Fuel Consumption in Azamgarh PM Modi s Appeal Ignored by Local Leaders सांसदों-विधायकों संग छुटभैयों नेताओं का भी लंबा काफिला, Azamgarh Hindi News - Hindustan
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सांसदों-विधायकों संग छुटभैयों नेताओं का भी लंबा काफिला

Azamgarh News - आजमगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील के बावजूद पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए नेताओं की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। सांसदों और विधायकों के काफिले में कई गाड़ियाँ हैं। पुलिस विभाग के पास सबसे अधिक वाहन हैं, जिससे हर महीने छह करोड़ रुपये से अधिक का डीजल खर्च होता है।

Thu, 14 May 2026 01:09 AMNewswrap हिन्दुस्तान, आजमगढ़
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सांसदों-विधायकों संग छुटभैयों नेताओं का भी लंबा काफिला

आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील के बाद भी जिले में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए नेताओं की तरफ से अबतक कोई कवायद शुरू नहीं की गई है। क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष, हर जगह वाहनों का लंबा काफिला है। सांसदों-विधायकों के साथ सत्ता पक्ष के प्रमुख नेता भी तीन से चार गाड़ियों के साथ चल रहे हैं। पीएम मोदी की अपील के बाद सीएम योगी ने प्रदेश में मंत्रियों और अफसरों का काफिला का काफिला आधा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने ईंधन बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की है। हालांकि अभी जिलेस्तर पर इसका बहुत असर नहीं दिखाई दे रहा है। सांसद-विधायकों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के नेताओं पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। जिले में समाजवादी पार्टी के दो सांसद हैं। आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव का काफिला पांच से अधिक गाड़ियों का होता है। उनके पीछे उनके समर्थकों की भी गाड़ियां होती हैं। इसी तरह, लालगंज के सांसद दरोगा सरोज के काफिले में भी चार से पांच वाहन होते हैं। इसी तरह, विधायकों के काफिले में भी आमतौर पर तीन से चार गाड़ियां होती हैं। उनके क्षेत्र में आने के बाद समर्थक भी अपने वाहन लेकर साथ हो लेते हैं। सत्ता पक्ष के नेताओं का भी यही हाल है। भाजपा के जिलाध्यक्ष समेत अन्य जिलास्तरीय पदाधिकारी और अन्य नेता भी तीन से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ चल रहे हैं। यही हाल जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुखों का भी है। वे भी तीन-तीन गाड़ियों के काफिले के साथ चल रहे हैं। पीएम और सीएम की अपील के बाद भी ईंधन बचाने को लेकर फिलहाल जनप्रतिनिधियों और नेताओं की तरफ से कोई ठोस कवायद नहीं शुरू की गई है।

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पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चार सौ से अधिक वाहन

आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। मंडल में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चार सौ से अधिक वाहन हैं। इनमें सबसे ज्यादा वाहन पुलिस विभाग के पास हैं। जरूरी सेवाएं होने के कारण सबसे ज्यादा पुलिस विभाग के वाहन ही दौड़ते हैं। मंडल में हर दिन दो हजार लीटर से अधिक डीजल की खपत होती है।

