nata relationship wife also entitled to pension rules rajasthan high court नाता विवाह वाली पत्नी भी पेंशन की हकदार, राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला; क्या कहा?, Rajasthan Hindi News - Hindustan
More

नाता विवाह वाली पत्नी भी पेंशन की हकदार, राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला; क्या कहा?

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि नाता विवाह से हुई पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार है। भले ही वह दूसरी पत्नी ही क्यों न हो। अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा? इस रिपोर्ट में जानें…

Mon, 19 Jan 2026 10:55 PMKrishna Bihari Singh वार्ता, जयपुर
share
नाता विवाह वाली पत्नी भी पेंशन की हकदार, राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला; क्या कहा?

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मृतक सरकारी कर्मचारी की नाता विवाह से हुई पत्नी भी फैमिली पेंशन की हकदार है। इसके साथ ही अदालत ने राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित नाता विवाह पर कानूनी मुहर लगाते हुए इसे वैध माना है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पति ने किसी महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार किया है और विवाह रीति-रिवाजों से हुआ है तो सर्विस रिकॉर्ड में नाम नहीं होने के आधार पर उसे फैमिली पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता है।

नाता विवाह एक प्रचलित प्रथा

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में नाता विवाह एक प्रचलित प्रथा है। इसमें पति की मौत या उससे अलग होने के बाद महिला किसी दूसरे पुरुष के साथ वैवाहिक नाते में बंधती है। राजस्थान HC ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में यह माना कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित नाता विवाह को विवाह के रूप में कानूनी मान्यता प्राप्त है। खासकर तब जब यह विवाह समाज की मान्य परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ हो।

महत्वपूर्ण फैसला

जस्टिस अशोक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता राम प्यारी सुमन की याचिका पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। याचिका में राम प्यारी सुमन ने खुद को दिवंगत सरकारी कर्मचारी पूरन लाल सैनी की पत्नी बताते हुए फैमिली पेंशन और उसके बकाया भुगतान किए जाने की मांग की थी। पूरन लाल सैनी राज्य सरकार में पटवारी पद पर कार्यरत थे। उनका रिटायर होने के बाद 20 दिसंबर 2020 को निधन हो गया था।

याचिकाकर्ता की क्या दलील?

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मृतक की पहली पत्नी के निधन के बाद उनका पूरन लाल के साथ नाता विवाह हुआ था। इन नाता विवाह के बाद पूरन लाल की एक बेटी भी पैदा हुई। उन्होंने पारिवारिक न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का मामला दायर किया था, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने भरण-पोषण का आदेश भी दिया था। इस मामले में खुद पूरन लाल ने गवाही देते हुए राम प्यारी को पत्नी स्वीकार किया।

राज्य सरकार की क्या दलील?

राजस्थान सरकार का कहना था कि सेवा रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता का नाम दर्ज नहीं है। नाता विवाह को विधिवत विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। इस पर अदालत ने फैमिली कोर्ट के 14 फरवरी 2017 के आदेश और मृतक कर्मचारी की न्यायिक स्वीकारोक्ति को सुबूत माना।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:गुरुग्राम में डॉक्टर बना हैवान; स्कॉर्पियो से पहले टक्कर मारी, विरोध पर कुचला
ये भी पढ़ें:बेचते थे बच्चों के अंग, कराते थे देह व्यापार; रांची पुलिस के सनसनीखेज खुलासे
ये भी पढ़ें:ग्रेनो में इंजीनियर की मौत पर ऐक्शन; जेई टर्मिनेट, दो अधिकारियों को नोटिस

अदालत ने फैसले में क्या कहा?

अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा सात के अनुसार समुदाय की परंपराओं से संपन्न विवाह वैध होगा। नाता विवाह भी इन्हीं प्रथाओं की श्रेणी में आता है। अदालत ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 66 का हवाला देते हुए कहा कि केवल नामांकन नहीं होने के आधार पर वैध पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता राम प्यारी सुमन को मृतक कर्मचारी की पत्नी मानते हुए पारिवारिक पेंशन और समस्त वैधानिक लाभ दिए जाएं।

लेटेस्ट Hindi News, Rajasthan News, Jaipur News, Jodhpur News, Alwar News, Ajmer News, Udaipur News और Kota News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।