All weather trials of AK 203 begin state of the art rifle will replace INSAS कानपुर में बनी स्वदेशी AK-203 का ऑल वेदर ट्रायल शुरू, इंसास की जगह लेगी यह राइफल, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कानपुर में बनी स्वदेशी AK-203 का ऑल वेदर ट्रायल शुरू, इंसास की जगह लेगी यह राइफल

एक मिनट में 600 गोलियां दागने वाली पूर्ण स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल अब ऑल वेदर ट्रायल के चरण में पहुंच गई है। कानपुर की एसएएफ में बने पुर्जों से तैयार इस अत्याधुनिक राइफल को सेना अलग-अलग मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में परख रही है।

Sun, 14 June 2026 08:10 AMPawan Kumar Sharma सुहेल खान, कानपुर
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कानपुर में बनी स्वदेशी AK-203 का ऑल वेदर ट्रायल शुरू, इंसास की जगह लेगी यह राइफल

भारतीय सेना के लिए तैयार की जा रही एक मिनट में 600 गोलियां दागने वाली पूर्ण स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल अब ऑल वेदर ट्रायल के चरण में पहुंच गई है। कानपुर की स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ) में बने पुर्जों से तैयार इस अत्याधुनिक राइफल को सेना अलग-अलग मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में परख रही है। अत्यधिक ठंड, तेज गर्मी, धूल, बारिश और नमी वाले इलाकों में इसके प्रदर्शन की गहन जांच की जा रही है। हिमाचल प्रदेश के सुमडो क्षेत्र में अत्यधिक ठंड के बीच इसका एक ट्रायल पूरा हो चुका है। वहीं, राजस्थान में गर्मी और धूल भरे वातावरण में परीक्षण किया गया।

आने वाले महीनों में बारिश और अधिक नमी वाले इलाकों में भी इसकी क्षमता परखी जाएगी। सेना यह ट्रायल केवल एक बार नहीं, बल्कि एक साल के दौरान अलग-अलग मौसम में कई चरणों में करेगी, जिससे समय के साथ राइफल के मैकेनिज्म, सटीकता और विश्वसनीयता में किसी प्रकार के बदलाव का आकलन किया जा सके। रूस की तकनीक पर आधारित एके-203 अब पूरी तरह स्वदेशी बन चुकी है। इसके अधिकांश पुर्जे कानपुर स्थित एसएएफ समेत देश की अन्य आयुध इकाइयों में बनाए जा रहे हैं, जबकि अमेठी की ऑर्डनेंस फैक्ट्री प्रोजेक्ट कोरवा में इसकी असेंबलिंग हो रही है। रूस और भारत के संयुक्त उपक्रम आईआरआरपीएल ने एके-203 निर्माण परियोजना की शुरुआत की थी।

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रूस से आते थे 85 प्रतिशत पार्ट्स

जुलाई 2024 में एसएएफ में इसके पुर्जों का निर्माण शुरू हुआ। प्रारंभिक चरण में राइफल के 85 प्रतिशत पार्ट्स रूस से आते थे और भारत की हिस्सेदारी केवल 15 प्रतिशत थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से स्वदेशीकरण बढ़ाया गया। भारतीय सेना में एके-203 को इंसास राइफल के विकल्प के रूप में शामिल किया जा रहा है। सेना को चरणबद्ध तरीके से छह लाख से अधिक राइफलें उपलब्ध कराई जानी हैं। एके-203 को एके-47 का आधुनिक और अधिक उन्नत संस्करण माना जा रहा है।

इसे लेकर स्माल आर्म्स फैक्ट्री के महाप्रबंधक सुरेंद्रपति ने बताया कि विकसित भारत संकल्प के तहत एके-203 का स्वदेशीकरण आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशीकरण मिशन के लिए बड़ी उपलब्धि है। अलग-अलग मौसम, भौगोलिक परिस्थितियों में इस असॉल्ट राइफल का परीक्षण किया जा रहा है। सेना की मौजूदगी में सफल परीक्षणों के बाद इसे सेना को सौंपेंगे।

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एके-203 की खासियत

●इसका बटस्टॉक फोल्डिंग और एडजस्टेबल है।

● नाटो ग्रेड का 7.62 एमएम कारतूस का इस्तेमाल।

● मैगजीन की 30 बुलेट एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग।

● 400 मीटर की रेंज तक शत प्रतिशत सटीक प्रभावी फायर।

● पिकेटिनी रेल, नाइट विजन सिस्टम से निशाना लगाना आसान।

● राइफल का वजन 3.8 किलो और लंबाई स्टॉक मोड़ने पर 690 मिमी।

● सर्दी, गर्मी, धूल और नमी में असॉल्ट राइफल को परख रही सेना।

● स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री में बने पुर्जों से तैयार हो रही एके-203।

● राइफल की सटीकता और विश्वसनीयता की होगी गहन जांच।

● छह लाख से अधिक एके-203 सेना को सौंपी जानी हैं।

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एके 47 की खासियत

● एके-47 की लंबाई 875 मिमी है।

● इस रायफल की मैगजीन में 20 राउंड होते हैं, बढ़ भी सकते हैं।

● एके-203 फोर्डेबल और एडजस्टेबल है, जबकि एके-47 में फोर्डेबल सुविधा नहीं है।

● इसका वजन 4.3 किलो है, 380 मीटर की रेंज तक सटीकता के साथ प्रभावी फायर।

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