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प्रशासनिक स्तर पर मंडल में मंडलायुक्त कार्यालय में पांच से अधिक वाहन है। इनमें मंडलायुक्त के पास दो और दोनों अपर आयुक्त के पास एक-एक वाहन हैं। इसी तरह, राजस्व विभाग में 30 से अधिक वाहन हैं। इनमें जिलाधिकारी एक वाहन और एक स्कॉट वाहन के साथ चलते हैं। इसके अलावा दो एडीएम, सीआरओ के पास एक-एक वाहन हैं। आठ तहसीलों में आठ एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पास एक-एक वाहन हैं। इनमें कुछ सरकारी वाहन हैं और कुछ स्थानीय स्तर पर अटैच किए गए हैं। जिनका हर माह भुगतान किया जाता है। डीजल भी विभाग को देना होता है। इसी तरह विकास विभाग के पास 32 के आसपास वाहन हैं। इनमें दस वाहन विकास भवन में लगे हैं, जबकि 22 बीडीओ के पास एक-एक वाहन हैं। इसी तरह बिजली विभाग के पास नौ, लोक निर्माण विभाग के पास दस, संभागीय परिवहन कार्यालय के पास चार, परिवहन विभाग के पास तीन, मंडी परिषद के पास तीन, आबकारी विभाग के पास सात वाहन हैं। जिले में सबसे ज्यादा वाहन पुलिस विभाग के पास हैं। इनकी संख्या 250 के आसपास हैं। इनमें अकेले 95 पीआरवी वाहन हैं। इसके अलावा सभी थानों में दो-दो वाहन और जिले के वरिष्ठ अफसरों के वाहन हैं। पुलिस विभाग के सभी वाहन आवश्यक सेवाओं से जुड़े हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक, हर महीने जिले के सरकारी वाहनों में दो हजार से अधिक का डीजल खर्च होता है।

वीआईपी और मंत्रियों के दौरे के समय भी दौड़ते हैं सरकारी वाहन

जिले में वीआईपी और मंत्रियों के दौरे के समय भी सरकारी वाहन दौड़ते हैं। मंत्री के आने पर स्थानीय स्तर पर एक वाहन और पुलिस की स्कॉर्ट लगाई जाती है। मंत्रियों के कार्यक्रम स्थल तक और जिले में आने पर संबंधित विभाग के अफसर लगातार उनके आगे-पीछे लगे रहे जाते हैं। इसके साथ ही अगर कोई मंत्री या वीवीआईपी जिले से होकर गुजर रहा है तो उसे भी बार्डर से बार्डर तक स्कॉर्ट उपलब्ध कराई जाती है।

डीजल पर हर महीने छह करोड़ से अधिक हो जाते हैं खर्च

डीजल की खपत कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर अभी प्रशासनिक मशीनरी की तरफ से कोई खास कदम नहीं उठाए गए हैं। देखा जाए तो हर महीने जिले में डीजल पर करीब छह करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। सबसे अधिक डीजल पुलिस विभाग के वाहनों पर खर्च होता है। हालांकि एक तथ्य यह भी है कि पुलिस विभाग के अधिकांश वाहन आवश्यक सेवाओं में दौड़ते हैं और उनमें कटौती कर पाना संभव नहीं है।

बैटरी चालित वाहन उपलब्ध नहीं, मीटिंग के लिए गूगल मीट ही सहारा

आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। बैठकों के लिए दौड़ते पुलिस और प्रशासन के वाहनों को लेकर फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। मीटिंग के लिए गूगल मीट का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन अभी इसकी पहल नहीं शुरू की गई है।

मंडल और जिला स्तर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था सिर्फ कलक्ट्रेट में स्थित एनआईसी में है, लेकिन यहां पर ज्यादातर प्रदेश स्तर से होने वाली बैठकें ही आयोजित की जाती हैं। मंडलीय समीक्षा बैठक सिधारी स्थित मंडलायुक्त के कार्यालय के सभागार में होती है। कलक्ट्रेट में तकरीबन हर दिन विभागीय बैठक होती रहती है। जिसमें संबंधित विभागों के जिले और तहसील-ब्लॉक स्तर के अफसर मौजूद रहते हैं। इन बैठकों के लिए गूगल मीट का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन फिलहाल अभी ऐसी कोई पहल नजर नहीं आ रही है। न ही शासन की तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी किया गया है। प्रशासन के पास बैटरी चालित वाहन भी नहीं हैं। काफी समय से परिवहन विभाग के बेड़े में बैटरी से चलने वाली बसें शामिल करने की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक बसें नहीं आई हैं। अभी वर्क फ्राम होम जैसी स्थिति भी नहीं है। प्रशासनिक अफसरों की तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

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