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केवल सात फीसदी किशोरों को ही घर में मिली सेक्स की जानकारी, बाकी 51% को गूगल ने दिया ज्ञान

सेक्स एजुकेशन जरूरी है। लेकिन, सिर्फ सात फीसदी किशोरों को ही घर से सेक्स जानकारी मिली है। जबकि 51 फीसदी को इसका ज्ञान गूगल ने दिया। वहीं, बालिग की उम्र भले ही 18 साल होती है। ये खुलासा आईआईटी कानपुर ने किया है।

Tue, 24 March 2026 09:43 AMPawan Kumar Sharma अभिषेक सिंह, कानपुर
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केवल सात फीसदी किशोरों को ही घर में मिली सेक्स की जानकारी, बाकी 51% को गूगल ने दिया ज्ञान

सेक्स एजुकेशन जरूरी है। लेकिन, सिर्फ सात फीसदी किशोरों को ही घर से सेक्स जानकारी मिली है। जबकि 51 फीसदी को इसका ज्ञान गूगल ने दिया। वहीं, बालिग की उम्र भले ही 18 साल होती है लेकिन, 49 फीसदी छात्र सिर्फ 15 साल की उम्र में ही सेक्स को समझने व जानने लगते हैं। यह खुलासा आईआईटी के रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है। जिसमें 80 फीसदी छात्रों ने माना कि सेक्स एजुकेशन को एकेडमिक करिकुलम में शामिल करने की आवश्यकता है।

जेंडर उत्पीड़न और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सेक्स एजुकेशन जरूरी है। जिसको लेकर लगातार जागरूकता फैलाई जा रही है। इसके बावजूद न तो अभिभावक अपने बच्चों को पूरी तरह सेक्स एजुकेशन के बारे में बता रहे हैं और न ही स्कूल-कॉलेजों में इस शिक्षा को लेकर बताया जाता है।

आईआईटी में बने सेंटर में 1404 छात्र-छात्राओं पर एक अध्ययन किया गया। जिसमें मानसिक स्थिति से लेकर स्वास्थ्य तक की जानकारी ली गई। इस अध्ययन के अनुसार 10 से 12 साल की आयु के 6.5 फीसदी किशोरों को सेक्स की जानकारी हो जाती है। वहीं, 42.7 फीसदी को 13 से 15 साल की आयु में, 27.1 फीसदी को 16 से 18 साल की आयु में और 2.5 फीसदी को 18 साल से अधिक आयु में सेक्स की जानकारी मिली। 21.2 फीसदी किशोरी को कभी सेक्स एजुकेशन नहीं मिली। इसका खुलासा छात्रों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी विस्तार से साझा किया है।

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12.6 फीसदी छात्र इसके बारे में कंफ्यूजन की स्थिति में रहे

रिपोर्ट के मुताबिक 80 फीसदी छात्रों का मानना है कि सेक्स एजुकेशन को एकेडमिक करिकुलम में शामिल करना चाहिए। जबकि 7.2 फीसदी छात्रों ने इस फैसले पर पूरी तरह असहमति जताई। वहीं, 12.6 फीसदी छात्र इसको लेकर कंफ्यूजन की स्थिति में रहे।

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51 फीसदी छात्रों को पहली बार दोस्तों या इंटरनेट से मिली जानकारी

रिपोर्ट के अनुसार 51 फीसदी छात्रों को पहली बार सेक्स की जानकारी दोस्तों या इंटरनेट के माध्यम से मिली। जबकि 49 फीसदी छात्रों को स्कूल या कॉलेज के क्लासरूम में मिली। सिर्फ 6.7 फीसदी छात्रों को अभिभावकों ने और 3.3 फीसदी छात्रों को हेल्थकेयर प्रोवाइडर से जानकारी मिली। इसमें कई छात्र ऐसे रहे, जिन्होंने एक से अधिक विकल्प को बताया।

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