ईद पर काले कपड़े पहनें, नमाज में काली पट्टी बांधें, आजम खान की जेल से क्यों ऐसी अपील?
रामपुर जेल में बंद आजम खान ने ईद पर मुसलमानों से काले कपड़े पहनने और काली पट्टी बांधने की अपील की है। उन्होंने ईरान में 160 बच्चियों के साथ हुए हादसे के विरोध में यह पैगाम दिया है। सपा नेता यूसुफ मलिक ने मुलाकात के बाद आजम खान के इस संदेश की जानकारी मीडिया को दी।

UP News: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की जेल में बंद समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान ने इस साल ईद के त्यौहार को लेकर एक बड़ा और भावुक आह्वान किया है। शनिवार को जिला कारागार में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात करने पहुंचे सपा नेताओं ने बाहर आकर मीडिया को चौंकाने वाली जानकारी दी। आजम खान ने मुस्लिम समुदाय, विशेषकर सुन्नी मुसलमानों से अपील की है कि वे इस बार ईद की नमाज के दौरान काले कपड़े पहनें या बांह पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएं।
ईरान की घटना पर जताया गहरा दुख
मुलाकात के बाद बाहर आए मुरादाबाद के सपा नेता यूसुफ मलिक ने आजम खान के संदेश को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आजम खान ईरान में हुए हालिया घटनाक्रम से बेहद व्यथित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल और अमेरिका के संदर्भ में ईरान में जो 160 बच्चियों के साथ दुखद हादसा हुआ है, आजम खान ने उसे पूरी इंसानियत के लिए एक बड़ा घाव बताया है। आजम खान का मानना है कि जो बच्चियां वहां शहीद हुईं, वे भी हमारी अपनी बेटियों जैसी थीं। उनकी मौत पर शोक व्यक्त करना और दुनिया का ध्यान खींचना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
सादगी से ईद मनाने और 'कहकहों' से बचने की अपील
आजम खान ने अपने पैगाम में केवल काले कपड़े पहनने की बात ही नहीं की, बल्कि उन्होंने यह भी कहा कि इस बार ईद पर लोग 'कहकहे' लगाकर न हंसें और न ही खुशियों का वैसा प्रदर्शन करें जैसा आमतौर पर होता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपनी उन बेटियों को ईद के दिन 'खिराज-ए-तहसीन' (श्रद्धांजलि) पेश करनी चाहिए। आजम खान के अनुसार, यह काली पट्टी और काले कपड़े वैश्विक स्तर पर मासूमों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध होगा।
पत्नी भी मिलने पहुंची थीं
शनिवार को आजम खान की पत्नी तजीन फात्मा और सपा नेता यूसुफ मलिक ने जिला कारागार में उनसे और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। जेल प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच करीब आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में राजनीतिक चर्चाओं से ज्यादा मानवीय संवेदनाओं पर बात हुई। गौरतलब है कि आजम खान पिछले काफी समय से जेल में बंद हैं, लेकिन जेल के भीतर से भी उनके बयानों का असर रामपुर और आसपास के जिलों की राजनीति पर साफ देखा जाता है। अब देखना यह है कि ईद के दिन उनकी इस अपील का जमीन पर कितना असर होता है।




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