यूपी में बिजली की नई दर में इन 20 लाख उपभोक्ताओं को मिल सकती है बड़ी राहत, आयोग में उठा मामला
यूपी में बिजली की नई दर में इन 20 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। बिजली की नई दरें तय करते हुए आयोग ग्रामीण क्षेत्र में मकानों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को राहत दिए जाने पर फैसला दे सकता है।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में मकानों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को इस साल राहत की उम्मीद है। अब तक नई बिजली दरें तय करने के लिए हुई सुनवाई में उनका मामला उठाया गया है। सूत्रों के मुताबिक बिजली की नई दरें तय करते हुए आयोग इन्हें राहत दिए जाने पर फैसला दे सकता है। तकरीबन 20 लाख उपभोक्ता इस दायरे में आते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में घरों में अपनी आजीविका के लिए तमाम लोग छोटा व्यवसाय मसलन, सिलाई, किराना, मोबाइल रेपयरिंग आदि करने लगते हैं। तमाम मामले ऐसे आए हैं, जहां बिजली विभाग इन लोगों के कनेक्शन आवासीय के बजाय वाणिज्यिक श्रेणी में तब्दील कर देता है। कई स्थानों पर तो इन छोटी दुकानों में घरेलू बिजली इस्तेमाल किए जाने पर बिजली चोरी के मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को राहत दिए जाने का मामला लगातार उठ रहा है। बताया जा रहा है कि इस मसले पर पावर कॉरपारेशन भी अपना अभिमत प्रस्तुत कर चुका है, लिहाजा इसमें फैसला हो सकता है।
2019 में उपभोक्ता परिषद ने रखा था प्रस्ताव
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2019 में नियामक आयोग के सामने प्रस्ताव रखा था। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा कहते हैं कि आयोग से मांग की गई थी कि ऐसे उपभोक्ताओं पर कठोर राजस्व निर्धारित न करते हुए नरमी बरती जाए। आयोग ने बिजली कंपनियों से रिपोर्ट मांगी थी, जिसपर पावर कॉरपोरेशन ने सुझाव दिया था कि 2 किलोवॉट तक और 200 यूनिट तक खपत वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं को कुछ शर्तों के साथ घरेलू श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि, इसपर अब तक अंतिम तौर पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। नोएडा, बरेली और बनारस में अब तक हुई सुनवाई में उपभोक्ता परिषद ने एक बार फिर यह मामला रखा है। उपभोक्ता परिषद सरकार से भी इस संबंध में हस्तक्षेप की मांग करता है।
संघर्ष समिति का आरोप, बड़े पैमाने पर अभियंताओं पर कार्रवाई की तैयारी
वहीं विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अभियंताओं पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी का आरोप लगाया है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बीते दिनों हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने अधिकारियों को निलंबन के लिए कम से कम 5 अधीक्षण अभियंताओं, 15 अधिशासी अभियंताओं और अनुपातिक संख्या में सहायक अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों की सूची तैयार की जाए और एक अप्रैल को दी जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि प्रबंधन की इन कार्रवाइयों से अशांति का वातावरण बन रहा है। इसका असर आगामी गर्मी में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है। लखनऊ समेत प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है। अकेले लखनऊ में इस महीने 340 संविदा कर्मियों को सेवा से बाहर किया जा चुका है।




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