Census 2027 Begins in Azamgarh Digital Self-Enumeration Process Launched देश में पहली बार हो रही डिजिटल जनगणना, जिले में कलक्ट्रेट सभागार में डीएम ने किया शुभारंभ , Azamgarh Hindi News - Hindustan
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देश में पहली बार हो रही डिजिटल जनगणना, जिले में कलक्ट्रेट सभागार में डीएम ने किया शुभारंभ

Azamgarh News - जिले में करीब डेढ़ दशक बाद गुरुवार को जनगणना-2027 की शुरुआत हुई। यह पहला मौका है जब डिजिटल जनगणना की जा रही है। पहले चरण में मकानों की गणना एवं सूचीकरण

Fri, 8 May 2026 12:33 AMNewswrap हिन्दुस्तान, आजमगढ़
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देश में पहली बार हो रही डिजिटल जनगणना, जिले में कलक्ट्रेट सभागार में डीएम ने किया शुभारंभ

आजमगढ़, संवाददाता। जिले में गुरुवार से जनगणना-2027 की शुरुआत हो गई। पहली बार जनगणना की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से भी कराई जा रही है। पहले चरण में मकानों की गणना और सूचीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस दौरान लोग स्वगणना के माध्यम से पोर्टल पर 34 प्रकार की सूचनाएं दर्ज करेंगे। कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी रविंद्र कुमार ने स्वगणना का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज की। इसके साथ ही पहले दिन सांसद, विधायक और अन्य अधिकारियों ने भी स्वगणना प्रक्रिया में भाग लिया। जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में मकानों की गणना एवं सूचीकरण किया जा रहा है। सात मई से शुरू हुई यह प्रक्रिया 21 मई तक यानी 15 दिनों तक चलेगी। इस दौरान नागरिक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी भरेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आयोजित होने वाली आठवीं तथा भारत की जनगणना श्रृंखला की 16वीं जनगणना है। खास बात यह है कि यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें आधुनिक तकनीकी संसाधनों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। जिले में जनगणना कार्य के लिए कुल 24 चार्ज निर्धारित किए गए हैं। इनमें आठ ग्रामीण और 16 नगरीय चार्ज शामिल हैं। इन चार्जों के अंतर्गत कुल 9,097 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक चिह्नित किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित तहसीलदारों को चार्ज अधिकारी तथा नगरीय क्षेत्रों में संबंधित अधिशासी अधिकारियों को चार्ज अधिकारी नामित किया गया है। वहीं, जनपद स्तर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को जिला जनगणना अधिकारी और जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाया गया है। अधिकारी स्वयं पूरे कार्य की निगरानी कर रहे हैं。

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22 मई से 20 जून तक घर-घर प्रगणक करेंगे मकानों का सूचीकरण

जनगणना के प्रथम चरण में ही 22 मई से 20 जून तक प्रगणक घर-घर पहुंचकर मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का काम करेंगे। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर ऐप के माध्यम से आंकड़ों का संकलन करेंगे। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक परिवार का विवरण, मकान की स्थिति, उपयोगिता एवं अन्य आवश्यक सूचनाएं संकलित की जाएंगी। यह डेटा भविष्य की नीतियों, योजनाओं एवं विकासात्मक कार्यक्रमों के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डिजिटल जनगणना के माध्यम के उपयोग से नागरिकों को सुविधा और पारदर्शिता का लाभ प्राप्त होगा। यह पहल जन-सहभागिता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता को भी सुदृढ़ करेगी। 22 मई से घर-घर जब प्रगणक जाएंगे तो उन्हें आपको स्व-गणना की आईडी देनी है, जिसे वे पोर्टल के माध्यम से सत्यापित कर लेंगे।

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सोलह भाषाओं में उपलब्ध है स्वगणना की सुविधा

स्वगणना से जनगणना का काम आसान हो जाएगा। आपको समय कम देना पड़ेगा और प्रगणक जब आपके घर की कुंडी 22 मई से खटखटाएंगे तो उन्हें भी ज्यादा मथापच्ची नहीं करनी पड़ेगी। सेल्फ एन्युमिरेशन पोर्टल (एसई) के माध्यम से यह सुविधा मिलेगी। अपने लैपटॉप, कंप्यूटर से घर बैठे खुद घर की सारी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। किसी समस्या पर जनगणना की तकनीकी टीम आपकी मदद करेगी। स्वगणना की सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध है।

