1978 Sambhal riot victims families receive justice after 48 years Yogi government grants land lease संभल दंगे में उजड़ा था परिवार, 48 साल बाद मिला न्याय; योगी सरकार ने दिया जमीन का पट्टा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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संभल दंगे में उजड़ा था परिवार, 48 साल बाद मिला न्याय; योगी सरकार ने दिया जमीन का पट्टा

संभल जिले में 1978 में हुए दंगों के एक पीड़ित परिवार को  जमीन के पट्टे का पहला प्रमाण पत्र मिला है। दरअसल, पीड़ित परिवार दंगों के बाद भयवश साल 1979 में संभल छोड़कर चले गए थे। बाद में योगी सरकार द्वारा दंगों का मुद्दा उठाए जाने के बाद परिवार ने उनसे संपर्क किया था।

Thu, 4 June 2026 03:23 PMPawan Kumar Sharma भाषा, संभल
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संभल दंगे में उजड़ा था परिवार, 48 साल बाद मिला न्याय; योगी सरकार ने दिया जमीन का पट्टा

UP News: यूपी के संभल जिले में साल 1978 में हुए दंगों के एक पीड़ित परिवार को गुरुवार को जिला प्रशासन से जमीन के पट्टे का पहला प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। यह उन परिवारों को फिर से बसाने की कोशिशों का हिस्सा है, जो वर्ष 1978 में हुए दंगे के बाद जिला छोड़कर चले गये थे। अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने राम शरण दास रस्तोगी के परिवार को 100 वर्ग मीटर जमीन के पट्टे का प्रमाण पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि रस्तोगी दंगों के बाद भयवश साल 1979 में संभल छोड़कर चले गए थे।

अधिकारियों के अनुसार, यह आवंटन संभल के आलम सराय देहात गांव में एक समारोह के दौरान किया गया। जिसमें प्रार्थनाएं और वैदिक अनुष्ठान भी किये गये। इस अवसर पर मुरादाबाद के मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार, जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी मौजूद थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, संभल में 29 मार्च 1978 को शुरू हुए सांप्रदायिक दंगे में अनेक लोग मारे गए थे और रामशरण दास रस्तोगी भी उन्हीं में शामिल थे।

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जानकारी के मुताबिक दंगाइयों ने उनकी किराने की दुकान लूटने के बाद उसमें आग लगा दी थी और रस्तोगी की चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार करके हत्या करने के बाद उनके शव को कुएं में फेंक दिया था। वहीं, पट्टा आवंटन प्रमाण पत्र वितरित करने के बाद मंत्री राठौर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस कदम का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने में मदद करना है। कहा कि यह दुखद है कि 1978 के दंगों के दौरान 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, उनके घर जला दिए गए और लोगों पर जुल्म किए गये। कई परिवारों को मजबूरन पलायन करना पड़ा। सरकार ने ऐसे परिवारों को 100 वर्ग मीटर की जमीन देने का फैसला किया है, ताकि वे वापस आकर अपना घर फिर से बना सकें।

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कुएं में मिला था दादा का शव

इस समय दिल्ली में रह रहे रस्तोगी के पौत्र कपिल रस्तोगी ने बताया कि 29 मार्च 1978 को उनके दादा नखासा इलाके में अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी वहां भीड़ आ गई। उन्होंने आरोप लगाया, 'जब मेरे दादा ने दुकान लूटे जाने का विरोध किया, तो भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। उन पर बार-बार चाकुओं से वार किए गए और बाद में उनका शव एक कुएं में पाया गया। धमकियों की वजह से उनका परिवार 1979 में संभल छोड़कर चला गया था और दशकों से बाहर ही रह रहा है।'

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48 साल बाद मिला न्याय

कपिल रस्तोगी ने कहा, 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राज्य विधानसभा में 1978 के दंगों का मुद्दा उठाए जाने के बाद परिवार ने उनसे संपर्क किया और प्रशासन ने उनके पुनर्वास के लिए कदम उठाने शुरू किए। हालांकि 48 साल के लंबे संघर्ष के बाद हमें न्याय मिला।' कपिल के परिवार की सदस्य रुकमा रस्तोगी ने बताया कि दंगों के बाद धमकियां मिलने के कारण परिवार को संभल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

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