गुड न्यूज: पूर्वी यूपी में दिल के रोगियों को बड़ी सौगात, बीआरडी में बनने जा रहा ये सेंटर
यह सेंटर न केवल गोरखपुर संभाग, बल्कि बहराइच, सिद्धार्थनगर, संत कबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर सहित 18 जिलों के मरीजों को लाभ पहुंचाएगा। इसके साथ ही पश्चिम बिहार के और पड़ोसी देश नेपाल के मरीजों को भी इलाज में लाभ मिलेगा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के दिल के मरीजों को इलाज में बड़ी सौगात मिलने वाली है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 150 बेड का कंप्रीहेंसिव कार्डियक केयर सेंटर बनेगा। हृदयरोग के संपूर्ण इलाज में यह पूर्वांचल का पहला बड़ा केंद्र होगा। इसको लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। पहले चरण में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में 50 बेड का कार्डियो केयर यूनिट तैयार किया जाएगा। इस यूनिट के संचालन के लिए एक अतिरिक्त कैथलैब, इको मशीन बीआरडी को मिलने वाली है। उसके लिए फंड की मंजूरी मिल गई है।
यह सेंटर न केवल गोरखपुर संभाग, बल्कि बहराइच, सिद्धार्थनगर, संत कबीरनगर, महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर सहित 18 जिलों के मरीजों को लाभ पहुंचाएगा। पश्चिम बिहार के और पड़ोसी देश नेपाल के मरीजों को भी इलाज में लाभ मिलेगा। वर्तमान में सुपर स्पेशलिटी में चल रहे 25 बेड के कार्डियोलॉजी यूनिट का विस्तार कर 50 बेड किया जाएगा। यहां कार्डियोलॉजिस्ट के साथ कार्डियोथोरासिक वैस्कुलर सर्जरी (सीवीटीएस) की पूरी सुविधा होगी।
बांड पर आए चिकित्सक कर रहे दिल का इलाज: प्राचार्य ने बताया कि अभी मेडिकल कालेज में कार्डियोलाजिस्ट दो वर्ष के बांड पर आते हैं। हर दो साल बाद चिकित्सक बदल जाते हैं। इस समय चार कार्डियोलाजिस्ट बांड पर तैनात हैं। प्रस्तावित सेंटर में चिकित्सकों के स्थाई पद सृजित होंगे।
अभी मरीज लखनऊ या दिल्ली जाते हैं
प्राचार्य ने बताया कि पूर्वी यूपी में दिल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के बाद डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर से जुड़े हार्ट अटैक के केस बढ़ें हैं। अभी मरीज लखनऊ या दिल्ली जाते हैं, जहां खर्चा और समय दोनों ज्यादा लगता है। बीआरडी में आधुनिक कैथलैब शुरू होने से एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग जैसी प्रक्रियाएं सस्ते में हो सकेंगी।
क्या बोले प्राचार्य
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.राम कुमार जायसवाल ने कहा कि शासन को भेजे प्रस्ताव में कैथलैब, इको मशीन सहित चिकित्सकों के नए पद सृजित करने का अनुरोध किया गया है। कार्डियोथोरासिक वैस्कुलर सर्जन तैनात किए जाएंगे। सीनियर और जूनियर रेजिडेंट के पद भी बनेंगे। बाद में पीजी और सुपर स्पेशलिटी की पढ़ाई भी शुरू होगी। पहले चरण में ही बाईपास सर्जरी और पेसमेकर लगाने की सुविधा शुरू हो जाएगी। पूर्ण रूप से बनने वाले 150 बेड के सेंटर से न केवल इलाज, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सकों का प्रशिक्षण भी संभव होगा। शासन से फंडिंग मिलते ही काम तेजी से शुरू हो जाएगा।




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