संभल हिंसा केस में ASP अनुज चौधरी की गवाही दर्ज, बचाव पक्ष ने 2 घंटे में पूछे 150 सवाल
बचाव पक्ष ने ASP अनुज चौधरी से हथियारों और फायरिंग को लेकर कई तकनीकी सवाल पूछे। उनसे पूछा गया कि घटना के दौरान उनके पास कौन-सी पिस्टल थी, मौके पर कौन-कौन से हथियार मौजूद थे और साथ में मौजूद पुलिसकर्मियों के पास कौन-से असलहे थे। अनुज चौधरी ने जवाब दिया कि उनके पास 9 एमएम की पिस्टल थी।

UP News : संभल हिंसा और चार लोगों की मौत के बहुचर्चित मामले में शनिवार को जिला न्यायालय में अहम सुनवाई हुई। तत्कालीन सीओ और वर्तमान एएसपी अनुज चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी गवाही दर्ज कराई। जिला जज डॉ. विदुषी सिंह की मौजूदगी में करीब दो घंटे तक चली तीखी जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने एएसपी से करीब 150 सवाल पूछे। इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई के मद्देनजर अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
हथियारों और गोलियों पर पूछे गए तकनीकी सवाल
कोर्ट में बचाव पक्ष ने एएसपी अनुज चौधरी से हथियारों और फायरिंग को लेकर कई तकनीकी सवाल पूछे। उनसे पूछा गया कि घटना के दौरान उनके पास कौन-सी पिस्टल थी, मौके पर कौन-कौन से हथियार मौजूद थे और साथ में मौजूद पुलिसकर्मियों के पास कौन-से असलहे थे। इस पर अनुज चौधरी ने जवाब दिया कि उनके पास 9 एमएम की पिस्टल थी, जबकि हमराह पुलिसकर्मियों के पास एके-47 और पंप गन मौजूद थीं। बचाव पक्ष ने एके-47 में इस्तेमाल होने वाली गोली के बारे में भी सवाल किया, जिस पर उन्होंने बताया कि उसमें 7.62×39 एमएम की गोली इस्तेमाल होती है। वहीं, 9 एमएम पिस्टल में इस्तेमाल होने वाली गोली के संबंध में भी उन्होंने जवाब दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार बचाव पक्ष ने तकनीकी सवालों के जरिए उन्हें उलझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सभी सवालों का तथ्यात्मक और संतोषजनक जवाब दिया।
पुलिस फायरिंग को लेकर बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
आरोपियों के अधिवक्ता मोहम्मद आसिफ अख्तर ने कोर्ट में दावा किया कि हिंसा में हुई चारों मौतें पुलिस फायरिंग से हुई थीं, न कि भीड़ की आपसी फायरिंग में। उन्होंने कहा कि शुरुआती पुलिस एफआईआर में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि मौतें पब्लिक फायरिंग में हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बाद में केस को मजबूत करने के लिए मृतकों के परिजनों की ओर से दूसरी एफआईआर दर्ज कराई। बचाव पक्ष की ओर से सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक लगातार जिरह की गई।
पुलिस ने गोली नहीं चलाई : अभियोजन पक्ष
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि एएसपी अनुज चौधरी ने कोर्ट में स्पष्ट कहा कि पुलिस की ओर से किसी प्रकार की सीधी गोलीबारी नहीं की गई थी। हालात को नियंत्रित करने के लिए केवल पंप गन और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से कई अनावश्यक सवाल पूछे गए, जिस पर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति जताई। इसके बाद जिला जज डॉ. विदुषी सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए वकीलों को केवल केस से संबंधित सवाल पूछने के निर्देश दिए।
अगली तारीख 21 मई
शनिवार को हुई सुनवाई के बाद एएसपी अनुज चौधरी से बचाव पक्ष की जिरह पूरी हो गई। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 मई 2026 की तारीख नियत की है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि शेष गवाहों को जल्द न्यायालय में पेश कर महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे।
यह था संभल हिंसा का मामला
बता दें कि 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चन्दौसी में वाद दाखिल किया गया था। कोर्ट के आदेश पर पहले चरण का सर्वे 19 नवंबर को और दूसरा चरण 24 नवंबर 2024 को कराया गया। दूसरे चरण के सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और हिंसा भड़क गई। आरोप है कि उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग की, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में संभल कोतवाली और थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईं।
इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया। कुल 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए। हालांकि बाद में साक्ष्यों के अभाव में सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट से हटा दिया गया। पुलिस शाही जामा मस्जिद सदर जफर अली समेत 158 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इनमें हिंसा के कथित मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम भी शामिल हैं। मुल्ला अफरोज पर एनएसए भी लगाया गया है। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था। मामले में कई अन्य आरोपियों को भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है।




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