Akhilesh Yadav asks five questions about Ghazipur violence slams the Yogi government बयान बदलने से सच्चाई नहीं बदलती; गाजीपुर हिंसा पर अखिलेश ने पूछे 5 सवाल, योगी सरकार पर बरसे, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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बयान बदलने से सच्चाई नहीं बदलती; गाजीपुर हिंसा पर अखिलेश ने पूछे 5 सवाल, योगी सरकार पर बरसे

गाजीपुर में युवती की मौत और हिंसा मामले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार से 5 सवाल पूछे हैं। और कहा कि बयान बदलने से सच्चाई नहीं बदलती है। 29 अप्रैल को वे पीड़ित परिवार से मिलने गाजीपुर जाएंगे।

Sun, 26 April 2026 01:17 PMsandeep लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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बयान बदलने से सच्चाई नहीं बदलती; गाजीपुर हिंसा पर अखिलेश ने पूछे 5 सवाल, योगी सरकार पर बरसे

गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव के मामले में राजनीति बयानबाजी भी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि वह 29 अप्रैल को गांव पहुंचकर पीड़िता के परिवार से मुलाकात करेंगे। इससे पहले उन्होने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। जिसमें योगी सरकार पर निशाना साधा और 5 सवाल पूछे। उन्होने कहा कि“बयान बदलने से सच्चाई नहीं बदल जाती” और आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार पीड़ितों पर दबाव बनाकर सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इसे अब तक का सबसे कमजोर शासन बताया। सपा मुखिया ने इस मामले में पांच अहम सवाल उठाए हैं।

एफआईआर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई?

बयान क्यों बदले गए?

पीड़ित परिवार को और परेशान क्यों किया जा रहा है?

पुलिस पर पत्थर फेंकने वाले दबंग तत्वों के खिलाफ कार्रवाई किसने रोकी?

पोस्टमार्टम पर सवालिया निशान क्यों लगा है?

अखिलेश यादव ने दावा किया कि गांव के लोगों को जमीनी सच्चाई पता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट चाहे कुछ भी कहे, हकीकत को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में बयान बदलवाए जा रहे हैं, जिससे समाज में भ्रम और आक्रोश फैल रहा है।

गाजीपुर घटना की हाथरस कांड से तुलना

उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से खासकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय में गुस्सा बढ़ा है। उन्होने गाजीपुर की घटना की तुलना हाथरस कांड से करते हुए कहा कि दोनों मामलों में समानता है, क्योंकि पीड़ित परिवार कमजोर वर्ग से थे और उन पर अत्याचार करने वाले प्रभावशाली लोग थे। उन्होंने इसे सामाजिक भेदभाव की जड़ से जुड़ा मामला बताया।

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जानिए क्या है मामला?

आपको बता दें बीते 15 अप्रैल को गांव निवासी रिता विश्वकर्मा का शव गंगा उतराया मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि हुई थी। युवती के परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस ने एक आरोपी हरिओम पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बीते 22 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने सपा का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा था। इस दौरान ग्रामीणों और सपाजनों के बीच पथराव हो गया था। इसमें पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा समेत कई लोग चोटिल हुए थे। पुलिस ने मामले में सदर विधायक जैकिशन साहू, जंगीपुर विधायक विरेंद्र यादव, सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव समेत 46 नामजद सहित करीब 200 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। मामले में अब तक दस लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज चुकी है।

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पीड़ित परिवार से मिले पुलिस अधिकारी

वहीं मृत किशोरी के परिजनों से शुक्रवार देर रात एडीजी पीयूष मोर्डिया व डीआईजी वैभव कृष्ण ने मुलाकात की, जबकि शनिवार को कमिश्नर एस. राजलिंगम और जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला भी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से घटनाक्रम की जानकारी ली और अब तक की पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और कड़ी सजा दिलाने की मांग की।

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