एक मिनट में 600 गोलियां दागेगी स्वदेशी एके-203 राइफल, कानपुर में बनी किलर मशीन
कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री में बन रही एक मिनट में 600 गोलियां दागने वाली अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल एके-203 का पूरी तरह स्वदेशीकरण हो चुका है। पहले यह रूस के सहयोग से बन रही थी, लेकिन अब एके-203 शत प्रतिशत स्वदेशी हो चुकी है।

कानपुर की स्माल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ) में बन रही एक मिनट में 600 गोलियां दागने वाली अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल एके-203 का पूरी तरह स्वदेशीकरण हो चुका है। रूस के सहयोग से बन रही यह राइफल अभी तक दोनों देशों के पार्ट्स और तकनीक की मदद से बन रही थी, लेकिन अब एके-203 शत प्रतिशत स्वदेशी हो चुकी है। स्वदेशी राइफल को सेना को देने से पहले तीन चरणों में ट्रायल होना है। पहला विंटर ट्रायल इसी फरवरी माह में हिमाचल प्रदेश के सुमडो में होगा। सेना, एसएएफ और एके-203 को असेंबल करने वाली अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री प्रोजेक्ट कोरवा की टीम की मौजूदगी में होगा। तपिश भरी गर्मी में हथियार का ट्रायल राजस्थान और बारिश का ट्रायल दक्षिण भारत में होगा।
रूस और भारत के ज्वाइंट वेंचर आईआरआरपीएल ने एके-203 को बनाने की शुरुआत की। इसका चरणबद्ध तरीके से स्वदेशीकरण किया गया। असॉल्ट राइफल को बनाने का काम एसएएफ में जुलाई 2024 में शुरू हुआ। इसके पार्ट्स पहले 85 प्रतिशत रूस और 15 प्रतिशत भारत के थे। अगले चरणों में रूस की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत फिर 30 प्रतिशत हुई और भारत की 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक हुई। अब एके-203 को शत प्रतिशत स्वदेशी पार्ट्स का प्रयोग कर बनाया गया है।
रक्षा मंत्रालय के कानपुर स्थित एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (डीपीएसयूएडब्ल्यूईआईएल) की हथियार निर्माता ऑर्डिनेंस फैक्ट्री एसएएफ में इस राइफल के अधिकांश पार्ट्स बनते हैं। कोलकाता की राइफल फैक्ट्री ईशापुर में भी कुछ पार्ट्स बनते हैं। अमेठी में असेंबलिंग होती है। भारत अब स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल बनाने वाला देश बन चुका है। फायरिंग ट्रायल के बाद इसे सेना को दे दिया जाएगा।
सैनिकों का मुख्य हथियार बनेगी
सेना के हर जवान को अब असॉल्ट एके-203 से लैस किया जा रहा है। पहले चरण में पांच लाख से अधिक राइफलों को सेना को देने की तैयारी है। इसमें कई राइफल दी भी जा चुकी हैं। अब जो राइफलें दी जाएंगी, वह पूरी तरह से स्वदेशी होंगी। अभी तक सैनिकों का मुख्य हथियार इंसास राइफल है। अगले सात वर्षों में पांच लाख एके-203 असॉल्ट राइफलों से सैनिकों को लैस कर दिया जाएगा।
इस मामले में महाप्रबंधक सुरेंद्रपति ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के स्वदेशीकरण मिशन की बड़ी उपलब्धि है कि अब एके-203 का पूरी तरह से स्वदेशीकरण हो चुका है। इस स्वदेशी असॉल्ट राइफल का विंटर ट्रायल इसी महीने हिमाचल प्रदेश में होगा। इसके बाद तीनों मौसम में राइफल के सफल परीक्षण के बाद इसे सेना को दिया जाएगा। भारत अब स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल बनाने वाला देश बन चुका है।
एके-47 से ज्यादा एडवांस है एके-203
एके-203 असॉल्ट राइफल एके-203 से ज्यादा एडवांस है। एके-203 राइफल की मारक दूरी एके-47 से अधिक है। एके-47 की मैगजीन क्षमता 20 से 30 राउंड की है, जबकि एके-203 की मैगजीन क्षमता पूरी 30 राउंड की है।
इस राइफल की यह खासियत
● इसका बटस्टॉक फोल्डिंग और एडजस्टेबल है
● नाटो ग्रेड का 7.62 एमएम कारतूस का इस्तेमाल
● मैगजीन की 30 बुलेट एक मिनट में 600 राउंड फायरिंग
● 400 मीटर की रेंज तक शत प्रतिशत सटीक प्रभावी फायर
● पिकेटिनी रेल, नाइट विजन सिस्टम से निशाना लगाना आसान
● राइफल का वजन 3.8 किलो और लंबाई स्टॉक मोड़ने पर 690 मिमी
● भारतीय सेना को पांच लाख से अधिक देनी हैं एके 203 राइफलें




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