अखिलेश-प्रियंका गांधी के हमलावर होते एक्टिव हुए अफसर, गाजीपुर पहुंचे ADG, DIG और कमिश्नर
गाजीपुर में किशोरी की मौत के मामले में अखिलेश यादव, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के तीखे हमलों के बाद प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। एडीजी पीयूष मोर्डिया, डीआईजी और वाराणसी कमिश्नर ने पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय का भरोसा दिलाया।

गाजीपुर में किशोरी की मौत को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के 29 को उसके घर जाने का ऐलान करने और प्रियंका गांधी के सीधे पीएम मोदी पर हमला करने से पूरे रेंज के अधिकारी एक्टिव हो गए हैं। करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव में किशोरी के परिजनों से शुक्रवार देर रात एडीजी पीयूष मोर्डिया और डीआईजी वैभव कृष्ण ने मुलाकात की। शनिवार को वाराणसी के कमिश्नर एस. राजलिंगम और जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला भी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से घटनाक्रम की जानकारी ली और अब तक की पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। अफसरों ने दावा किया कि परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की।
एडीजी ने कहा कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। अफवाह फैलाने, कानून हाथ में लेने और माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और लोगों को जांच पर भरोसा रखना चाहिए। जिलाधिकारी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है तथा आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए और जिले में अशांति फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
क्या है मामला
बीते 15 अप्रैल को गांव निवासी रिता विश्वकर्मा का शव गंगा उतराया मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि हुई थी। युवती के परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस ने एक आरोपी हरिओम पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बीते 22 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने सपा का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा था। इस दौरान ग्रामीणों और सपाजनों के बीच पथराव हो गया था। इसमें पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा समेत कई लोग चोटिल हुए थे। पुलिस ने मामले में सदर विधायक जैकिशन साहू, जंगीपुर विधायक विरेंद्र यादव, सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव समेत 46 नामजद सहित करीब 200 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। मामले में अब तक दस लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज चुकी है।
पंचायती राज मंत्री ने परिजनों की दी आर्थिक सहायता
गाजीपुर, कार्यालय संवाददाता। करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया में हुई लड़की की मौत के मामले में शनिवार देर शाम मुख्यमंत्री के निर्देश पर पंचायती राजमंत्री ओम प्रकाश राजभर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने परिजनों से मिलकर संवेदना जताई और न्याय का भरोसा दिया। मंत्री ने परिजनों को पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृति का प्रमाण पत्र और कृषि के लिए डेढ़ बीघा भूमि पट्टा आवंटन प्रमाण पत्र भी प्रदान किया।
अखिलेश के बाद कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा
गाजीपुर, कार्यालय संवाददाता। करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव के मामले में राजनीति बयानबाजी भी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि वह 29 अप्रैल को गांव पहुंचकर पीड़िता के परिवार से मुलाकात करेंगे। सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर उन्होंने कहा, ''ये भाजपा सरकार में एक नया चलन शुरू हो गया है कि पहले वर्चस्ववादी सत्ताधारी अत्याचार करते और करवाते हैं, फिर पीड़ित पर दबाव बनाकर बयान बदलवाते हैं। एक गरीब की बेबसी का फायदा उठाना अन्याय का सबसे अमानवीय रूप है। भाजपा का शासन-प्रशासन निकृष्टतम दौर से गुजर रहा है। उन्होंने मामले की निप्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि कौन लोग पीड़ित पक्ष पर दबाव बना रहे हैं और पुलिस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उधर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि हाथरस, कठुआ, उन्नाव और ग़ाज़ीपुर, यह एक पैटर्न है। मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा, दोषी पुलिस अफसरों पर कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा मिले, उच्च स्तरीय जांच हो और तुरंत न्याय मिले। मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए - आपके राज में बेटियां इतनी असुरक्षित क्यों हैं? ऐसे हालात में न्याय मांगा नहीं, छीना जाता है, और हम छीनकर लाएंगे। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी 'एक्स' पर इसी मामले पर लिखा, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में एक लड़की की हत्या के मामले में पहले केस दर्ज होने में आनाकानी, फिर पीड़ित परिवार को धमकियां मिलना और दबंगों की ओर से अराजकता फैलाना यह दिखाता है कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार चरम पर है।




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