BRD मेडिकल कॉलेज में MBBS इंटर्न छात्रों पर भड़कीं नर्सें, इलाज पर संकट: फेडरेशन ने भी दी चेतावनी
मामले में आक्रोशित महिला और पुरुष स्टाफ नर्सों ने उसी समय प्राचार्य कार्यालय पर पहुंचकर प्राचार्य को शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को सुबह से ही नर्सें बाबा राघव दास की प्रतिमा के पास इकट्ठा होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं।

UP News : यूपी के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में इंजेक्शन ले जाने के मामले में गुरुवार को पुरुष नर्स और इंटर्न छात्र के बीच मारपीट हो गई। आरोप है कि इंटर्न ने अपने साथियों को बुलाकर मारा-पीटा। मामले में आक्रोशित महिला और पुरुष स्टाफ नर्सों ने उसी समय प्राचार्य कार्यालय पर पहुंचकर प्राचार्य को शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। शु्क्रवार को इस मामले ने तूल पकड़ लिया। शुक्रवार को सुबह से ही नर्सें बाबा राघव दास की प्रतिमा के पास इकट्ठा होकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं। आंदोलन के चलते मेडिकल कॉलेज में मरीजों का इलाज बुरी तरह प्रभावित हो गया। वार्डों में डॉक्टरों के अलावा नर्सों की एक भी तैनाती नहीं बची। ज्यादातर नर्सें धरने पर बैठ गईं। इस आंदोलन को वार्ड बॉय, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, क्लर्क समेत अन्य संवर्गों का भी समर्थन मिल गया। अन्य कर्मचारी भी सड़क पर उतर आए। इस घटना की गूंज अब लखनऊ-दिल्ली तक सुनाई देने लगी है। इस मामले में राष्ट्रीय संगठन जुड़ने लगे हैं। ऑल इंडिया रजिस्टर्ड नर्स फेडरेशन ने इस घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अस्वीकार्य बताया है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज गुप्ता ने कहा कि यह घटना केवल एक नर्स के साथ हुई हिंसा नहीं है, बल्कि पूरे नर्सिंग समुदाय और स्वास्थ्य सेवा तंत्र की गरिमा पर सीधा आघात है। अस्पताल जैसे संवेदनशील और सेवा-समर्पित वातावरण में इस प्रकार की हिंसक मानसिकता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
मामला डॉक्टर बनाम कर्मचारी होता देख बीआरडी के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने अवकाश रद्द कर शुक्रवार दोपहर एक बजे कैंपस पहुंचकर डैमेज कंट्रोल शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले बाब राघव दास की प्रतिमा के पास आंदोलनरत नर्सों से बात की। फिर घटना में शामिल इंटर्न को बुलाकर जानकारी ली। प्राचार्य दिल्ली में आईसीएमआर के विशेष प्रशिक्षण पर गए थे। उनके साथ मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकिशोर सिंह भी थे। प्राचार्य शनिवार तक अवकाश पर थे। प्राचार्य ने अपना कार्यभार पैथोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. शिल्पा वाहिकर को सौंपा था। गुरुवार दोपहर को शिक्षकों ने प्राचार्य को घटना की प्राथमिक सूचना दी।
देर शाम समझौता वार्ता टूटने पर भी जानकारी दी गई। इस घटना की सूचना मिलने के बाद लखनऊ और दिल्ली में स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया। शासन ने प्राचार्य से रिपोर्ट मांगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक बात पहुंची। शासन के निर्देश पर प्राचार्य पहली फ्लाइट से लौट आए। शुक्रवार को कैंपस में आते ही विभिन्न समूहों से वार्ता शुरू की। शुक्रवार को सदर एसडीएम और क्षेत्राधिकारी भी पहुंचे। प्राचार्य से बात कर लौट गए। कालेज में आंदोलन जारी है, लेकिन नर्सिंग स्टाफ ने मरीजों की परेशानी देखते हुए हर वार्ड में कम से कम एक सीनियर नर्स तैनात की। नर्सिंग स्कूल की छात्राएं मदद कर रही हैं। नर्सिंग स्टाफ के आंदोलन की वजह से शुक्रवार को भर्ती अपेक्षाकृत कम रही।
ऑल इंडिया रजिस्टर्ड नर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज गुप्ता ने कहा कि अपनी ड्यूटी पर नर्सें दिन-रात मरीजों की सेवा में समर्पित रहती हैं। वे सीमित संसाधनों और अत्यधिक कार्यभार के बीच भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करती हैं। ऐसे में ड्यूटी पर कार्यरत एक नर्स के साथ मारपीट की घटना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून के शासन को भी चुनौती देने वाली है। ऑल इंडिया रजिस्टर्ड नर्सेस फेडरेशन यह स्पष्ट करता है कि दोषी इंटर्नों के विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए । प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी स्वास्थ्यकर्मी इस प्रकार की हिंसा का शिकार न बने। पीड़ित स्टाफ नर्स को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिलना अत्यंत आवश्यक है। यदि इस गंभीर मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो फेडरेशन पूरे देश में व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा।
हुआ क्या था?
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार की अपराह्न दो बजे महिला सर्जरी वार्ड नम्बर 4 में कार्यरत एक इंटर्न छात्र ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी सर्जरी में पहुंचकर बिना पूछे एक इंजेक्शन ले जाने लगा। इतने पर ड्यूटी पर तैनात पुरुष नर्स ने कहा कि अपने काम भर का सिरिंज में भरकर ले जाइए। आरोप है कि इतने पर इंटर्न आगबबूला होकर गाली देते हुए बोला कि पहचानते नहीं हो कौन हैं। नर्स ने कहा नहीं पहचानते हैं। इसके बाद इंटर्न ने थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद मारपीट हो गई। थोड़ी देर बाद इंटर्न ने फोन करके अपने 20 से 25 साथियों को बुला लिया और नर्स को मारने लगे। बीच-बचाव में ड्यूटी पर कार्यरत एक दूसरे पुरुष नर्स को भी मारने-पीटने का आरोप है। इसके बाद सभी महिला और पुरुष नर्स सैकड़ों की संख्या में प्राचार्य कार्यालय पहुंचकर कार्यवाहक प्राचार्य को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग करने लगे।




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