर से उन्हें राहत मिल सकती है।




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