स्वगणना के तहत निर्धारित किए गए दिवस

स्वगणना कोई भी कर सकता है, लेकिन सरकारी मशीनरी ने इसे युद्ध स्तर पर करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सात मई को जिले के सांसद, विधायक और राजस्व विभाग के प्रशासनिक अफसरों से शुरुआत हुई। 8 मई को लोकल गर्वनेंस और ग्रामीण विकास विभाग, 9 मई को युवा एवं खेल डे होगा। मीडिया डे भी इसी दिन है। 10 को पद्म श्री अवार्डी, रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का लक्ष्य है। 11 मई को न्यायिक विभाग का दिन है। 12 मई को यूनिफार्म फोर्स डे में पुलिस, पीएसी सभी स्वगणना करेंगे। 13 मई को केंद्र सरकार के आधीन विभागों के अधिकारी, 14 मई को शिक्षा, 15 मई को स्वास्थ्य, उद्योग, महिलाओं के लिए दिवस तय किया है। इसी तरह 20 मई तक कार्यक्रम तय किया गया है।

ऐसे करें स्व-जनगणना

स्वगणना से समय बचेगा और डाटा शुद्ध भी रहेगा। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा। इसके बाद परिवार के मुखिया का मोबाइल नंबर डालना होगा। आधार और मकान से जुड़ी जानकारी इसमें भरनी होंगी। पूरी प्रक्रिया के बाद 11 अंकों की एसईआईडी जनरेट होगी। प्रगणकों को यही आईडी आपको बतानी है। प्रगणक 22 मई से घर-घर पहुंचेंगे। जनगणना प्रबंधन डिजिटली होगा। जिले में चार हजार से ज्यादा कर्मचारी जनगणना कार्य के लिए सूचीबद्ध किए गए हैं। रिजर्व में तमाम लोगों को रखा गया, जिससे काम किसी भी तरह प्रभावित न होने पाए।

स्वगणना के लिए अपनानी होगी ये प्रक्रिया

- स्व-गणना पोर्टल https://se.census.gov.in खोलें

- परिवार का पंजीकरण करें (नाम और मोबाइल नंबर)

- भाषा चुनें और ओटीपी सत्यापन करें

- पता दर्ज करें और मानचित्र पर घर चिह्नित करें

- जनगणना प्रश्नावली भरें और अंतिम सबमिट कर एसई आईडी प्राप्त करें

- प्रगणक द्वारा एसई आईडी की प्रविष्टि व क्षेत्रीय सत्यापन

जनगणना से आमजन को होंगे कई फायदे

जनगणना से आमजन को कई फायदे होंगे। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही सरकार लोगों को लाभांवित करने के लिए कई योजनाओं का क्रियान्वयन करती है। इसके आंकड़े क्षेत्र-विशेष के लिए भी योजनाएं तैयार करने में सहायक होते हैं। विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों का सीमा निर्धारण, लोकसभा, विधानसभा आदि के क्षेत्रों के परिसीमन, शहरीकरण, साक्षरता समेत कई पहलुओं में जनगणना के आंकड़े आधार का कार्य करते हैं।

इन 34 सवालों के देने होंगे जवाब

घर का नंबर, जनगणना का नंबर, घर की छत, फर्श कैसी, परिवार का क्रमांक, मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, उपलब्ध कमरों की संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता कितने निकट, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की स्थिति, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी किससे जुड़ी, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा है या नहीं, रसोई घर में एलपीजी या पीएनजी अथवा अन्य सुविधा, रेडियो, मोबाइल, स्मार्ट फोन की स्थिति आदि।

न दें किसी को ओटीपी या दस्तावेज

जनगणना अधिकारी आपसे कभी भी कोई ओटीपी, दस्तावेज, फोटो आईडी नहीं मांगेंगे। बस उनके सवालों का जवाब दीजिए। अगर कोई ओटीपी और दस्तावेज मांगे तो उसे न दें। वह जनगणना अधिकारी या प्रगणक नहीं हो सकता है। पूरी तरह सावधानी बरतें और साइबर अपराध से बचें। जनगणना अधिकारी आपसे सिर्फ स्वगणना के दौरान जनरेट हुई 11 अंकों की एसईआईडी मांगेंगे।

अब तक सात बार हो चुकी है जनगणना

पहली जनगणना वर्ष 1951 में, दूसरी वर्ष 1961 में, तीसरी, 1971 में, चौथी 1981 में, पांचवीं वर्ष 1991 में, छठवीं वर्ष 2001 और सातवीं जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी।

