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लू के थपेड़ों ने झुलसाया, पारा 42 पर

Azamgarh News - सूर्य की तपिश के साथ ही अप्रैल माह में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। दिन में लू के साथ तेज धूप की तपिश जहां पूरे शरीर को झुलसा दे रही है, वहीं रात में भी

Tue, 21 April 2026 11:56 PMNewswrap हिन्दुस्तान, आजमगढ़
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लू के थपेड़ों ने झुलसाया, पारा 42 पर

आजमगढ़, संवाददाता। शुष्क पछुआ हवाओं के कारण मंगलवार को जिले में लू जैसे हालात बने रहे। अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि हवा की रफ्तार 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले पांच-छह दिनों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दोपहर होते लू के थपेड़ों के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो रहे हैं। कूलर और पंखे भी राहत देने के बजाय गर्म हवा दे रहे हैं। पूरे दिन चल रही गर्म हवाओं से जनजीवन प्रभावित है। भीषण गर्मी से न केवल लोग, बल्कि पशु-पक्षी भी बेहाल हैं।

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हीटवेव से बचने के लिए लोग दोपहर के समय घरों में ही रहना बेहतर समझ रहे हैं। भीषण गर्मी का सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला-खोमचा लगाने वाले पटरी दुकानदारों पर पड़ रहा है। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उधर, तापमान बढ़ने के साथ संक्रामक बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। जिला अस्पताल में डायरिया, बुखार, डिहाइड्रेशन और एलर्जी से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। मंगलवार को ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। पर्ची काउंटर, डॉक्टर कक्ष, दवा वितरण केंद्र और पैथोलॉजी लैब पर पूरे समय मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। चिकित्सक हीटवेव से बचने के लिए लोगों को सलाह दे रहे हैं। दोपहर के समय घर पर ही रहने की सलाह दे रहे हैं। मंडलीय अस्पताल के चिकित्सक अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि दिन और रात के बीच बढ़े हुए तापमान के चलते दिल की गति और ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है। गर्मी के कारण शरीर में सोडियम-पोटेशियम का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे डिहाइड्रेशन होता है, जिसका सीधा असर दिल पर पड़ता है। घर से निकलने से पहले पेट भर पानी पी कर निकले। गर्मी का असर होते ओआरएस का घोल लें।हीटवेव से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयारसीएमओ एनआर त्रिपाठी ने जिले में बढ़ते तापमान और संभावित लू (हीट वेव) को देखते हुए स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि गर्मी के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर जनपद के सभी चिकित्सा संस्थानों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज, मंडलीय एवं जिला चिकित्सालय, जिला महिला चिकित्सालय, सभी 100 शैय्या अस्पतालों के साथ-साथ समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर हीट वेव से बचाव के लिए ‘कूल वार्ड’ स्थापित कर दिए गए हैं। इन वार्डों में आवश्यक दवाएं, पेयजल, शीतलन व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधनों की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सीएमओ ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को तेज गर्मी, लू या अस्वस्थता से संबंधित कोई भी लक्षण महसूस हों, तो वह बिना विलंब अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें, जहां तत्काल उपचार की सुविधा उपलब्ध है।गर्मी बढ़ते ही हैंडपंपों से पानी छोड़ रहा साथलालगंज, हिन्दुस्तान संवाद। गर्मी बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में जल संकट गहराने लगा है। जलस्तर गिरने से हैंडपंप जवाब देने लगे हैं, जिससे लोगों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अधिकांश लोग अब भी हैंडपंप पर निर्भर हैं। पीने, नहाने, धोने और खाना बनाने के लिए यही मुख्य स्रोत है, लेकिन बढ़ती गर्मी के कारण जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। क्षेत्र में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप भी पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। वहीं, साधन संपन्न लोगों ने घरों में सबमर्सिबल पंप लगवा रखे हैं, जिससे जल दोहन बढ़ने की बात भी सामने आ रही है। गर्मी बढ़ते ही ऊंचाई वाले इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। करिया गोपालपुर, भुड़की, बच्छिनी, मरहती, गोसाईगंज, कलीचाबाद, देवगांव, सलहरा, बनारपुर, परसौरा, सलेमपुर, दौना, बैरीडीह, कटौली और बसही गांवों में जल संकट गहराने लगा है।गर्मी शुरू होते ही क्षेत्र के सूख गए अधिकतर तालाबफरिहा, हिन्दुस्तान संवाद। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में गर्मी की शुरुआत होते ही तालाब सूखने लगे हैं, जिससे जल संकट गहराने लगा है। पानी की कमी के कारण जंगली जानवर भी अब गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।क्षेत्र के बड़ागांव, रसूलपुर, मैनपारपुर, फरिहा और फत्तनपुर सहित कई गांवों में अधिकांश तालाब सूख चुके हैं। गर्मी अभी शुरुआती दौर में ही है, लेकिन तालाबों में पानी समाप्त हो जाने से इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सूखे तालाबों में पानी की जगह अब खरपतवार उग आए हैं। जिला पंचायत सदस्य वीरेंद्र नाथ मिश्र ने इस समस्या को लेकर रानी की सराय के खंड विकास अधिकारी राज किशोर सिंह को अवगत कराया और तालाबों में ट्यूबवेल से पानी भरवाने की मांग की है। इस संबंध में बीडीओ राज किशोर सिंह ने बताया कि सामान्यतः तालाब मई-जून में सूखते हैं, जिन्हें ग्राम पंचायतों के माध्यम से भरवाया जाता है। इस वर्ष कम बारिश के कारण अप्रैल में ही तालाब सूखने की स्थिति सामने आई है। उन्होंने कहा कि संबंधित ग्राम पंचायतों को निर्देश जारी कर ट्यूबवेल के माध्यम से सूखे तालाबों में पानी भरवाया जाएगा।

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