सीएम योगी के एक संदेश ने यूपी के शिक्षकों में भर दिया जोश, सामने आने लगीं ऐसी तस्वीरें
सीएम योगी ने कहा था कि बच्चों के अंदर अलग-अलग तरह की प्रतिभा छिपी है। हमें उनकी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। यह शुरू होता है आत्म अनुशासन से। समय पर विद्यालय जाना, परिसर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में योगदान देना, उनमें बच्चों को भी प्रेरित करना चाहिए।

UP News : सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों अनुदेशकों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसी अच्छी पहल के गलत विश्लेषण के चलते सामने आने वाली विसंगतियों को इंगित करते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों से यदा-कदा सामने आने वाली कार्रवाईयों का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि जब बच्चे कहीं श्रमदान करते हैं तो कई बार उसके वीडियोज वायरल कर गलत बात फैलाई जाती है कि देखो बच्चों से काम कराया जा रहा है। इसमें बुरा क्या हो रहा है? ऐसे वीडियोज के आधार पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए बल्कि उसे सम्मानित किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे शिक्षक भारत की भावी पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं। हर चुनौती का सामना करने के लिए उन बच्चों तैयार कर रहे हैं। सीएम के इस संदेश ने शिक्षकों को जोश से भर दिया है और अब स्कूलों से सामूहिक श्रमदान और छात्र-शिक्षक सबके द्वारा मिलकर कैंपस को संवारे जाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं।
सीएम ने कहा था कि बच्चों के अंदर अलग-अलग तरह की प्रतिभा छिपी है। हमें उनकी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। यह शुरू होता है आत्म अनुशासन से। समय पर विद्यालय जाना, विद्यालय के परिवेश और परिसर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में योगदान देना, उनमें बच्चों को भी प्रेरित करना चाहिए। सीएम के संदेश पर अमल करते हुए कई स्कूलों ने सामूहिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं और सोशल मीडिया पर धीरे-धीरे एक ट्रेंड सा बन गया है।
सीएम के गृहजनपद गोरखपुर में भी यह बदलाव खूब देखने को मिल रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में शिक्षक अपने छात्रों के साथ स्कूल परिसर की साफ-सफाई करते, पौधों की देखभाल करते, अतिथियों के स्वागत की तैयारी करते और सामूहिक जिम्मेदारियों से जुड़े कार्य कराते हुए तस्वीरें साझा कर रहे हैं। इन तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है। खास बात यह है कि कुछ समय पहले तक ऐसी तस्वीरों पर जहां सवाल उठते थे और इसे बच्चों से काम कराने के तौर पर देखा जाता था, वहीं अब इन्हीं तस्वीरों को बड़ी संख्या में लोग सकारात्मक पहल बताकर सराह रहे हैं।
कमेंट्स भी बदले
कमेंट्स बता रहे हैं कि लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। एक यूजर ने फेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा- ‘जिस परिसर में रहकर छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं, उसके पर्यावरण के संरक्षण की जिम्मेदारी भी छात्रों की ही होती है। एक अन्य यूजर ने लिखा, यह श्रमदान नहीं बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन सीखने का तरीका है। एक टिप्पणी में कहा गया, जापान में बच्चे अपनी कक्षा खुद साफ करते हैं और यही आदत उन्हें अनुशासित बनाती है।
एक शिक्षक ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा, हम लोग हर शनिवार स्कूल में बागवानी करते थे, उसी से जिम्मेदारी का एहसास हुआ। कई लोगों ने अपने छात्र जीवन की यादें भी साझा कीं। किसी ने लिखा कि जूनियर हाईस्कूल में उन्हें एक-एक क्यारी दी जाती थी, जिसकी देखभाल करनी होती थी। किसी ने बताया कि विद्यालयों में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत सफाई अभियान और श्रमदान कराया जाता था, जिससे बच्चों में अनुशासन और सामाजिक जुड़ाव की भावना विकसित होती थी।
फेसबुक पर एक टिप्पणी की चर्चा खास तौर पर हो रही है। इसमें लिखा गया- ‘प्रशंसा तब और बढ़ जाती है जब शिक्षक सिर्फ आदेश न दें, बल्कि बच्चों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में यही दृश्य देखने को भी मिल रहा है। शिक्षक बच्चों के साथ मिलकर झाड़ू लगाते, पौधरोपण करते और स्वागत की तैयारियों में शामिल नजर आ रहे हैं।’




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