25 thousand demanded for operation and when money was not paid girl leg was broken again अस्पताल ने ऑपरेशन के लिए मांगे 25 हजार, पैसे नहीं मिले तो युवती का दोबारा तोड़ दिया पैर, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अस्पताल ने ऑपरेशन के लिए मांगे 25 हजार, पैसे नहीं मिले तो युवती का दोबारा तोड़ दिया पैर

मुजफ्फरनगर में एक महिला ने डीएम ऑफिस में तहरीर दी है कि उसकी मानसिक रूप से बीमार बेटी के पैर के ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों ने 25 हजार रुपये मांगे। पैसे न देने पर पहले इलाज में टालमटोल की गई और बाद में फॉलोअप जांच के दौरान बेटी का पैर दोबारा तोड़ दिया गया।

Fri, 5 June 2026 03:12 PMPawan Kumar Sharma लाइव हिन्दुस्तान, मुजफ्फरनगर
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अस्पताल ने ऑपरेशन के लिए मांगे 25 हजार, पैसे नहीं मिले तो युवती का दोबारा तोड़ दिया पैर

UP News: यूपी के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां जिला अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही और अवैध धन उगाही की गई। दरअसल एक विधवा अपने 14 साल की मानसिक तौर पर बीमार बेटी के साथ डीएम कार्यालय पहुंचे और यहां सरकारी डॉक्टरों पर पैसे मांगने और इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। महिला का कहना है डॉक्टर ने इलाज के नाम पर पैसे मांगे और जब उसे पैसे नहीं मिले तो उसने बेटी का पैर जबरन मरोड़कर तोड़ दिया। वहीं, इस मामले में अब प्रशासन जांच पड़ताल में जुट गया है।

जिले के रहने वाली पीड़ित महिला रेशमा ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले उसकी मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटी के दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी। जब उसे जिला अस्पताल लेकर जाया गया तो ऑपरेशन के नाम पर 25 हजार की डिमांड की गई। महिला ने असमर्थता जताई तो डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई। जिसके बाद भी अस्पताल कर्मी नहीं मानें और 8 हजार मिलने के बाद बच्ची का ऑपरेशन किया। फिर बाद में बाकि के रकम देने का दबाव बनाया।

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पैसे न मिलने पर डॉक्टर ने जबरन तोड़ दिया पैर

रेशमा का आरोप है कि जब वह दोबारा फॉलोअप चेकअप के लिए अस्पताल पहुंची तो वहां अस्पताल कर्मियों ने बेरुखी से बात की और बाकि के पैसे देने के लिए कहा। जब पीड़िता ने असमर्थता जताई तो आर्थोपेडिक सर्जन ने बेटी का घुटना इतनी जोर से मोड़ा कि वह चीख पड़ी। रेशमा का दावा है कि घुटना मोड़ने पर हड्डी टूटने जैसी आवाज भी आई और बच्ची की स्थिति पहले से और अधिक खराब हो गई।

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सीएमओ ने दिए जांच के निर्देश

रेशमा के मुताबिक पैरों में सूजन बढ़ने पर जब एक्स-रे कराया गया तो रिपोर्ट में दोबारा हड्डी टूटने की बात सामने आई। इस पर रेशमा एक बार फिर अस्पताल पहुंची लेकिन वहां उसे अनसुना कर दिया गया। इसके बाद डीएम ऑफिस पहुंचकर अपनी आपबीती बताई। जिसके इस मामले में सीएमओ ने बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में डॉक्टर या अस्पताल स्टाप की लापरवाही मिलती है तो दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ऑर्थोपेटिक सर्जन डॉक्टर पीके चतुर्वेदी बचाव करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि सभी आरोप गलत हैं। युवती का ऑपरेशन मानकों के अनुसार ही किया गया था।

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