15 साल से MBBS के फाइनल ईयर में अटका छात्र, कोर्ट के आदेश पर आया रिजल्ट, फिर फेल
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। साल 2009 बैच का एक छात्र 15 साल बाद भी फाइनल ईयर में फेल हो गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर उसका रिजल्ट जारी किया। जिसमें दो विषयों में बैक लगी।

गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। साल 2009 बैच का एक छात्र 15 साल बाद भी फाइनल ईयर में फेल हो गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर गोरखपुर विश्वविद्यालय ने उसका रिजल्ट जारी किया। जिसमें दो विषयों में बैक लगी। अब छात्र वकीलों से सलाह लेकर दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रहा है।
झंगहा का रहने वाला यह छात्र 2009 में एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लिया था। हर साल उसके कम से कम दो पेपर में बैक लग जाता। जैसे-तैसे पढ़ाई चलती रही। साल 2024 में उसने फाइनल ईयर की परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट जारी होने के बजाय डीडीयू ने रोक दिया। विश्वविद्यालय द्वारा वजह बताई गई राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नए नियम। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्य परिषद की बैठक में मामले को रखा। जिसके बाद कार्य परिषद ने एनएमसी को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे। इस बीच छात्र परेशान हो गया।
रिजल्ट न मिल पाने के कारण डॉक्टर नहीं बन पा रहे थे छात्र
इससे पहले रिजल्ट न मिलने से तीन छात्रों के डॉक्टर न बन पाने का मामला सामने आया था। दरअसल यह छात्र 1998 से लेकर 2010 बैच के हैं। इन छात्रों के रिजल्ट जारी करने के लिए दो साल से गोरखपुर विश्वविद्यालय नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से गाइड लाइन मांगी थी। जानकारी के मुताबिक तीनों छात्र लंबे समय से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। 2024 में तीनों ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा दी। उसके बाद से उनके रिजल्ट घोषित नहीं हुआ था। इसको लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बीच पिछले दो वर्ष से पत्राचार चल रहा। कॉलेज प्रशासन का कहना था कि छात्र का प्रवेश एमसीआई मानक के तहत हुआ था जिसमें एमबीबीएस करने का कोई समय नहीं तय था। रिजल्ट जारी न होने से वे डॉक्टर नहीं बन पा रहे।
विश्वविद्यालय ने जताई थी आपत्ति
दरअसल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की संबद्धता वर्ष 1972 से लेकर 2024 तक दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) से थी। एमबीबीएस छात्रों के अंक पत्र और प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय से ही जारी होते थे। परीक्षा भी विश्वविद्यालय लेता था। वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अमरेन्द्र सिंह ने तीन छात्रों के परिणाम को लेकर सवाल उठाया। अपने पत्र में उन्होंने बताया कि इस वर्ष परीक्षा देने वाले तीन छात्र क्रमशः 1998, 2009 और 2010 बैच में प्रवेश लिया है। इतने लंबे समय तक कोई कैसे एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकता है, जबकि यह कोर्स 4.5 वर्ष का है।




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