वर्षवार जनगणना के आंकड़े

वर्ष कुल जनसंख्या पुरुष महिला ग्रोथ प्रतिशत

2011 4613913 2285004 2328909 17.11 प्रतिशत

2001 3939916 1950415 1989501 25.89 प्रतिशत

1991 3129000 1559000 1570000 25.46 प्रतिशत

1981 2494000 1227000 1267000 24.96 प्रतिशत

1971 2857484 1431267 1426217

1961 2619000 अनुमानित जनसंख्या

1951 2191500 अनुमानित जनसंख्या

डीएम ने जनगणना सेल्फी प्वाइंट का किया शुभारंभ

कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने गुरुवार को जनगणना सेल्फी प्वाइंट का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं सेल्फी प्वाइंट पर खड़े होकर अपनी फोटो खिंचवाई। इसके बाद अन्य अधिकारियों ने भी सेल्फी प्वाइंट पर अपनी फोटो खिंचवाई। उन्होंने लोगों को जनगणना के लिए जागरूक किया।

आने वाले हैं जनगणनाकर्मी, मोहल्ले में जुट जाती थी भीड़

आजमगढ़, संवाददाता। वर्ष 1951 और 1961 की जनगणना का नजारा अलग ही होता था। जनगणना अधिकारी के आने की सूचना मिलने पर लोगों की भीड़ जुट जाती थी। जनगणनाकर्मी एक-एक सवाल पूछने के बाद रजिस्टर में दर्ज करते थे।

शहर के रेलवे स्टेशन निवासी वरिष्ठ साहित्यकार 78 वर्षीय जगदीश प्रसाद कुंद ने बताया कि वर्ष 1961 की जनगणना के समय उनका बचपन था। पिता और घर के बड़े बुजुर्ग बताते थे कि जनगणनाकर्मी आने वाले हैं। लोग उनका बेसब्री से इंतजार करते थे। जनगणनाकर्मियों के आते ही मोहल्ले में भीड़ लग जाती थी। उन्हें ठीक से याद नहीं कि कितने सवाल उस दौर में थे, लेकिन जनगणना कर्मी अपने साथ लाए फार्म पर परिवार के लोगों से सवाल पूछकर भरते थे। युवा अवस्था में जिला पूर्ति विभाग में उनकी नौकरी लग गई। वर्ष 1981 में एक बार जनगणना में उनकी भी ड्यूटी लगी थी। वह साइकिल से अन्य कर्मचारियों के साथ जनगणना के लिए जाते थे। अब स्थिति पहले से काफी बदल चुकी है।

गांव में प्रगणकों की होती थी बहुत इज्जत

लालगंज विकास खंड क्षेत्र के ठेकमा गांव निवासी 80 वर्षीय वली मुहम्मद इसी तहसील क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चक जमालुद्दीनपुर पुरसुंडी से प्रधानाध्यापक के पद से वर्ष 2000 में रिटायर्ड हुए हैं। वर्ष 1966 में शिक्षा विभाग में भर्ती हुए थे और उनकी तैनाती इसी विद्यालय में हुई थी। वली मुहम्मद ने बताया कि वर्ष 1971, 1991 और 2002 में उन्होंने जनगणना का कार्य किया। सुपरवाइजर के साथ चार सदस्यीय प्रगणक की टीम के साथ साइकिल से गांव में पहुंचते थे। उस दौर में लोग प्रगणक टीम की इज्जत करते थे। हाथ से जनगणना के फार्म पर सभी कॉलम लोगों से पूछकर भरा जाता था। फार्म में कितने कॉलम थे, यह पूरी तरह से अब याद नहीं है। दौर के साथ साथ गणना का कार्य भी बदलता गया। अब डिजिटल जनगणना का दौर आ गया है। डिजिटल जनगणना पहली बार हो रही है।

एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने भी की स्वगणना

फरिहा। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के भड़सड़ा खालसा गांव में गुरुवार को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने अपने आवास पर स्वगणना में सहभागिता निभाई। दोपहर करीब एक बजे उन्होंने उपजिलाधिकारी निजामाबाद चंद्रप्रकाश सिंह एवं जनगणना कर्मियों की मौजूदगी में ‘हाउस लिस्टिंग’ के अंतर्गत स्वयं गणना प्रपत्र भरकर इस महत्वपूर्ण अभियान में अपनी भागीदारी निभाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि जनगणना देश और समाज की योजनाओं के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार होती है। इससे सरकार को जनसंख्या, आवास, शिक्षा, रोजगार एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित सटीक आंकड़े प्राप्त होते हैं।

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